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Loneliest Place On Earth: अगर आपको लगता है कि आप अपने कमरे में अकेले हैं, तो जरा सोचिए उस जगह के बारे में जहां से जमीन की दूरी हजारों किलोमीटर दूर है. समंदर के बिल्कुल बीचों-बीच एक ऐसा रहस्यमयी कोना मौजूद है, जिसे दुनिया की सबसे अकेली जगह कहा जाता है. इस जगह पर इंसान दूर-दूर तक दिखाई नहीं देते और अगर आप यहां पहुंच गए तो आपसे सबसे करीब जो इंसान होगा, वो जमीन पर नहीं बल्कि अंतरिक्ष में तैर रहा होगा.
अगर आप कभी विशाल प्रशांत महासागर के बीच में अकेले तैर रहे हों, तो दूर-दूर तक दिखता पानी और ऊपर फैला असीम आसमान आपको यह अहसास कराएगा कि आप इस पूरी दुनिया में अकेले हैं. लेकिन साउथ पैसिफिक ओशियन में एक ऐसी जगह सचमुच मौजूद है. इस जगह को विज्ञान की दुनिया में पॉइंट निमो के नाम से जाना जाता है. यह पूरी पृथ्वी का सबसे अलग हुआ और सबसे दूर स्थित हिस्सा है.
पॉइंट निमो किसी भी सूखी जमीन या टापू से करीब 2,688 किलोमीटर दूर है. इसका मतलब यह है कि अगर आप पॉइंट निमो पर मौजूद हैं, तो आपके सबसे करीब रहने वाले इंसान जमीन पर कहीं नहीं मिलेंगे. आपके सबसे करीबी इंसान होंगे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में मौजूद अंतरिक्ष यात्री, जो पृथ्वी से करीब 300 से 400 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगा रहे होते हैं. यानी जमीन के किसी शहर से ज्यादा करीब आपके लिए स्पेस होगा.
पॉइंट निमो के नीचे का समंदर कोई छोटा-मोटा पानी का गड्ढा नहीं है, बल्कि यह लगभग 4,000 मीटर गहरा है. इतने गहरे और अलग-थलग पानी में भी लाइफ मौजूद है. यहां छोटे-छोटे माइक्रोब्स से लेकर बड़ी-बड़ी टूना मछली, स्वॉर्डफिश और मार्लिन जैसी समुद्री जीव तैरती रहती हैं. हालांकि, दूर होने की वजह से यहां इंसानी हलचल बिल्कुल ना के बराबर है और यही वजह है कि यह जगह वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत बड़ा सीक्रेट वेपन बन चुकी है.
पॉइंट निमो को सिर्फ इसकी दूरी के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि इसे स्पेसक्राफ्ट सीमेट्री यानी अंतरिक्ष यानों का कब्रिस्तान भी कहा जाता है. जब भी कोई स्पेस स्टेशन, सैटेलाइट या रॉकेट अपनी उम्र पूरी कर लेता है, तो उसे अंतरिक्ष में आवारा घूमने के लिए नहीं छोड़ा जाता. अगर वो अंतरिक्ष में रहेगा तो बाकी सैटेलाइट्स से टकरा सकता है. इसीलिए वैज्ञानिक उसे सही सलामत पृथ्वी के वायुमंडल में घुसाकर इसी पॉइंट निमो के पानी में गिरा देते हैं.

यह इलाका इंसानी बस्तियों से इतना दूर है कि अगर कोई अनियंत्रित कचरा या मलबे के टुकड़े आसमान से गिरते भी हैं, तो किसी इंसान को चोट लगने का रिस्क जीरो होता है. इसके अलावा, यह जगह किसी भी देश के कानून या बॉर्डर में नहीं आती, जिसकी वजह से यहां स्पेस कचरा गिराना बहुत आसान और सुरक्षित माना जाता है. 1971 से लेकर 2016 के बीच में ही यहां 263 से ज्यादा अंतरिक्ष यानों को गिराया जा चुका है. रूस का मशहूर 'मीर' स्पेस स्टेशन और छह 'सैल्यूट' स्पेस स्टेशन भी इसी समंदर की गहराई में दफन हैं.
अब नासा एक बहुत बड़ा प्लान बना रहा है. हमारा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जो पिछले कई दशकों से इंसानों का अंतरिक्ष में घर बना हुआ है, अब पुराना हो रहा है. साल 2031 में इसे रिटायर करने की तैयारी है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह स्पेस स्टेशन कोई छोटा-मोटा ढांचा नहीं है, बल्कि इसका वजन लगभग 400 टन है. नासा का प्लान है कि इस विशालकाय 400 टन के ढांचे को अंतरिक्ष से खींचकर पॉइंट निमो के समंदर में क्रैश कराया जाए.
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को एक ऐसा विशेष स्पेसक्राफ्ट बनाने की जिम्मेदारी दी गई है जो ISS को उसकी कक्षा (ऑर्बिट) से बाहर धक्का देगा. यह यान ISS को खींचकर पृथ्वी के वायुमंडल की तरफ लाएगा और बहुत ही कंट्रोल तरीके से पॉइंट निमो के ऊपर वाले इलाके में गिराएगा. नासा की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन से पहले ISS में मौजूद सभी एस्ट्रोनॉट्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा और स्टेशन को पूरी तरह खाली कर दिया जाएगा.
जब यह 400 टन का ISS पृथ्वी के वातावरण में घुसेगा, तो हवा के घर्षण की वजह से इसमें भीषण आग लग जाएगी. इसका ज्यादातर हिस्सा आसमान में ही जलकर राख हो जाएगा. लेकिन जो भारी मेटल के टुकड़े बचेंगे, उन्हें सही निशाना साधकर पॉइंट निमो के अनइनहैबिटेड एरिया में गिराया जाएगा. इस तरह, दशकों तक विज्ञान का प्रतीक रहा ISS भी पॉइंट निमो के शांत और अकेले पानी में हमेशा-हमेशा के लिए सो जाएगा.