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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्होंने अपनी वतन वापसी को लेकर फिर से बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कह दिया है कि वो दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और उन्हें अपने देश जाने के लिए किसी तीसरे देश के सहारे की जरूरत नहीं है. शेख हसीना इस वक्त भारत में रह रही हैं और उन्होंने गुरुवार को दोहराया कि गिरफ्तारी या मौत की आशंकाओं के बावजूद दिसंबर तक बांग्लादेश वापस लौटने का उनका फैसला अटल है.
न्यूज एजेंसी एपी (AP) को दिए ईमेल इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या वो अपनी सुरक्षित वापसी के लिए अमेरिका या भारत जैसे देशों से बांग्लादेश पर दबाव बनाने की उम्मीद रखती हैं, तो उन्होंने साफ मना कर दिया. हसीना ने कहा, 'मैं सभी देशों के साथ दोस्ती और सहयोग की कद्र करती हूं, यही हमेशा से हमारे देश की विदेश नीति भी रही है, लेकिन अपने ही वतन लौटने के लिए मुझे किसी विदेशी ताकत के आशीर्वाद की कोई जरूरत नहीं है.'
शेख हसीना मौत से नहीं डरतीं. उन्होंने साफ कहा, 'अगर मौत ही मेरा मुकद्दर है, तो मैं किसी गैर मुल्क के बजाय अपने देश की सरजमीं पर, अपने ही लोगों के बीच मरना पसंद करूंगी. इसलिए मैं बांग्लादेश लौटूंगी और मेरा यह फैसला बिल्कुल नहीं बदला है.' उन्होंने कहा 'मुझे पता है कि लौटने पर मुझे अरेस्ट किया जा सकता है, मुझे जेल में डाला जा सकता है, टॉर्चर किया जा सकता है या मार भी दिया जा सकता है. मुझे इन पॉसिबिलिटीज के बारे में पूरी तरह पता है, लेकिन मैं अपनी बाकी जिंदगी अपने लोगों को दूर से तकलीफ में देखकर नहीं बिता सकती.'
हसीना पहले भी साफ कर चुकी हैं कि उनकी वतन वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश की जनता के साथ खड़े होने के लिए है. उन्होंने यह भी कहा था कि जल्द ही तारीख, समय और किस रास्ते से देश में एंट्री लेंगी, इसका ऐलान करेंगी.
हसीना ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जुल्म ढाने का आरोप लगाया है. हसीना का दावा है कि उनके खिलाफ 600 से ज्यादा फर्जी और राजनीति से प्रेरित केस दर्ज किए गए हैं, जबकि कार्यकर्ताओं की हत्याएं और गिरफ्तारियां लगातार जारी हैं.
अवामी लीग पर लगे बैन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, 'पार्टी को चुनाव लड़ने की इजाजत मिलनी चाहिए. अगर अवामी लीग ने कुछ बुरा किया है, तो इसका फैसला जनता की अदालत में होने दीजिए.'
इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा आर्थिक संकट, गैस-बिजली की किल्लत और महंगाई के बीच चीन से 2.3 अरब डॉलर के J-10CE फाइटर जेट्स खरीदने की तैयारी पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने मुल्क में चरमपंथी ताकतों के बढ़ते असर पर भी गहरी चिंता जताई.
दरअसल, अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी और उन्होंने भारत में शरण ली थी, तब से वो यहीं रह रही हैं. तख्तापलट के बाद बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उनकी गैरमौजूदगी में ही उन्हें मौत की सजा सुनाई थी.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक उस हिंसा में करीब 1,400 लोगों की जान गई थी. हालांकि, हसीना ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस पूरी कानूनी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े किए हैं.
इससे पहले शेख हसीना ने दिल्ली से एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें उन्होंने अपनी वतन वापसी से जुड़े खतरों को माना था. उन्होंने कहा था, 'मैंने अपना मन बना लिया है. मैं जानती हूं कि जैसे ही मैं वहां कदम रखूंगी, वे मुझे मार सकते हैं, या गिरफ्तार करके टॉर्चर कर सकते हैं.' इसके साथ ही उन्होंने मुश्किल वक्त में शरण देने के लिए भारत सरकार और यहां के लोगों का शुक्रिया भी अदा किया था.