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ताइवान की अर्थव्यवस्था इन दिनों तेजी से बढ़ रही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री ने देश की आर्थिक ग्रोथ को काफी मजबूती दी है. 2026 की पहली छमाही में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ करीब 14 फीसदी बताई गई है. लेकिन आर्थिक तरक्की का फायदा हर किसी को सस्ते घर के रूप में नहीं मिल रहा.
बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आम खरीदारों के लिए अपना घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में कुछ लोग उन मकानों की तरफ देखने लगे हैं, जिन्हें दूसरे खरीदार किसी भी कीमत पर लेने से बचते हैं. ये वो घर होते हैं जहां कभी लोगों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो चुकी होती है. क्योंकि ये घर वहां सस्ते में मिल रहे हैं, सिर्फ इसलिए इन 'भूतिया घरों' की डिमांड बढ़ गई है. इनको लोग 'हॉन्टेड होम' भी कहते हैं.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान में ऐसे घरों को 'श्योंग झाई' कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो ये वे मकान हैं, जिनमें पहले किसी व्यक्ति की हिंसक या परेशान करने वाली परिस्थितियों में मौत हुई हो. किसी घर में आत्महत्या हुई हो, हत्या हुई हो या किसी और असामान्य तरीके से मौत हुई हो, तो उस मकान की मार्केट वैल्यू पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. रिपोर्टों के मुताबिक, मौत जितनी ज्यादा हिंसक या डरावनी मानी जाती है, घर की कीमत उतनी ही नीचे जा सकती है. कुछ मामलों में ऐसे मकान सामान्य मार्केट रेट के मुकाबले करीब आधी कीमत पर भी बिक जाते हैं. इसका मतलब जिस घर को ज्यादातर लोग मनहूस मानकर छोड़ देते हैं, वही किसी दूसरे के लिए कम बजट में घर खरीदने का मौका बन जाता है.
पहली नजर में यह सौदा काफी आकर्षक लग सकता है. मान लीजिए किसी इलाके में सामान्य घर खरीदना मुश्किल है, लेकिन उसी जगह एक ऐसा मकान आधी कीमत में मिल रहा है. खरीदार के लिए यह बड़ा फर्क हो सकता है. लेकिन यहां समस्या सिर्फ लोगों के डर की नहीं है. ऐसे घरों को दोबारा बेचना भी आसान नहीं होता. अगर आज किसी ने कम कीमत में मकान खरीद लिया, तो जरूरी नहीं कि कुछ साल बाद उसे सामान्य कीमत पर बेच पाए. रियल एस्टेट एजेंट वू काईवेन ने बताया कि लोग ऐसे घरों को अशुभ मानते हैं और उन्हें डर रहता है कि इसका असर उनकी किस्मत पर पड़ेगा. यही सोच इन प्रॉपर्टीज की कीमत को प्रभावित करती है.
इन मकानों की एक और बड़ी परेशानी बैंकिंग से जुड़ी है. किसी सामान्य घर पर बैंक को भरोसा रहता है कि अगर ग्राहक लोन नहीं चुका पाया तो प्रॉपर्टी बेचकर रकम वापस निकाली जा सकती है. लेकिन 'श्योंग झाई' के मामले में तस्वीर अलग है. बैंक को डर रहता है कि अगर ग्राहक डिफॉल्ट कर गया तो इस घर को दोबारा बेचना मुश्किल हो सकता है. इसका मतलब खरीदार के लिए घर सस्ता जरूर है, लेकिन बैंक के लिए वही घर खतरों वाला एसेट बन जाता है. इसी वजह से ऐसे मकानों पर फाइनेंसिंग को लेकर भी दिक्कतें सामने आती हैं.
इन घरों को लेकर लोगों की सोच को समझने के लिए ताइवान की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को भी समझना जरूरी है. ताइवान में 'घोस्ट मंथ' की मान्यता काफी पुरानी है. माना जाता है कि इस दौरान अंडरवर्ल्ड के दरवाजे खुल जाते हैं और मृत लोगों की आत्माएं धरती पर लौटती हैं. यह अवधि सितंबर के मध्य तक चलती है. इस दौरान कई मंदिरों में आत्माओं के लिए खाना और दूसरी चीजें चढ़ाई जाती हैं. लोग मानते हैं कि इस तरह भटकती आत्माओं को शांत किया जा सकता है. यही मान्यताएं 'हॉन्टेड होम' खरीदने के फैसले में भी दिखाई देती हैं.
जो लोग ऐसे मकान खरीदने का फैसला करते हैं, उनमें से कई सीधे सामान लेकर घर में शिफ्ट नहीं होते. पहले धार्मिक या आध्यात्मिक रस्म कराई जाती है. आध्यात्मिक मान्यताओं से जुड़े लोगों के मुताबिक, इन रस्मों का मकसद घर में मौजूद किसी भटकी आत्मा को वहां से जाने में मदद करना और मकान से जुड़ी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना होता है. इसके बाद ही नए मालिक घर में रहने की शुरुआत करते हैं. बेशक, इन रस्मों का वैज्ञानिक आधार अलग मुद्दा है, लेकिन खरीदारों के लिए यह मानसिक सुकून का हिस्सा हो सकता है. वे चाहते हैं कि पुराने हादसे का असर उनकी नई जिंदगी पर न पड़े.
इन घरों की पूरी कहानी दरअसल ताइवान के हाउसिंग संकट की एक अलग तस्वीर दिखाती है. एक तरफ तेजी से बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें हैं, दूसरी तरफ ऐसे घर हैं जिनकी कीमत कम है, लेकिन उनके साथ एक भारी सामाजिक कलंक जुड़ा हुआ है. किसी खरीदार के लिए यह फैसला सिर्फ इतना नहीं है कि घर कितना बड़ा है, लोकेशन कैसी है और कीमत कितनी है. उसे यह भी सोचना पड़ता है कि क्या वह उस घर का इतिहास स्वीकार कर पाएगा? क्या उसका परिवार वहां आराम से रह पाएगा? और अगर भविष्य में उसे घर बेचना पड़ा तो क्या कोई दूसरा खरीदार मिलेगा?
ताइवान के 'श्योंग झाई' यह बताते हैं कि प्रॉपर्टी की कीमत सिर्फ ईंट, सीमेंट और लोकेशन से तय नहीं होती. किसी जगह से जुड़ी कहानी और लोगों की मान्यताएं भी उसकी कीमत बदल सकती हैं. एक तरफ महंगे घरों से परेशान लोगों को ऐसे मकान कम बजट में अपना घर बनाने का मौका देते हैं. दूसरी तरफ इन्हें खरीदने वाले को बैंक लोन, भविष्य में रीसेल और परिवार की सोच जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. फिलहाल ताइवान में बढ़ती घरों की कीमतों के बीच 'मौत के साये वाले घर' एक अजीब विरोधाभास बनकर सामने आए हैं. जिन मकानों के दरवाजे से लोग डरकर लौट जाते हैं, उन्हीं दरवाजों पर अब कुछ खरीदार सस्ते घर की उम्मीद लेकर दस्तक दे रहे हैं.