रात में अकेली महिला का सड़क पर निकलना कितना सेफ है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए एक लड़के ने खुद को महिला की तरह तैयार किया और नोएडा की सड़कों पर निकल पड़ा. उसने साड़ी पहनी, विग लगाई और लड़कियों जैसा मेकअप किया, जिससे दूर से देखने पर उसे आसानी से पहचाना न जा सके.
इस पूरे एक्सपेरिमेंट को कैमरे में रिकॉर्ड भी किया गया. इसका वीडियो इंस्टाग्राम हैंडल @dhiraj_sharmaa04 से शेयर किया गया. वीडियो में लड़के को पहले तैयार होते और फिर रात के समय सड़क पर निकलते देखा जा सकता है. अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
वीडियो में दावा किया गया है कि सड़क पर पहुंचते ही लड़के को लोगों के घूरने का सामना करना पड़ा. वह कुछ देर तक चलता रहा, लेकिन जल्द ही एक कैब ड्राइवर की नजर उस पर पड़ी. कैब उसके पास आकर रुकी और ड्राइवर उसे देखने लगा. लड़का आगे बढ़ा तो मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. कुछ देर बाद एक कार उसके पास आकर रुकी और फिर उसके पीछे चलने लगी.
वीडियो में लड़का जिस रास्ते पर जाता दिखाई देता है, कार भी कुछ दूरी तक उसके पीछे आती नजर आती है. कुछ समय बाद कार उसके आगे आकर रुकती है. लड़के के अनुसार, कार में बैठे शख्स ने उसे अंदर आने के लिए कहा. यह देखकर वह घबरा गया और वहां से दूसरी तरफ तेजी से निकल गया. कुछ दूर जाने के बाद ही उसे लगा कि शायद अब वह उस कार से बच गया है. उसके लिए यह सिर्फ एक सोशल मीडिया वीडियो बनाने का हिस्सा नहीं रह गया था. अब उसे खुद यह अनुभव काफी असहज लगने लगा था.
कुछ देर बाद एक और कैब वहां से गुजरती है. युवक आगे बढ़ता रहता है, लेकिन कैब कुछ दूरी पर जाकर रुक जाती है. इसके बाद ड्राइवर कैब को वापस घुमाकर उसकी तरफ आता दिखाई देता है. कैब रुकने के बाद ड्राइवर लड़के को अपनी तरफ आने का इशारा करता है. लड़का वहां रुकने के बजाय तेजी से वहां से निकल जाता है. वीडियो में यह हिस्सा खास तौर पर लोगों का ध्यान खींच रहा है, क्योंकि लड़का खुद महिला के गेटअप में था और उसके मुताबिक उसे उस समय काफी डर महसूस हुआ.
आखिरकार लड़के का दोस्त बाइक लेकर वहां पहुंचता है. लड़का उसी महिला वाले गेटअप में बाइक पर बैठने की कोशिश करता है. लेकिन वीडियो के मुताबिक, इसी दौरान वही कैब उसकी तरफ फिर आती दिखाई देती है. इसके बाद युवक जल्दी से वहां से निकल जाता है. पूरे एक्सपेरिमेंट के दौरान उसके साथ मौजूद कैमरा इस घटना को रिकॉर्ड करता रहा. वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हो रही है कि अगर कोई व्यक्ति वास्तव में रात में अकेला हो और उसके पास मदद के लिए कोई दोस्त या कैमरा न हो तो स्थिति कितनी अलग हो सकती है.
वीडियो बनाने वाले लड़के ने इस पूरे अनुभव को डरावना बताया. उसका कहना है कि इस एक्सपेरिमेंट के बाद उसे अंदाजा हुआ कि रात में सड़क पर अकेली महिला को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, यह वीडियो पूरे नोएडा की सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर पेश नहीं करता. यह एक व्यक्ति का अनुभव और सोशल मीडिया पर शेयर किया गया एक्सपेरिमेंट है. वीडियो में दिखाई देने वाली घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है. इसलिए इसे पूरे शहर में महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार का अंतिम निष्कर्ष मानना सही नहीं होगा.
वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी काफी दिलचस्प हैं. कुछ यूजर्स ने कहा कि युवक ने साड़ी पहन रखी थी और फिर भी उसे घूरने और परेशान करने की कोशिश की गई. ऐसे में महिलाओं के कपड़ों को उनके साथ होने वाले गलत व्यवहार की वजह बताना सही नहीं है. एक यूजर ने लिखा कि अगर साड़ी पहनने के बावजूद ऐसा व्यवहार हुआ तो साफ है कि समस्या कपड़ों में नहीं, बल्कि लोगों की सोच में है. एक दूसरे यूजर ने इसे पूरे देश से जुड़ी समस्या बताया. वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे एक्सपेरिमेंट से सुरक्षा को लेकर चर्चा जरूर शुरू होती है, लेकिन किसी एक वायरल वीडियो के आधार पर पूरे शहर को असुरक्षित बताना भी सही नहीं होगा.
इस वीडियो की सबसे बड़ी बात शायद यही है कि इसे सिर्फ वायरल कंटेंट मानकर आगे बढ़ जाना आसान है, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर सवाल भी है. क्या किसी महिला को रात में सड़क पर निकलते समय इस बात की चिंता होनी चाहिए कि कोई उसका पीछा करेगा या बिना वजह उसके पास आकर रुकेगा? महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ पुलिस, CCTV या स्ट्रीट लाइट का मुद्दा नहीं है. सड़क पर मौजूद लोगों का व्यवहार भी उतना ही मायने रखता है. कोई महिला रात में बाहर निकले तो उसे लगातार यह महसूस न हो कि आसपास की हर नजर उसके पीछे लगी है, यही एक सुरक्षित शहर की असली पहचान होनी चाहिए.
नोएडा का यह वायरल वीडियो भले ही एक लड़के के किए गए एक्सपेरिमेंट पर आधारित हो, लेकिन इसने महिला सुरक्षा को लेकर पुरानी बहस को फिर सामने ला दिया है. लड़के के साथ जो हुआ, वह कितना आम है और कितना असामान्य, यह अलग सवाल है. लेकिन एक बात साफ है. सड़क पर किसी महिला का होना अपने आप में किसी को उसे घूरने, पीछा करने या असहज महसूस कराने का हक नहीं देता. शहर तभी सुरक्षित माना जाएगा, जब रात के समय भी महिलाएं बिना डर के अपनी मंजिल तक पहुंच सकें.
(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)