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बनारस नहीं, यह लंदन है: टेम्स नदी के किनारे पर पहली बार हुई भव्य 'गंगा आरती'; शंखनाद और दीपों की रोशनी से जगमगाया ब्रिटेन, Video Viral

भारत से हजारों किलोमीटर दूर लंदन में रविवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने वहां रहने वाले भारतीय और हिंदू समुदाय को भावुक कर दिया. ऐतिहासिक टेम्स नदी के किनारे पहली बार गंगा आरती का आयोजन किया गया. हजारों लोग इस खास मौके के गवाह बने. बड़े दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार, संगीत और प्रार्थना के बीच आयोजन ने भारत की गंगा आरती की याद दिला दी. इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Sep 14, 2026, 01:54 PM IST | Updated: Sep 14, 2026, 02:28 PM IST
Image Credit: लंदन की टेम्स नदी पर पहली बार हुई गंगा आरती!
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लंदन की टेम्स नदी के किनारे रविवार का माहौल बाकी दिनों से बिल्कुल अलग था. नदी के सामने बड़ी संख्या में लोग जमा थे और चारों तरफ भक्ति संगीत और मंत्रों की आवाज सुनाई दे रही थी. सामने बहती टेम्स और किनारे जलते बड़े-बड़े दीपों ने पूरे माहौल को खास बना दिया.

यह लंदन में पहली बार था, जब टेम्स नदी के किनारे गंगा आरती की गई. इस आयोजन का नाम रखा गया था 'Ganga Aarti on the Thames: A Ceremony of Light'. इसका मतलब टेम्स पर गंगा आरती को रोशनी और आभार के एक खास समारोह के रूप में पेश किया गया.

भारत की गंगा आरती की याद आई

भारत में गंगा के किनारे होने वाली आरती दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है. शाम के वक्त घाटों पर एक साथ जलते दीप, घंटियों की आवाज और मंत्रोच्चार का नजारा लोगों को अपनी ओर खींचता है. लंदन में हुए इस आयोजन में भी इसी भावना को सामने लाने की कोशिश की गई. हालांकि यहां गंगा नहीं, बल्कि टेम्स नदी थी. आयोजकों का कहना था कि इसका मकसद किसी नदी को दूसरी नदी से जोड़ना नहीं, बल्कि प्रकृति, जीवन और उसके प्रति आभार की भावना को सामने लाना था.

हजारों लोग बने इस खास पल के गवाह

इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू और साउथ एशियन समुदाय के लोग पहुंचे. आध्यात्मिक नेताओं के साथ कई हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. ऐतिहासिक ओल्ड रॉयल नेवल कॉलेज, ग्रीनविच के सामने हुए इस आयोजन में जब कई स्टेप वाले बड़े तेल के दीप जलाए गए तो पूरा किनारा रोशनी से जगमगा उठा. प्रार्थना, संगीत और मंत्रोच्चार के बीच लोगों ने इस पल को अपने कैमरों में भी कैद किया. अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जो भी यह वीडियो देख रहा है, उसे बनारस की गंगा आरती याद आ रही है.

 

 

'यह सिर्फ पूजा नहीं, आभार का पल'

चिन्मय मिशन UK की रेजिडेंट टीचर ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने इस आयोजन की भावना समझाते हुए कहा कि पीढ़ियों से लोग गंगा के किनारे नदी, प्रकृति और जीवन को बनाए रखने वाली चीजों के प्रति आभार जताने के लिए इकट्ठा होते रहे हैं. उनके मुताबिक, टेम्स पर गंगा आरती भी इसी भावना को लेकर आयोजित की गई. इसका मकसद लोगों को एक साथ लाना, उम्मीद और एकता की भावना पैदा करना और प्रकृति के प्रति आभार जताना था.

चिन्मय मिशन के 75 साल से भी जुड़ा आयोजन

यह कार्यक्रम सिर्फ गंगा आरती तक सीमित नहीं था. इसे चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 साल पूरे होने के मौके पर हो रहे ग्लोबल सेलिब्रेशन का भी हिस्सा बनाया गया. चिन्मय मिशन की शुरुआत 1951 में हुई थी. यह संगठन वेदांत की शिक्षा, आध्यात्मिक विकास और समाज सेवा से जुड़े काम करता है. आज इसके दुनिया भर में 350 से ज्यादा सेंटर बताए जाते हैं. चिन्मय मिशन UK ने इस आयोजन को अपने संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद की विरासत से भी जोड़ा. संगठन के मुताबिक, स्वामी चिन्मयानंद ने वेदांत की प्राचीन सोच को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने के लिए अपना जीवन समर्पित किया था.

टेम्स में कुछ भी नहीं डाला गया

इस आयोजन की एक खास बात यह भी रही कि पूरी गंगा आरती जमीन पर ही आयोजित की गई. कार्यक्रम से जुड़ी कोई भी सामग्री टेम्स नदी में नहीं डाली गई, न ही कुछ नदी में बहाया या छोड़ा गया. आयोजकों ने इस बात को खास तौर पर स्पष्ट किया. इसके पीछे मकसद धार्मिक आयोजन के साथ-साथ पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी का संदेश देना भी था.

प्रकृति को सिर्फ पूजना नहीं, बचाना भी है

चिन्मय मिशन UK ने कहा कि गंगा आरती हमें याद दिलाती है कि प्राकृतिक दुनिया को हल्के में नहीं लेना चाहिए. प्रकृति के प्रति आभार केवल पूजा या प्रार्थना के जरिए नहीं, बल्कि उसकी देखभाल और जिम्मेदारी से भी जताया जाना चाहिए. यानी टेम्स के किनारे हुई इस आरती में धार्मिक भावना के साथ पर्यावरण का संदेश भी जोड़ा गया. लोगों से अपील की गई कि नदियों और प्रकृति के साथ सम्मान और जिम्मेदारी का व्यवहार किया जाए.

पहली बार का आयोजन रहा हाउसफुल

इस खास आयोजन को लेकर लोगों की दिलचस्पी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यक्रम पूरी तरह सोल्ड आउट रहा. बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचे. आयोजकों को उम्मीद है कि टेम्स पर हुई यह पहली गंगा आरती आने वाले समय में टोटली टेम्स फेस्टिवल का नियमित हिस्सा बन सकती है. अगर ऐसा होता है तो लंदन में रहने वाली भारतीय और साउथ एशियन कम्युनिटी के लिए यह हर साल मिलने वाला एक खास मौका बन जाएगा.

लंदन में बही गंगा आरती की भावना

टेम्स के किनारे हुई यह पहली गंगा आरती अपने आप में भारत और ब्रिटेन के बीच किसी औपचारिक कार्यक्रम से ज्यादा एक भावनात्मक जुड़ाव का पल रही. हजारों किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों ने अपने देश की एक जानी-पहचानी परंपरा को एक नई जगह पर महसूस किया. हालांकि आरती टेम्स के किनारे हुई, लेकिन उसके पीछे की भावना वही रही जो हमारे भारत में होती है. प्रकृति के प्रति आभार, जीवन के प्रति सम्मान और लोगों को एक साथ जोड़ने की कोशिश. शायद यही वजह है कि लंदन में हुई यह पहली गंगा आरती सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और पर्यावरण के संदेश को दुनिया के सामने रखने वाला खास मौका बन गई.

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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