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कैसे इंसान की एक छोटी सी गलती कभी-कभी बड़े हादसे में बदल जाती है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण रोबर्टा नाम की महिला का घर है. एक शाम जब रोबर्टा और उनका पार्टनर घर पर नहीं थे, तभी अचानक उनके घर में आग लग गई. दोनों इस हादसे में सुरक्षित रहे, लेकिन घर के अंदर मौजूद उनकी पालतू बिल्लियां इस आग से नहीं बच सकीं.
रोबर्टा ने सोशल मीडिया पर आग के बाद घर के अंदर की तस्वीरें शेयर कीं. इसमें आप देख सकते हैं कि कमरा पूरी तरह जला हुआ नजर आ रहा है. उन्होंने बताया कि आग एक लिथियम बैटरी से शुरू हुई और कुछ ही मिनटों में इतनी तेजी से फैली कि लपटें छत तक पहुंच गईं. उनका दावा है कि इस हादसे में उनकी 6,000 से ज्यादा किताबें भी लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गईं. किताबों का इतना बड़ा कलेक्शन उनके लिए सिर्फ सामान नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत और यादों का हिस्सा था.
रोबर्टा के मुताबिक, आग की शुरुआत एक लैपटॉप के लिथियम बैटरी सेल के खराब होने के बाद हुई. खास बात यह है कि उस समय लैपटॉप चार्जिंग पर नहीं था. यही वह बात है, जिसे लेकर उन्होंने लोगों को चेतावनी दी. उनका कहना था कि पुराने फोन, कंप्यूटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सिर्फ इसलिए सुरक्षित नहीं माने जा सकते क्योंकि वे इस्तेमाल में नहीं हैं या प्लग से जुड़े नहीं हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे पुराने डिवाइस को घर की अलमारी या दराज में भूलकर रखने के बजाय सही तरीके से रिसाइकिल या डिस्पोज किया जाए.
आज स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट, ई-बाइक और कई दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है. इन बैटरियों का फायदा यह है कि ये कम जगह में काफी ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकती हैं. लेकिन यही बात इनके साथ जोखिम भी जोड़ती है. बैटरी के अंदर स्टोर एनर्जी किसी खराबी की स्थिति में बहुत तेजी से गर्मी पैदा कर सकती है. अगर सेल डैमेज हो जाए, शॉर्ट सर्किट हो या बैटरी में कोई दूसरी खराबी आ जाए, तो तापमान तेजी से बढ़ सकता है. ब्रिटिश सेफ्टी काउंसिल के मुताबिक, लिथियम-आयन बैटरी से जुड़ी आग की घटनाएं आम नहीं हैं, लेकिन जब बैटरी फेल होती है तो आग का खतरा गंभीर हो सकता है.
हममें से बहुत से लोगों के घर में पुराने फोन और लैपटॉप पड़े रहते हैं. नया फोन खरीदने के बाद पुराना फोन किसी दराज में चला जाता है. खराब लैपटॉप अलमारी में रख दिया जाता है और फिर सालों तक उसकी तरफ ध्यान नहीं जाता. समस्या यह है कि बैटरी समय के साथ खराब हो सकती है. सिर्फ डिवाइस का इस्तेमाल बंद कर देना बैटरी को पूरी तरह जोखिम से बाहर नहीं करता. यही वजह है कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को लंबे समय तक घर में जमा करके रखने के बजाय उन्हें सही ई-वेस्ट या बैटरी रिसाइक्लिंग सिस्टम के जरिए हटाना ज्यादा सुरक्षित ऑप्शन है.
हर खराब बैटरी आग पकड़ ले, ऐसा नहीं है. लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर फोन या लैपटॉप की बैटरी फूलने लगे, डिवाइस का कवर उभरने लगे, बैटरी सामान्य से ज्यादा गर्म हो, तेजी से डिस्चार्ज हो या उसमें किसी तरह की असामान्य गंध या खराबी महसूस हो, तो उसे इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए. ब्रिटिश सेफ्टी काउंसिल के मुताबिक, बैटरी का फूलना या ज्यादा गर्म होना उसके फेल होने के संभावित संकेतों में शामिल है. ऐसी स्थिति में बैटरी को दबाना, छेद करना, खोलना या खुद ठीक करने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है.
लिथियम बैटरी से जुड़ी सबसे आम गलतफहमी यह है कि खतरा सिर्फ चार्जिंग के वक्त होता है. चार्जिंग के दौरान जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन खराब या डैमेज बैटरी दूसरे समय भी समस्या पैदा कर सकती है. बैटरी पर ज्यादा गर्मी, दबाव या शारीरिक नुकसान का असर पड़ सकता है. इसलिए पुराने डिवाइस को गर्म जगह, धूप या ऐसी जगह रखने से बचना चाहिए, जहां उस पर भारी सामान गिर सकता हो या वह दब सकता हो. खास तौर पर डैमेज हो चुके डिवाइस को सामान्य इलेक्ट्रॉनिक सामान की तरह इस्तेमाल करते रहना सही नहीं है.
पुराना फोन या लैपटॉप खराब हो गया है तो उसे सीधे घर के सामान्य कूड़ेदान में डाल देना आसान लगता है. लेकिन लिथियम बैटरी के मामले में यह खतरनाक हो सकता है. ब्रिटिश सेफ्टी काउंसिल के मुताबिक, लिथियम बैटरियों को सामान्य घरेलू कचरे में नहीं डालना चाहिए. इन्हें एक्सपर्ट रिसाइक्लिंग सेंटर या संबंधित हेजर्डस वेस्ट डिस्पोजल सर्विस के जरिए जमा करना चाहिए. इसकी वजह भी साफ है. कूड़ा उठाने और प्रोसेस करने के दौरान बैटरी दब सकती है या डैमेज हो सकती है. इससे आग लगने का खतरा पैदा हो सकता है.
अगर आपके घर में कई पुराने फोन, लैपटॉप या दूसरे बैटरी वाले डिवाइस पड़े हैं, तो सबसे पहले यह पता करें कि आपके इलाके में ई-वेस्ट या बैटरी कलेक्शन की सुविधा कहां उपलब्ध है. डिवाइस को खोलकर बैटरी निकालने या उसे खुद डिस्मेंटल करने की कोशिश न करें, खासकर तब जब बैटरी फूली हुई या डैमेज दिखाई दे रही हो. सही रिसाइक्लिंग सेंटर में इन्हें देने से बैटरी और बाकी इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस किया जा सकता है.
रोबर्टा ने अपनी कहानी इसलिए शेयर की, जिससे दूसरे लोग उस गलती से बच सकें, जिसका नुकसान उन्हें जिंदगी भर याद रहेगा. उन्होंने घर और हजारों किताबों के साथ अपने पालतू जानवर भी खो दिए. उनका अनुभव डराने वाली कहानी जरूर है, लेकिन इसका मकसद हर पुराने फोन या लैपटॉप को खतरा बताना नहीं है. लिथियम-आयन बैटरियां सामान्य तौर पर सुरक्षित प्रोडक्ट हैं और इनसे गंभीर घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं. खतरा मुख्य रूप से बैटरी के डैमेज, खराबी, ज्यादा गर्म होने या गलत तरीके से यूज करने पर बढ़ता है. इसलिए घर में रखे पुराने गैजेट को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. जरूरत सिर्फ इतनी है कि खराब या लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाले डिवाइस को यूं ही सालों तक न छोड़ें और बैटरी वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान को सही तरीके से रिसाइकिल करें.