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किताबों से बाहर निकलेगा AI: यूपी की सभी यूनिवर्सिटी के लिए राज्यपाल का 'मास्टरप्लान', जानिए क्या-क्या बदलेगा?

UP University AI Policy: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति लागू करने की घोषणा की है. अब AI सिर्फ साइंस तक सीमित नहीं रहेगा, इसे साहित्य, कला, भाषा, कृषि और मेडिकल जैसे सभी विषयों में शामिल किया जाएगा. इस नीति को लागू करने और सुरक्षित इस्तेमाल के लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं. यहां जानिए पूरी डिटेल...

Written By Pooja Singh
Published: Sep 15, 2026, 12:19 PM IST | Updated: Sep 15, 2026, 12:26 PM IST
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UP University AI Policy: अगर आप कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं, या आपके घर में कोई स्टूडेंट है, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है. अब तक आपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बारे में सिर्फ खबरों में सुना होगा या मोबाइल ऐप इस्तेमाल करते वक्त थोड़ा-बहुत देखा होगा, लेकिन अब उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत में एक ऐसा बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जो सीधे आपकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ेगा.

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा ऐलान
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने घोषणा की है कि जल्द ही प्रदेश की हर यूनिवर्सिटी में 'AI नीति' (AI Policy) लागू की जाएगी. कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में आयोजित 'AI मंथन' कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस पूरे मास्टरप्लान की रूपरेखा पेश की. आखिर यह AI नीति क्या है, इसे कैसे लागू किया जाएगा और इससे छात्रों के साथ-साथ समाज को क्या लाभ मिलेगा? आइए, इस पूरे फैसले के हर पहलू को समझते हैं...

आखिर क्या है यह AI नीति और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) एक ऐसी तकनीक है, जो कंप्यूटर या मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, समझने और फैसले लेने में सक्षम बनाती है. अब तक हमारे देश में पढ़ाई का ढर्रा काफी हद तक किताबी रहा है. छात्र थ्योरी पढ़ते हैं, परीक्षा देते हैं और डिग्री ले लेते हैं, लेकिन आज का दौर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का मानना है कि उत्तर प्रदेश को अगर तकनीक और विकास की दौड़ में आगे रखना है, तो हमारी शिक्षा प्रणाली को समय के साथ बदलना ही होगा.

इसी सोच के तहत 'AI नीति' लाई जा रही है. इसका मकसद विश्वविद्यालयों की पढ़ाई को सिर्फ पुरानी किताबों तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि छात्रों को उस तकनीक का एक्सपर्ट बनाना है, जिसकी मांग आज पूरी दुनिया में हो रही है.

कैसे लागू होगी यह नीति? जानिए कमेटियों का काम
अक्सर बड़ी-बड़ी योजनाएं सिर्फ कागजों पर बनकर रह जाती हैं, लेकिन इस AI नीति को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए प्रदेश सरकार ने पूरा पक्का इंतजाम किया है. इसके लिए दो कमेटियों का गठन किया गया है. जिनमें AI पॉलिसी एडवाइजरी कमेटी (AI Policy Advisory Committee) और AI पॉलिसी इंप्लीमेंटेशन कमेटी (AI Policy Implementation Committee) शामिल हैं.

1. AI पॉलिसी एडवाइजरी कमेटी: इसका काम दिमाग लगाने यानी नीतियां और नियम तय करने का होगा. यह कमेटी तय करेगी कि AI का इस्तेमाल किस सीमा तक होना चाहिए, क्या सही है और क्या गलत. यह कमेटी AI के सुरक्षित और सही इस्तेमाल के लिए गाइडलाइन्स तैयार करेगी.

2. AI पॉलिसी इंप्लीमेंटेशन कमेटी: इस कमेटी का काम धरातल पर उतरकर काम कराना होगा. एडवाइजरी कमेटी जो नीतियां बनाएगी, उन्हें यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के क्लासरूम तक पहुंचाना, सिलेबस में शामिल कराना और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शुरू कराना इसी कमेटी की जिम्मेदारी होगी.

इन दोनों कमेटियों की वजह से योजना सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर यूनिवर्सिटी में एक निश्चित समयसीमा के भीतर लागू की जाएगी.

छात्रों को क्या संदेश मिला?
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए एक बहुत ही पते की बात कही. उन्होंने कहा कि हमें AI से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. हमें AI का सिर्फ उपभोक्ता (User) बनकर नहीं रहना है, बल्कि इसका रचनाकार (Creator) बनना है. दरअसल, आज हम सब अपने फोन में तरह-तरह के AI ऐप इस्तेमाल करते हैं जैसे चैटजीपीटी, फोटो बनाने वाले ऐप या वॉयस असिस्टेंट. यह हुआ 'यूजर' बनना यानी किसी और के बनाए टूल का इस्तेमाल करना.

7 लाख छात्र पहले से तैयार
राज्यपाल का कहना है कि यूपी के छात्रों को सिर्फ दूसरों के बनाए टूल इस्तेमाल नहीं करने हैं, बल्कि खुद नए-नए AI टूल्स और सॉफ्टवेयर बनाने हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश में अब तक 7 लाख से भी ज्यादा छात्र AI से जुड़े अलग-अलग कोर्स पूरे कर चुके हैं. यानी प्रदेश के युवाओं में इस तकनीक को लेकर पहले से ही जबरदस्त क्रेज है.

क्या सिर्फ साइंस वालों को मिलेगा फायदा?
अक्सर लोगों को लगता है कि AI, कोडिंग या कंप्यूटर जैसी चीजें सिर्फ बी.टेक, बीएससी या कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट्स के काम की हैं, लेकिन इस मास्टरप्लान की सबसे खास बात यही है कि यह भ्रम दूर कर दिया गया है. राज्यपाल ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि AI को सिर्फ साइंस या टेक्नोलॉजी तक सीमित न रखा जाए. इसे हर विषय से जोड़ा जाएगा.

साहित्य और भाषा (Literature & Languages): हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी या अन्य भाषाओं के छात्र AI का इस्तेमाल करके पुरानी पांडुलिपियों का अनुवाद कर सकते हैं, डिजिटल लाइब्रेरी बना सकते हैं.
कला और सामाजिक विज्ञान (Arts & Humanities): इतिहास, भूगोल और समाजशास्त्र में रिसर्च के लिए AI डेटा का विश्लेषण कर सकता है.
कृषि और स्वास्थ्य (Agriculture & Health): कृषि और मेडिकल के छात्रों के लिए तो AI अपार संभावनाएं लेकर आ रहा है.

यानी आप चाहे बी.ए. कर रहे हों, बी.कॉम, बीएससी या बी.टेक AI की पढ़ाई अब सभी के सिलेबस का हिस्सा बनने जा रही है.

आम जनता को क्या होगा फायदा?
जब कोई नई तकनीक आती है, तो आम आदमी सोचता है कि 'इससे मेरा क्या फायदा?' इस सवाल का जवाब भी इस मास्टरप्लान में दिया गया है. राज्यपाल ने छात्रों से अपील की है कि वे किताबी ज्ञान से बाहर निकलें और ऐसे AI मॉडल (सॉफ्टवेयर या ऐप) बनाएं, जो सीधे समाज के काम आ सकें.

1. किसानों के लिए मददगार: हमारे राज्य में एक बड़ी आबादी खेती-किसानी से जुड़ी है. छात्र ऐसे AI मॉडल तैयार कर सकते हैं, जो किसानों को उनकी मिट्टी के हिसाब से यह बताएं कि कब सिंचाई करनी है, कौन सी खाद डालनी है या कौन सा कीड़ा फसल को नुकसान पहुंचा सकता है.
2. मरीजों के लिए राहत: स्वास्थ्य के क्षेत्र में AI बड़ा बदलाव ला सकता है. ऐसे टूल बनाए जा सकते हैं, जो गांव-देहात के मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट देखकर शुरुआती बीमारी का सही अंदाजा लगा सकें, जिससे डॉक्टरों का काम आसान हो जाए और मरीजों को समय पर इलाज मिले.
3. दिव्यांगों के लिए सहारा: ऐसी AI तकनीक जो दृष्टिहीन लोगों को रास्ता बताने में मदद करे, या जो बोल नहीं सकते उनके हाव-भाव को समझकर आवाज में बदल दे.
4. सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा: भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, वेद, पुराण और सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक डिजिटल रूप में पहुंचाने में भी AI का इस्तेमाल किया जाएगा.

साइबर सुरक्षा और दुरुपयोग का खतरा, कैसे निपटेगी सरकार?
जहां AI के ढेरों फायदे हैं, वहीं इसके खतरे भी कम नहीं हैं. आज डीपफेक वीडियो, फेक वॉयस कॉल, डेटा चोरी और साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस चिंता को जाहिर किया है. उन्होंने कहा कि AI का दुरुपयोग रोकना सबसे बड़ी चुनौती है. इससे निपटने के लिए तीन स्तरों पर काम होगा.

1. छात्रों को साइबर सुरक्षा की पढ़ाई: हर छात्र को केवल AI बनाना ही नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि उन्हें AI साइबर सुरक्षा (Cyber Security) की अनिवार्य ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे समझ सकें कि इस तकनीक का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे करना है और साइबर अपराधों से कैसे बचना है?
2. शिक्षकों को स्पेशल ट्रेनिंग: जब तक प्रोफेसर और टीचर खुद AI नहीं समझेंगे, वे छात्रों को कैसे पढ़ाएंगे? इसलिए प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों को AI की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी.
3. यूनिवर्सिटी के कामकाज में पारदर्शिता: यूनिवर्सिटीज के अपने प्रशासनिक कामों जैसे एडमिशन, परीक्षा परिणाम, मार्कशीट जारी करना और पत्राचार में पारदर्शी तरीके से AI का इस्तेमाल किया जाएगा. ताकि, धांधली और देरी को खत्म किया जा सके.

भविष्य के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
अगर पूरे मामले को एक साथ देखें, तो उत्तर प्रदेश सरकार का यह मास्टरप्लान सिर्फ एक नया विषय शुरू करने जैसा नहीं है. यह प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य को पूरी तरह बदलने की एक कोशिश है. आने वाले 5 से 10 सालों में वही देश या राज्य आगे बढ़ेगा, जिसके पास तकनीकी रूप से सक्षम युवा होंगे. 

यूपी की यह 'AI नीति' अगर सही तरीके से लागू होती है, तो यहां के छात्र सिर्फ नौकरियों की कतार में खड़े होने वाले नहीं बनेंगे, बल्कि खुद नई तकनीक और नौकरियां पैदा करने वाले 'क्रिएटर' बनेंगे. किताबों से बाहर निकलकर जब AI किसानों के खेतों, मरीजों के इलाज और युवाओं के हाथों तक पहुंचेगा, तभी इस मास्टरप्लान की असली सफलता दिखाई देगी.

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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