कभी-कभी घूमने के लिए निकले लोग किसी ऐसी जगह या इंसान से मिल जाते हैं, जिसकी याद सफर खत्म होने के बाद भी साथ रहती है. आभा शर्मा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उत्तराखंड के काली शिला इलाके में सोलो ट्रैवल के दौरान उनकी मुलाकात 70 साल की एक पहाड़ी दादी से हो गई.
आभा अकेले घूमने निकली थीं. पहाड़ों के बीच चलते हुए उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस सफर में एक ऐसी मुलाकात होने वाली है, जो उन्हें जिंदगी को देखने का नया नजरिया देगी. उनकी बातें और हौसला देखकर आभा इतनी प्रभावित हुईं कि इस मुलाकात को जिंदगी भर याद रखने की बात कही. आभा की इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
आभा ने अपनी पोस्ट में बताया कि दादी उत्तराखंड में कालीमठ के पास एक गांव की रहने वाली हैं. वह एक फौजी की पत्नी हैं और उनके चार बेटे हैं. आभा से बातचीत के दौरान दादी बार-बार कह रही थीं, "हम देश के जवान हैं, न रुके हैं, न थमे हैं... ऐसा कौन सा काम है, जो हम कर नहीं सकते?" दादी की ये बातें आभा के दिल को छू गईं. उन्होंने महसूस किया कि किसी इंसान की ताकत का अंदाजा सिर्फ उसकी उम्र देखकर नहीं लगाया जा सकता. जिंदगी के अनुभव और आगे बढ़ते रहने का जज्बा भी इंसान को मजबूत बनाता है.
आभा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि दादी से मिलकर उन्हें समझ आया कि असली ताकत सिर्फ शारीरिक फिटनेस नहीं है. कई बार इंसान के अंदर का हौसला उसे मुश्किल हालात में भी आगे बढ़ने की ताकत देता है. दादी की उम्र 70 साल थी, लेकिन उनके बात करने के अंदाज और चेहरे की मुस्कान में गजब की ऊर्जा थी. आभा के लिए यह देखकर हैरान होना स्वाभाविक था कि इतने कठिन रास्ते पर चलने के बाद भी दादी जिंदगी को कितने सहज अंदाज में जी रही थीं. उनकी बातों में किसी तरह की बनावट नहीं थी. वह जिस तरह अपनी जिंदगी और सफर के बारे में बात कर रही थीं, उसी ने आभा पर गहरी छाप छोड़ी.
आभा ने पहाड़ों में रहने वाले लोगों की सादगी और अपनापन भी अपनी पोस्ट में बताया हैं. उनके अनुसार, पहाड़ी लोगों की जिंदगी में मुश्किलें जरूर होती हैं, लेकिन उनसे निपटने का उनका अंदाज काफी कुछ सिखा जाता है. उनका मानना है कि जिंदगी को समझने के लिए हमेशा किसी मोटिवेशनल स्पीच या बड़ी सीख की जरूरत नहीं होती. कभी-कभी किसी आम इंसान के साथ कुछ कदम चलना और उसकी बातें सुनना भी काफी होता है. दादी से हुई मुलाकात ने उन्हें यही एहसास कराया. एक तरफ पहाड़ों का मुश्किल रास्ता था, तो दूसरी तरफ दादी का बेफिक्र अंदाज. यही छोटी सी मुलाकात उनके लिए एक बड़ी सीख बन गई.
आभा ने इंस्टाग्राम पर अपनी ट्रैवल जर्नी से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए बताया कि वह काली शिला से सिर्फ यादें लेकर नहीं लौट रही हैं, बल्कि इस सफर से उन्हें कुछ ऐसा भी मिला है, जिसे वह लंबे समय तक अपने साथ रखेंगी. आभा खुद को टैरो कार्ड रीडर बताती हैं. इसके साथ ही वह जर्नलिंग गाइड और मूवमेंट कोच भी हैं. वह सोशल मीडिया पर अपनी यात्राओं से जुड़े अनुभव शेयर करती रहती हैं. इस बार उनकी पोस्ट को पसंद करने की वजह पहाड़ों का खूबसूरत नजारा भर नहीं है. लोगों को एक ऐसी महिला का जज्बा देखने को मिला, जिसने उम्र को अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया. दादी के साथ कुछ किलोमीटर का सफर आभा के लिए यादगार बन गया.