)
समंदर की दुनिया देखने में जितनी खूबसूरत है, उतनी ही हैरान करने वाली भी. यहां एक से बढ़कर एक जीव हैं, जो बेहद अजीब काम कर सकते हैं. उनमें से एक पिस्तौल श्रिम्प भी है. इसको स्नैपिंग श्रिम्प भी कहा जाता है. इसका नाम भले ही झींगे जैसा साधारण हो, लेकिन इसका हमला बेहद अनोखा है.
इसके शरीर पर एक बड़ा पंजा होता है, जिसे यह इतनी तेजी से बंद करता है कि पानी में एक तेज प्रेशर वेव और खास तरह का बुलबुला पैदा हो जाता है. यही बुलबुला इसका असली हथियार है. यह झींगा किसी शिकार को सीधे पंजे से मारने के बजाय पानी के अंदर पैदा हुए इस कैविटेशन बबल के असर से उसे कमजोर या बेहोश कर सकता है.
पिस्तौल श्रिम्प के बड़े पंजे को देखकर ऐसा लग सकता है कि यह किसी मजबूत पकड़ के लिए बना होगा. लेकिन इसकी असली ताकत पंजे के बंद होने से पैदा होने वाले पानी के दबाव में छिपी है. जब यह अपना पंजा तेजी से बंद करता है, तो पानी बहुत तेज रफ्तार से बाहर निकलता है. इस प्रक्रिया में पानी के अंदर कम दबाव का एक छोटा सा हिस्सा बनता है और वहां कैविटेशन बबल पैदा हो जाता है. इसके बाद यह बुलबुला तेजी से सिकुड़कर फूटता है. इसी दौरान पैदा होने वाली शॉक वेव आसपास मौजूद छोटे शिकार के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.
इस छोटे से जीव की सबसे हैरान करने वाली क्षमता इसकी आवाज है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, पिस्तौल श्रिम्प के स्नैप से पैदा होने वाली आवाज करीब 218 डेसिबल तक पहुंच सकती है. यह आवाज पानी के अंदर पैदा होती है और इतनी तेज होती है कि इसके आसपास का समुद्री माहौल कुछ समय के लिए शोर से भर जाता है. इसी वजह से स्नैपिंग श्रिम्प की कॉलोनियों में एक साथ होने वाली स्नैपिंग वैज्ञानिकों के लिए भी खास दिलचस्पी का विषय रही है. इसका मतलब सिर्फ 4 सेंटीमीटर का जीव पानी के अंदर ऐसा शोर पैदा कर सकता है, जिसकी कल्पना उसके आकार को देखकर करना मुश्किल है.
इस जीव की कहानी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा कैविटेशन बबल है. जब बुलबुला तेजी से बनता और फिर टूटता है, तो उसके अंदर बेहद कम समय के लिए तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में पिस्तौल श्रिम्प के कैविटेशन बबल के तापमान को करीब 4,800 डिग्री सेल्सियस तक बताया गया है. यह आंकड़ा सूरज की सतह के तापमान के करीब है. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी होगी. यह गर्मी पूरे समंदर या आसपास के पानी को गर्म नहीं कर देती. यह बेहद छोटे इलाके में और बहुत कम समय के लिए पैदा होती है. इसी वजह से इसका असर स्थानीय स्तर पर बेहद तेज होता है.
पंजा बंद करते समय पानी जिस रफ्तार से बाहर निकलता है, वह भी कम हैरान करने वाली नहीं. हाउ स्टफ वर्क्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पानी का यह जेट करीब 25 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार तक पहुंच सकता है. मतलब यह छोटा सा झींगा पानी के अंदर अपने पंजे से इतनी तेजी से प्रेशर बनाता है कि उसका असर शिकार तक एक झटके में पहुंच सकता है. इसी ताकत का इस्तेमाल वह शिकार पकड़ने के अलावा अपने रहने की जगह बनाने और खतरा आने पर बचाव के लिए भी करता है.
पिस्तौल श्रिम्प असल में अल्फीडे परिवार से जुड़े झींगों का एक ग्रुप है. इसे स्नैपिंग श्रिम्प भी कहा जाता है. दुनिया में इसकी 600 से ज्यादा प्रजातियां बताई जाती हैं. इसके बड़े स्नैपर क्लॉ की वजह से इसे पिस्तौल से तुलना की जाती है. यह पंजा शरीर के मुकाबले काफी बड़ा हो सकता है और पानी में वही इसका सबसे खास हथियार है. कुछ प्रजातियां गोबी जैसी छोटी मछलियों के साथ भी दिलचस्प पार्टनरशिप में रहती हैं. झींगा सुरंग या बिल जैसी जगह तैयार करता है, जबकि मछली आसपास खतरा होने पर नजर रखती है. दोनों को इस रिश्ते से फायदा मिलता है.
पिस्तौल श्रिम्प की आवाज इतनी ज्यादा होती है कि बड़ी संख्या में मौजूद इन झींगों की स्नैपिंग पानी के अंदर जबरदस्त बैकग्राउंड नॉइज पैदा कर सकती है. इसी वजह से इनके समूहों को नौसेना और समुद्री रिसर्च के लिए लंबे समय से दिलचस्प माना जाता रहा है. खासकर सोनार सिस्टम के संदर्भ में पिस्तौल श्रिम्प की आवाज का जिक्र मिलता है, क्योंकि पानी के अंदर पैदा होने वाला शोर दूसरी आवाजों को पहचानना मुश्किल बना सकता है. यानी यह छोटा जीव सिर्फ अपने शिकार के लिए ही 'शोर वाली गन' नहीं चलाता, बल्कि हजारों की संख्या में होने पर पूरे पानी के माहौल को ही शोर से भर सकता है.
पिस्तौल श्रिम्प की एक और खासियत इसके पंजे से जुड़ी है. अगर लड़ाई के दौरान इसका बड़ा स्नैपर क्लॉ चला जाए, तो यह सिर्फ उसी पंजे को दोबारा बनाने की क्षमता नहीं रखता. कुछ प्रजातियों में शरीर की दूसरी तरफ मौजूद छोटा पंजा भी आगे चलकर बड़े स्नैपर पंजे की भूमिका ले सकता है. मतलब जिस तरफ पहले छोटा पंजा था, वहां भी शक्तिशाली पंजा विकसित हो सकता है. समंदर में लगातार होने वाली लड़ाई और शिकार के बीच यह क्षमता उसके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है.
पिस्तौल श्रिम्प सिर्फ समुद्री जीव विज्ञान के लिए दिलचस्प नहीं है. इसके कैविटेशन बबल और पानी के दबाव को समझने में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी इंजीनियरिंग के नजरिए से भी रही है. कैविटेशन को नियंत्रित करने की तकनीक कई क्षेत्रों में पहले से महत्वपूर्ण है. पिस्तौल श्रिम्प ने यह जरूर दिखा दिया कि प्रकृति लाखों साल के विकास के दौरान बेहद छोटे शरीर में भी ऐसी जटिल तकनीक विकसित कर सकती है, जिसे देखकर इंसान भी हैरान रह जाए.
पिस्तौल श्रिम्प की कहानी हमें समंदर की एक ऐसी दुनिया दिखाती है, जहां ताकत हमेशा शरीर के आकार से तय नहीं होती. सिर्फ कुछ सेंटीमीटर का यह जीव अपने पंजे से पानी में शॉक वेव पैदा करता है, हजारों डिग्री की गर्मी वाला कैविटेशन बबल बनाता है और तेज आवाज से शिकार को निशाना बनाता है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि उसके पास बंदूक जैसी कोई चीज नहीं है. उसका पंजा ही उसका हथियार है और पानी ही उसका मैदान. यही वजह है कि पिस्तौल श्रिम्प को समंदर का नन्हा 'बाहुबली' कहना सिर्फ मजेदार तुलना नहीं, बल्कि उसकी असाधारण ताकत को समझाने का एक शानदार तरीका भी है.