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आप भी यदि अपनी नौकरी के साथ-साथ रिटायरमेंट को सिक्योर करने के लिए एनपीएस (NPS) में निवेश करते हैं तो यह खबर आपके काम की है. जी हां, पीएफआरडीए (PFRDA) ने एनपीएस (NPS) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. यह बदलाव सीधे तौर पर निवेशकों और पेंशन फंड्स को प्रभावित करने वाला है. इन बदलावों को 1 दिसंबर 2026 से लागू किया जाएगा. नए नियमों के तहत NPS स्कीम के नाम रखने का तरीका और उन्हें अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर डिस्पले करने से जुड़े नियम पूरी तरह बदल जाएंगे. निवेशकों के मन में आमतौर पर यही सवाल बना रहता है कि सही पेंशन फंड या स्कीम को कैसे सिलेक्ट करें? PFRDA के नए सर्कुलर से इस तरह के किसी भी कन्फ्यूजन को दूर करने की कोशिश की गई है.
पीएफआरडीए (PFRDA) ने एनपीएस (NPS) के तहत आने वाले मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. 2 नवंबर 2026 को जारी सर्कुलर 28 अगस्त 2026 को जारी किये गए पुराने नियमों का ही बदला हुए रूप है. नए बदलावों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जब भी कोई सब्सक्राइबर NPS अकाउंट ओपन करने या अपनी पसंद की पेंशन स्कीम चुनने जाए तो उसे पूरी ट्रांसपेरेंसी मिले. अक्सर अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर स्कीम्स के नाम और उनके डिस्प्ले का तरीका बदलने से निवेशक कंफ्यूज हो जाते हैं. पीएफआरडीए (PFRDA) के नए नियमों को 1 दिसंबर 2026 से देशभर में लागू कर दिया जाएगा.
पीएफआरडीए (PFRDA) की तरफ से साफ किया गया कि सभी मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) स्कीम्स के नाम तय फॉर्मेट में ही रखे जाएंगे. नए नियमों के अनुसार किसी भी स्कीम के नाम में अहम रूप से तीन एलिमेंट होते हैं. इसके अलावा पीएफआडीए (PFRDA) की तरफ से साफ किया गया कि कैटेगरी कोड 'A' से लेकर 'E' तक अब स्कीम के नाम का हिस्सा नहीं बनाए जाएंगे. यदि कोई पेंशन फंड एक ही कैटेगरी के अंदर एक से ज्यादा स्कीम्स ऑफर कर रहा है, तो हर स्कीम का नाम बिल्कुल अलग और यूनीक होना चाहिए.
अब केवल स्कीम का नाम लिखना ही काफी नहीं होगा. PFRDA के नए सर्कुलर के अनुसार किसी भी मीडिया विज्ञापन, ब्रोशर या दूसरे पब्लिक-फेसिंग लिटरेचर में पेंशन फंड्स को स्कीम के नाम के साथ-साथ उसकी पूरी लागू होने वाली स्कीम कैटेगरी या ग्रोथ कैटेगरी को साफ-साफ दिखाना जरूरी होगा. इसका फायदा यह होगा कि जब भी कोई नया निवेशक किसी विज्ञापन को देखेगा उसे उसे पहली बार में ही यह पता लग जाएगा कि वो स्कीम किस कैटेगरी और रिस्क लेवल के तहत आती है. इससे ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार पर रोक लग सकेगी.
नए सर्कुलर का सबसे बड़ा हिस्सा प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) प्लेटफॉर्म्स पर स्कीम्स के डिस्प्ले से जुड़ा है. PFRDA की तरफ से साफ किया गया कि अलग-अलग PoP प्लेटफॉर्म्स के लिए नियम थोड़े अलग होंगे.