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ट्रेन में रात का सफर हो और सुबह उठने पर पता चले कि ठीक से नींद ही नहीं आई, तो पूरा दिन खराब हो जाता है. खासकर उन यात्रियों के लिए परेशानी ज्यादा होती है, जिनकी बर्थ AC कोच के दरवाजे या टॉयलेट के पास होती है. ऐसे में कोई सामान लेकर गुजरता है, कोई दरवाजा खोलता-बंद करता है, तो कभी गैलरी में लोगों की बातचीत सुनाई देती रहती है.
थर्ड एसी और स्लीपर कोच में सफर करने वाले कई यात्री इस परेशानी से परिचित होंगे. कई बार लोग रात में बार-बार होने वाली हलचल से परेशान होकर करवटें बदलते रहते हैं. लेकिन अब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के एक खास डिजाइन ने इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की है. ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर धनंजय कुमार ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है. इसमें उन्होंने बताया कि नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में गेट के पास यात्रियों की सुविधा के लिए क्या बदलाव किया गया है. वीडियो देखने के बाद लोग कह रहे हैं कि रेलवे को इस तरह की छोटी-छोटी बातों पर पहले ही ध्यान देना चाहिए था.
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कोच के गेट के पास मजबूत स्लाइडिंग डोर लगाया गया है. यह दरवाजा खिसककर खुलता और बंद होता है. इसका मकसद गेट की तरफ से आने वाली हलचल को बर्थ वाले हिस्से से अलग रखना है. पुरानी ट्रेनों में गेट के आसपास की बर्थ पर सोने वाले यात्रियों को बाहर की आवाजाही का सीधा सामना करना पड़ता है. लेकिन नए डिजाइन में इस परेशानी को कम करने की कोशिश की गई है.
इस ट्रेन में सिर्फ दरवाजे का डिजाइन ही नहीं बदला गया है, बल्कि बर्थ और मुख्य गेट के बीच एक्स्ट्रा जगह भी रखी गई है. इसका मतलब है कि गेट से अंदर आने वाले यात्रियों और बर्थ पर आराम कर रहे लोगों के बीच थोड़ी दूरी रहेगी. इसका फायदा रात के समय ज्यादा महसूस हो सकता है. जब यात्री सो रहे होंगे, तब गैलरी में होने वाली आवाजाही सीधे उनकी बर्थ के पास नहीं होगी. खासकर गेट के नजदीक सोने वाले यात्रियों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है.
दरअसल, कोच के दरवाजे और टॉयलेट के पास वाली बर्थ पर सफर करने वालों की शिकायत काफी पुरानी है. रात में जब ज्यादातर यात्री सो जाते हैं, तब भी इस हिस्से में आवाजाही चलती रहती है. कभी कोई टॉयलेट जाने के लिए उठता है, तो कभी कोई स्टेशन पर उतरने या चढ़ने की तैयारी करता है. इसके अलावा गेट खुलने-बंद होने और लोगों की बातचीत से भी नींद टूटती रहती है. ऐसे में वंदे भारत स्लीपर का यह बदलाव यात्रियों के रोजमर्रा के अनुभव को ध्यान में रखकर किया गया है.
धनंजय कुमार के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने इस डिजाइन को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया दी है. एक यूजर ने लिखा कि आरामदायक सफर के लिए बेहतरीन डिजाइन. वहीं दूसरे ने कहा कि यह वाकई शानदार कदम है और इस तरह की व्यवस्था दूसरी ट्रेनों में भी होनी चाहिए. कई लोगों का मानना है कि रेलवे को यात्रियों की ऐसी छोटी-छोटी परेशानियों पर ध्यान देना चाहिए. क्योंकि सफर को आरामदायक बनाने के लिए सिर्फ अच्छी सीटें और आधुनिक इंटीरियर ही काफी नहीं हैं. यात्रियों को बिना किसी परेशानी के सोने और आराम करने की जगह मिलना भी उतना ही जरूरी है.
वंदे भारत स्लीपर का यह डिजाइन दिखाता है कि ट्रेन में आराम का मतलब केवल बेहतर बर्थ या साफ-सुथरा कोच नहीं है. यात्रियों को किन जगहों पर परेशानी होती है, इस पर ध्यान देना भी जरूरी है. हालांकि, असल सफर में यह व्यवस्था कितनी राहत देती है, इसका अनुभव यात्रियों को ट्रेन में यात्रा करने के बाद ही होगा. लेकिन गेट के पास होने वाली हलचल से परेशान रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव उम्मीद जरूर जगाता है. अब देखना होगा कि रेलवे भविष्य में दूसरी ट्रेनों में भी इस तरह की सुविधा लागू करता है या नहीं.