नौकरी शुरू करते समय हर कर्मचारी के मन में कम से कम इतनी उम्मीद जरूर होती है कि ऑफिस में काम का दबाव होगा, लेकिन माहौल सामान्य रहेगा. लेकिन Reddit के टॉक्सिक वर्कप्लेस फोरम पर Such_Cauliflower_937 नाम के एक यूजर ने अपनी नौकरी का जो अनुभव शेयर किया, वह इससे बिल्कुल अलग था.
कर्मचारी द्वारा Reddit पर की गई पोस्ट के अनुसार, उसने एक सामान्य कॉर्पोरेट जॉब समझकर कंपनी जॉइन की थी. लेकिन कुछ समय बाद उसे महसूस होने लगा कि यहां काम से ज्यादा कर्मचारियों पर नजर रखने और उन्हें कंट्रोल करने पर जोर दिया जाता है.
कर्मचारी ने दावा किया कि ऑफिस में हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगे थे. इन कैमरों के जरिए बॉस कथित तौर पर कर्मचारियों की कंप्यूटर स्क्रीन को दूर से जूम करके देख सकता था. उसका आरोप है कि कर्मचारियों के काम की निगरानी के अलावा उनके चैट तक पढ़े जाते थे. मतलब ऑफिस में बैठकर कर्मचारी क्या कर रहा है, स्क्रीन पर क्या खुला है और किससे बातचीत हो रही है, इन सब पर लगातार नजर रखी जाती थी. कर्मचारी ने इसी वजह से ऑफिस के माहौल को बेहद तनावपूर्ण बताया. उसके मुताबिक, वहां काम करते हुए ऐसा महसूस होता था जैसे हर समय कोई पीछे खड़ा होकर देख रहा हो.
कर्मचारी की पोस्ट में सिर्फ देखरेख की बात नहीं थी. उसने दावा किया कि कर्मचारियों से हफ्ते के सातों दिन काम कराया जाता था. उसके अनुसार, न ठीक से वीकेंड मिलता था, न छुट्टी और न ही सामान्य तरीके से आराम करने का मौका. कई बार कर्मचारियों को रात 2 बजे तक ऑफिस में रुकना पड़ता था. लगातार इतने लंबे समय तक काम करने का असर उसकी सेहत और मानसिक स्थिति पर भी पड़ा. उसने बताया कि महीनों तक ऐसे माहौल में काम करने के बाद वह बुरी तरह थक चुका था.
कर्मचारी ने बॉस के व्यवहार को लेकर कुछ और आरोप भी लगाए. उसका दावा है कि अगर कोई कर्मचारी ऑफिस पहुंचने में देर करता था तो उसे सजा के तौर पर बाहर खड़ा कर दिया जाता था. पोस्ट में उसने यह भी लिखा कि शाम के समय कर्मचारियों को बालकनी में बैठना पड़ता था, जहां बॉस कथित तौर पर उन लोगों की आलोचना करता था जो उस समय मौजूद नहीं थे. इन घटनाओं ने कर्मचारी के मुताबिक ऑफिस के माहौल को और ज्यादा खराब कर दिया था. काम की जगह पर सहयोग और भरोसे की बजाय डर और लगातार दबाव का माहौल महसूस होने लगा.
महीनों तक सब कुछ सहने के बाद कर्मचारी ने आखिरकार नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया. लेकिन इस बार उसने सिर्फ एक छोटा-सा इस्तीफा नहीं लिखा. उसने एक लंबा रेजिग्नेशन ईमेल तैयार किया. इसमें उसने उन तमाम घटनाओं और व्यवहार का जिक्र किया, जिन्हें वह जहरीला और परेशान करने वाला मानता था. सबसे खास बात यह रही कि उसने यह ईमेल सिर्फ अपने बॉस को नहीं भेजा. कर्मचारी के मुताबिक, उसने अपनी पूरी टीम को ईमेल भेजकर अपने अनुभव के बारे में बताया और फिर नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया.
इस्तीफा भेजने के बाद भी कर्मचारी ने किसी बड़े टकराव का रास्ता नहीं चुना. उसने बताया कि अगली सुबह वह जल्दी ऑफिस पहुंच गया. उस समय उसका बॉस सो रहा था. तब कर्मचारी ने चुपचाप अपना सामान इकट्ठा किया और वहां से निकल गया. उसने इस पूरे घटनाक्रम को अपनी जिंदगी के एक बेहद खराब दौर से बाहर निकलने जैसा बताया. उसके लिए यह सिर्फ नौकरी छोड़ना नहीं था, बल्कि महीनों से चल रही मानसिक थकान और तनाव से बाहर निकलने का फैसला था.
पोस्ट सामने आने के बाद Reddit पर लोगों ने कर्मचारी का समर्थन किया. कई यूजर्स ने उससे आगे की कहानी पूछी और जानना चाहा कि इस्तीफा पढ़ने के बाद बॉस ने क्या प्रतिक्रिया दी. एक यूजर ने पूछा कि क्या बॉस ने उसे फोन किया या इस्तीफे का जवाब दिया. कर्मचारी ने जवाब दिया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ. उसके अनुसार, बॉस का अहंकार इतना ज्यादा है कि उसने कोई प्रतिक्रिया देना भी जरूरी नहीं समझा. एक अन्य यूजर ने कर्मचारी का समर्थन करते हुए कहा कि उसे खुशी है कि वह ऐसे माहौल से बाहर निकल गया. कुछ लोगों ने उसे आगे बेहतर नौकरी और बेहतर माहौल मिलने की शुभकामनाएं भी दीं.
इस पूरी कहानी ने सोशल मीडिया पर वर्कप्लेस कल्चर को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी. नौकरी में काम का दबाव होना सामान्य है, लेकिन लगातार निगरानी, छुट्टी की कमी और लंबे काम के घंटों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. हालांकि, यहां यह बात भी ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप एक Reddit यूजर की तरफ से किए गए हैं. पोस्ट में बताए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. कंपनी या संबंधित बॉस का पक्ष भी सामने नहीं आया है. फिर भी इस कहानी ने एक सीधा सवाल जरूर खड़ा किया है. कर्मचारी से काम लेना और उसकी जिम्मेदारी तय करना एक बात है, लेकिन अगर ऑफिस का माहौल इतना दबाव वाला हो जाए कि कर्मचारी खुद को कैद जैसा महसूस करने लगे, तो क्या ऐसी नौकरी में टिके रहना सही है?
हर नौकरी में मुश्किल दिन आते हैं. कभी डेडलाइन का दबाव होता है, कभी बॉस की डांट और कभी काम का बोझ बढ़ जाता है. लेकिन अगर यही चीजें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाएं और कर्मचारी को लगातार तनाव महसूस होने लगे, तो स्थिति पर दोबारा सोचना जरूरी हो जाता है. Such_Cauliflower_937 की पोस्ट में कम से कम उसकी कहानी यही बताती है. महीनों तक कथित दबाव झेलने के बाद उसने अंत में खुद के लिए एक फैसला लिया. उसने इस्तीफा लिखा, अपनी बात टीम तक पहुंचाई और फिर चुपचाप ऑफिस से बाहर निकल गया. कई बार करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ नई नौकरी ढूंढना ही जरूरी नहीं होता. कभी-कभी गलत जगह से बाहर निकलना भी उतना ही बड़ा फैसला होता है.
(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)