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अयोध्या की बीकापुर सीट पर किसका बजेगा डंका: BJP की सीट पर सपा के कई दावेदार, जानें चुनावी समीकरण

Bikapur Vidhan Sabha seat: यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. अयोध्या की बीकापुर सीट पर बीजेपी का कब्जा है. हालांकि, सपा इस सीट को जीतने के लिए चुनावी रणनीति बनाने में जुट गई है. आइए जानते हैं 2027 चुनाव को लेकर क्या चल रहा?.

Written By Amitesh Pandey
Published: Sep 20, 2026, 07:34 PM IST | Updated: Sep 20, 2026, 07:40 PM IST
Image Credit: AI Image
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प्रवेश कुमार/अयोध्या: अयोध्या की बीकापुर विधानसभा सियासत की वह जमीन रही है, जहां चुनावी मुकाबला सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि मजबूत व्यक्तित्वों और व्यक्तिगत जनाधार के बीच भी होता रहा है. 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ यहां राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई हैं. भाजपा के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती है तो समाजवादी पार्टी में टिकट के कई दावेदार हैं. बसपा से पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह उर्फ बबलू सिंह की संभावित दावेदारी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. आइए जानते हैं आखिर 2027 में बीकापुर में किसका बजेगा डंका?.

बीकापुर विधानसभा सीट का चुनावी समीकरण 
रामनगरी अयोध्या की बीकापुर विधानसभा का चुनावी इतिहास हमेशा से दिलचस्प रहा है. यहां सत्ता के समीकरण समय के साथ बदलते रहे हैं और कई बार उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ पार्टी की लहर पर भी भारी पड़ती दिखाई दी है. बीकापुर के चुनावी इतिहास में एक अनोखा संयोग भी चर्चा में रहा है. एक दौर ऐसा था, जब यहां से जीतने वाले कई नेताओं के नाम में ‘राम’ जुड़ा रहा. सीताराम निषाद, श्रीराम द्विवेदी और परशुराम यादव जैसे नेताओं के नामों ने करीब तीन दशकों तक इस चुनावी संयोग को खास बनाया.

डॉ. अमित सिंह चौहान मौजूदा विधायक 
बदलते दौर के साथ भाजपा ने बीकापुर में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की. 2017 में जीत दर्ज करने के बाद पार्टी ने 2022 में भी सीट पर कब्जा बरकरार रखा. मौजूदा विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान ने जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी के हाजी फिरोज खान उर्फ गब्बर ने कड़ी टक्कर दी थी और जीत की दहलीज तक पहुंच गए थे, सपा प्रत्याशी गब्बर खान. 2022 के चुनाव और वर्तमान परिस्थितियों में देखा जाय तो हाजी फिरोज खान उर्फ गब्बर का व्यक्तिगत जनाधार काफी हद तक मजबूत हैं और यही वजह है पिछले चुनाव के करीबी मुकाबले ने साफ कर दिया कि बीकापुर में किसी भी दल के लिए जीत आसान नहीं है.

बीजेपी जीत दोहराना चाहेगी 
बीकापुर की चुनावी जंग में सबसे बड़ा फैक्टर सिर्फ पार्टी नहीं, बल्कि प्रत्याशी का अपना जनाधार है. गांवों की चौपाल से लेकर बाजार तक राजनीतिक चर्चा शुरू हो चुकी है. भाजपा जहां अपनी जीत को दोहराने की तैयारी में है. वहीं, विपक्ष इस बार सत्ता की राह रोकने के लिए नए समीकरण तलाश रहा है. इन्हीं समीकरणों के बीच एक पुराने नाम पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह उर्फ बबलू सिंह की सक्रियता ने सियासी हलचल बढ़ा दी है.

पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह उर्फ बबलू ने बढ़ाई सक्रियता  
बीकापुर की राजनीति में इन दिनों जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह उर्फ बबलू सिंह. विधायक रहते हुए उनकी अलग राजनीतिक पहचान रही और आज भी क्षेत्र में उनकी सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है. समर्थक उन्हें बेबाक और जनता के सुख-दुख में खड़ा रहने वाला नेता बताते हैं, जबकि विरोधी उनकी दबंग छवि को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि क्षेत्र में उनकी व्यक्तिगत पकड़ को नजरअंदाज करना आसान नहीं है.

बसपा का पारंपरिक वोट बैंक किधर जाएगा?  
जितेंद्र सिंह उर्फ बबलू सिंह ने कहा कि विधायक बनने के बाद बीकापुर की जनता किसी भी कार्यालय में फरियाद लेकर नहीं जाएगा बल्कि अधिकारी फरियादी के पास जायेंगे. एक बार बबलू सिंह बसपा से बीकापुर विधानसभा की दावेदारी कर रहे हैं. अगर पार्टी उन्हें टिकट देती है तो बसपा के पारंपरिक वोट बैंक और बबलू सिंह के व्यक्तिगत जनाधार का मेल चुनावी गणित बदल सकता है. उनकी राजनीतिक सक्रियता उस समय और चर्चा में आई जब एक कार्यक्रम की प्रशासनिक अनुमति मिलने और बाद में निरस्त होने का मामला सामने आया. कारण चाहे जो रहे हों, लेकिन इस घटनाक्रम ने बीकापुर की राजनीति में बबलू सिंह को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में जरूर ला दिया.

बबलू सिंह ने बढ़ाई चिंता 
यही वह मोड़ है, जहां बीकापुर की 2027 की लड़ाई सबसे दिलचस्प होती दिखाई देती है. अगर बबलू सिंह चुनावी मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला सिर्फ भाजपा और सपा की सीधी लड़ाई तक सीमित नहीं रहेगा. सवाल यह होगा कि उनका व्यक्तिगत जनाधार बसपा के वोट बैंक के साथ कितना मजबूत तालमेल बना पाता है. बीकापुर में एक मजबूत तीसरा चेहरा सिर्फ अपनी जीत की कोशिश नहीं करता, वह बाकी दोनों प्रमुख दलों का चुनावी गणित भी बिगाड़ सकता है. दूसरी तरफ ये भी माना जाता है कि जितेंद्र सिंह उर्फ बबलू सिंह के चुनाव लड़ने से सबसे ज्यादा बीजेपी को नुकसान पहुचायेंगे.

हाजी फिरोज खान फिर से कर रहे दावेदारी 
उधर, समाजवादी पार्टी के सामने भी चुनौती कम नहीं है. 2022 के चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे हाजी फिरोज खान उर्फ गब्बर एक बार फिर टिकट के प्रमुख दावेदार हैं. उनका कहना है कि पिछले चुनाव में उन्हें एक लाख से ज्यादा वोट मिले और बेहद कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में वह पिछले प्रदर्शन के आधार पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं. बीकापुर के लोगों ने कहा 1 लाख मत पाना आसान नहीं है, इसलिए गब्बर को अनदेखा करना भी पार्टी के लिए नुकसान दायक हो सकता है.

आनंद सेन यादव भी रेस में शामिल 
सपा से टिकट की दौड़ में आनंद सेन यादव भी एक बड़ा नाम हैं. वह पूर्वांचल की राजनीति के चर्चित नेता रहे स्वर्गीय मित्रसेन यादव के बेटे हैं. राजनीतिक विरासत और सामाजिक समीकरणों के आधार पर उनके समर्थक उनकी दावेदारी को मजबूत मानते हैं. वहीं, राघवेंद्र सिंह उर्फ अनूप सिंह भी लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े होने और संगठन में सक्रिय रहने के आधार पर टिकट की मांग कर रहे हैं. ऐसे में सपा नेतृत्व के सामने पिछले चुनाव का प्रदर्शन, राजनीतिक विरासत और संगठन के प्रति लंबे अनुभव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी.

रोचक होगा बीकापुर सीट पर मुकाबला 
दूसरी ओर भाजपा मौजूदा विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान के नेतृत्व और मजबूत संगठन के सहारे विकास कार्यों को अपनी ताकत के रूप में जनता के बीच लेकर जा रही है. अयोध्या में हुए बड़े विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं का असर बीकापुर के मतदाताओं तक कितना पहुंचता है, यह भी चुनावी नतीजे में अहम भूमिका निभाएगा. बीकापुर में चुनावी तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि मुकाबला रोचक होने वाला है. भाजपा के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती है. सपा के सामने सही चेहरे के चयन और पिछली हार को जीत में बदलने की चुनौती है, जबकि बसपा के लिए बबलू सिंह जैसे संभावित चेहरे की सक्रियता को वोटों में बदलना बड़ी परीक्षा होगी.

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About the Author

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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