अलीगढ़ ऑडी कांड में बड़ा एक्शन: पुलिस के हत्थे चढ़ा BJP के पूर्व जिलाध्यक्ष का भतीजा, नेताजी बोले-विक्रांत बेगुनाह
अलीगढ़ में युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. बन्नादेवी थाना पुलिस ने बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष के आरोपी भतीजे को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई हुई है. वहीं देवराज सिंह ने भतीजे को बेगुनाह बताया है.
अलीगढ़, मनीष शर्मा: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के ऑडी कांड में बन्नादेवी थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने इस मामले में बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष देवराज सिंह के आरोपी भतीजे विक्रांत को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष अपने भतीजे को बेगुनाह बता रहे हैं.
हॉर्न बजाने के मामूली विवाद में गई जान
यह घटना मंगलवार, 20 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे की है. मेहरावल नगरिया निवासी 40 वर्षीय मनोज, जो हलवाई का काम करते थे, अपने साथी कन्हैया के साथ बाइक से सामान पहुंचाने शहर आ रहे थे. आरोप है कि सारसौल में ऊदला मोड़ के पास बाइक खड़ी करने के दौरान पीछे से आई ऑडी सवारों ने हॉर्न बजाने को लेकर गाली-गलौज शुरू कर दी. मनोज के विरोध करने पर आरोपियों ने देख लेने की धमकी दी.
आरोप है कि इसके महज 500 मीटर आगे सूतमिल रोड पर ऑडी सवारों ने तेज रफ्तार में बाइक को पीछे से टक्कर मार दी. मनोज कार के आगे गिर गए, जिसके बाद आरोपी ने जानबूझकर गाड़ी मनोज के ऊपर चढ़ा दी. इलाज के दौरान मनोज की मौत हो गई.
CCTV फुटेज ने खोली पोल
शुरुआत में मामला सड़क हादसे का लग रहा था, लेकिन घटना के समय आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर पूरा सच सामने आ गया. एसएसपी नीरज जादौन के मुताबिक, फुटेज में साफ दिखा कि पहली टक्कर के बाद गाड़ी दोबारा मनोज की ओर मोड़ी गई और पहिए उनके ऊपर से गुजार दिए गए.
मृतक के चाचा छोटेलाल की शिकायत पर बन्नादेवी थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा में केस दर्ज किया गया. जांच के दौरान उत्तराखंड नंबर (UK07FW7577) की सफेद ऑडी A-6 कार पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी देवराज सिंह के नाम पंजीकृत पाई गई, जिसे पुलिस ने कब्जे में ले लिया.
बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष के भतीजे पर शिकंजा
मामले में मोड़ तब आया जब बीजेपी नेता के ड्राइवर कपिल ने पुलिस पूछताछ में शुरू में घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की, लेकिन बाद में बयान से पलट गया. ड्राइवर ने पुलिस से बताया कि उसने मालिक के परिवार के एहसान और नौकरी के दबाव में झूठ बोला था, जबकि घटना के वक्त वह कार नहीं चला रहा था. इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर देवराज सिंह के भतीजे विक्रांत को ड्राइवर के रूप में चिन्हित कर गिरफ्तार कर लिया.
चाचा पूर्व जिलाध्यक्ष का दावा
एक तरफ पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के बल पर विक्रांत की गिरफ्तारी को सही ठहरा रही है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व जिलाध्यक्ष देवराज सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं. उनका कहना है कि घटना के वक्त उनका भतीजा विक्रांत अलीगढ़ में मौजूद ही नहीं था. गाड़ी ड्राइवर कपिल ही चला रहा था और हादसे के बाद भीड़ के पथराव से बचने के लिए वह कार सीधे थाने ले गया था.
फिलहाल, पुलिस और भाजपा नेता के अलग-अलग दावों के बीच बन्नादेवी पुलिस आरोपी भतीजे के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई में जुटी हुई है.
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