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जापान को दूर से देखने पर लगता है कि यहां हर तरफ बड़ी-बड़ी बिल्डिंग, चमकती सड़कें और टेक्नोलॉजी ही टेक्नोलॉजी होगी. लेकिन इसी जापान का एक चेहरा ऐसा भी है, जहां पहाड़ों के बीच छोटे-छोटे घर बसे हैं और जिंदगी शहरों की भागदौड़ से काफी दूर नजर आती है.
भारतीय यूट्यूबर माधुरी मिश्रा जापान में रहती हैं और सोशल मीडिया पर वहां की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो शेयर करती रहती हैं. इस बार उन्होंने टोक्यो से निकलकर ओकुतामा टाउन का रुख किया. उनका मकसद जापान के उस हिस्से को करीब से देखना था, जिसे आमतौर पर विदेशी पर्यटकों की नजर कम मिलती है.
माधुरी ने अपने वीडियो में बताया कि ओकुतामा टाउन का बड़ा हिस्सा पहाड़ी इलाके में बसा हुआ है. यहां पहुंचते ही उन्हें शहरों से बिल्कुल अलग माहौल महसूस हुआ. उन्होंने रास्ते में दिखाई देने वाली एक छोटी गाड़ी की तुलना भारत के ऑटो से की. इसके बाद गांव की गलियों और आसपास के पहाड़ी इलाके को दिखाते हुए उन्होंने बताया कि यहां प्रकृति और इंसानी बस्ती एक साथ दिखाई देती है. ओकुतामा का करीब 90 फीसदी इलाका चिचिबू-तामा-काई नेशनल पार्क के दायरे में आता है. यही वजह है कि यहां घूमते हुए आपको ऊंचे पहाड़, हरियाली और घुमावदार रास्ते लगातार नजर आते हैं.
माधुरी को इस गांव की एक बात खास तौर पर दिलचस्प लगी. उन्होंने वीडियो में बताया कि गांव हो या शहर, जापान में ट्रैफिक रूल्स को लेकर कोई समझौता नहीं दिखता. छोटे रास्तों पर भी ट्रैफिक सिग्नल नजर आते हैं और लोग उन्हें फॉलो करते हैं. यानी जगह भले ही शहर से दूर हो, लेकिन व्यवस्था को लेकर लापरवाही दिखाई नहीं देती. इसके साथ ही गांव की सफाई ने भी उनका ध्यान खींचा. छोटी-छोटी गलियों से गुजरते हुए उन्होंने बताया कि कहीं भी बेवजह कचरा पड़ा हुआ नजर नहीं आता.
जापान के इस गांव को देखते हुए माधुरी बार-बार वहां की सफाई और शांत माहौल का जिक्र करती नजर आईं. उनका कहना था कि गांव की गलियां छोटी हैं, लेकिन यहां भी जरूरी सुविधाओं का इंतजाम देखने को मिलता है. उन्होंने यह भी बताया कि जापान के गांवों में पाइपलाइन के जरिए गैस सप्लाई जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं. गांव के अंदर स्टेशन और दूसरी जरूरी जगहें भी नजर आती हैं. इसका मतलब बाहर से देखने पर भले ही ओकुतामा किसी शांत पहाड़ी गांव जैसा लगे, लेकिन यहां की बेसिक सुविधाएं काफी व्यवस्थित दिखाई देती हैं.
गांव घूमने के बाद माधुरी ने अपने अनुभव के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय के लिए जापान आ रहा है तो उसे सिर्फ टोक्यो जैसे शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनके मुताबिक, जापान को समझना है तो उसके गांवों को भी देखना चाहिए. ओकुतामा की शांति और वहां का माहौल उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का यादगार अनुभव बताया. उनकी सबसे खास बात यही थी कि वह इस गांव की यात्रा को लंबे समय तक याद रखेंगी. उन्होंने कहा कि यह एक्सपीरियंस वह जिंदगी भर नहीं भूलेंगी.
जिस दिन माधुरी ओकुतामा पहुंचीं, उस दिन मौसम पूरी तरह उनका साथ नहीं दे रहा था. हल्की बारिश की वजह से घूमने में थोड़ी परेशानी भी हुई. लेकिन पहाड़ी इलाकों में बारिश का अपना अलग ही असर होता है. हरियाली और गहरी हो जाती है और आसपास का माहौल भी काफी शांत लगने लगता है. माधुरी ने भी माना कि मौसम थोड़ा मुश्किल था, लेकिन इसी मौसम में गांव घूमने का अनुभव अपने आप में अलग था.
ओकुतामा की यात्रा के दौरान माधुरी को कुछ ऐसे घर भी दिखाई दिए, जो लंबे समय से खाली पड़े थे. जापान में ऐसे खाली घरों को 'आकिया' कहा जाता है. जापान के कई ग्रामीण इलाकों में आबादी कम होने की समस्या लंबे समय से चर्चा में रही है. लोग बेहतर नौकरी और सुविधाओं की तलाश में बड़े शहरों की तरफ चले जाते हैं. पीछे गांवों में उनके पुराने घर खाली रह जाते हैं. माधुरी को ओकुतामा में भी ऐसे घर दिखाई दिए. बाहर से देखने पर ये घर सामान्य लगते हैं, लेकिन उनके अंदर कभी परिवार रहते थे. अब कई जगहों पर सिर्फ बंद दरवाजे और शांत गलियां बची हैं.
गांव घूमने के बाद माधुरी ओकुतामा लेक देखने पहुंचीं. पहली नजर में यह जगह बेहद खूबसूरत लगती है. पहाड़ों के बीच फैला पानी और आसपास की हरियाली इसे किसी पोस्टकार्ड जैसा बना देती है. लेकिन इस झील की कहानी सिर्फ खूबसूरती तक सीमित नहीं है. माधुरी ने बताया कि जहां आज झील दिखाई देती है, वहां कभी लोगों के घर और पूरी बस्ती हुआ करती थी.
माधुरी के मुताबिक, ओकुतामा लेक एक आर्टिफिशियल लेक है. इसे टोक्यो जैसे बड़े शहरों के लिए पानी की जरूरत पूरी करने के मकसद से बनाया गया था. झील बनने से पहले इस इलाके में लोग रहते थे. उनके घर थे, उनकी जमीन थी और उनकी अपनी जिंदगी थी. लेकिन जब प्रोजेक्ट के लिए इस इलाके को पानी में डुबोने की जरूरत पड़ी तो वहां रहने वाले लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया. आज उसी जगह पर पानी फैला हुआ है. बाहर से देखने पर यह जगह जितनी खूबसूरत लगती है, उसके पीछे की कहानी उतनी ही भावुक है.
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