SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

'वहां 6 महीने का इंतजार, यहां 2 घंटे में डॉक्टर हाजिर': भारतीय डॉक्टर की बात सुनकर यूरोप के डॉक्टर रह गए हैरान; Video Viral

भारत के हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर एक भारतीय डॉक्टर की यूरोप के कुछ डॉक्टरों से हुई बातचीत सोशल मीडिया पर चर्चा में है. डॉक्टर पालक भट्ट ने बताया कि जब उन्होंने यूरोपीय डॉक्टरों को बताया कि भारत में कई मरीज सीधे स्पेशलिस्ट तक पहुंच सकते हैं और जांच के बाद कुछ ही दिनों में इलाज शुरू हो सकता है, तो वे हैरान रह गए. इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 04, 2026, 09:40 AM IST | Updated: Oct 04, 2026, 09:51 AM IST
Image Credit: @dr.palakbhatt | भारतीय डॉक्टर ने यूरोप में बताया भारत का हेल्थकेयर सिस्टम
Join

भारतीय डॉक्टर पालक भट्ट, जो खुद को ऑन्कोलॉजिस्ट बताते हैं, इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने यूरोप के डॉक्टरों के साथ हुई बातचीत का अनुभव बताया. भट्ट के मुताबिक, उन्हें हाल ही में एक कार्यक्रम में पैलिएटिव केयर पर प्रेजेंटेशन देने का मौका मिला था.

इसी कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात कई यूरोपीय डॉक्टरों से हुई. बातचीत सिर्फ मेडिकल टॉपिक तक सीमित नहीं रही. डॉक्टरों के बीच अलग-अलग देशों के हेल्थकेयर सिस्टम को लेकर भी बात हुई. इसी दौरान भट्ट ने भारत में मरीजों को मिलने वाली मेडिकल एक्सेस के बारे में कुछ ऐसी बातें बताईं, जिन्हें सुनकर वहां मौजूद डॉक्टर काफी हैरान हुए.

'भारत में सीधे स्पेशलिस्ट तक पहुंच सकते हैं'

डॉक्टर भट्ट ने बातचीत समझाने के लिए एक मरीज का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि मान लीजिए किसी व्यक्ति की जीभ पर कोई ऐसा घाव है, जिसे देखकर उसे कैंसर की आशंका होती है. भारत में वह सीधे किसी ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क कर सकता है. उनके अनुसार, ऐसे मामले में जरूरत पड़ने पर उसी दिन MRI जैसी जांच कराई जा सकती है. अगर डॉक्टर को कैंसर का शक होता है तो बायोप्सी भी कराई जा सकती है. इसके बाद रिपोर्ट आने पर इलाज की दिशा तय की जाती है. भट्ट का कहना था कि रिपोर्ट आने में करीब 3 से 4 दिन लग सकते हैं और रिपोर्ट के आधार पर सर्जरी, कीमोथेरेपी या दूसरे इलाज की तैयारी भी जल्दी शुरू की जा सकती है.

 

 

यूरोप में GP की अपॉइंटमेंट का दिया उदाहरण

यूरोप में मेडिकल सिस्टम को लेकर उन्होंने एक दूसरी बात बताई. भट्ट के मुताबिक, वहां कई जगह किसी मरीज को पहले GP यानी जनरल प्रैक्टिशनर से अपॉइंटमेंट लेनी पड़ती है. उन्होंने कहा कि कई बार सिर्फ GP की अपॉइंटमेंट मिलने में ही 4 से 5 दिन लग जाते हैं. यही फर्क बातचीत में यूरोपीय डॉक्टरों के लिए हैरानी की वजह बना. भट्ट के अनुसार, उन्होंने महसूस किया कि भारत में मरीज कई मामलों में मेडिकल सिस्टम के अलग-अलग पड़ावों को ज्यादा तेजी से पार कर सकता है. हालांकि, यहां यह समझना भी जरूरी है कि यूरोप एक जैसा हेल्थकेयर सिस्टम वाला एक देश नहीं है. अलग-अलग देशों में नियम, अस्पतालों की व्यवस्था, इंश्योरेंस और स्पेशलिस्ट तक पहुंच के तरीके अलग हो सकते हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

डॉक्टर भट्ट का वीडियो सामने आने के बाद यह चर्चा सोशल मीडिया तक पहुंच गई. वीडियो को अब तक 3.4 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके थे और बड़ी संख्या में लोगों ने कमेंट कर अपने अनुभव भी शेयर किए. कुछ लोगों ने भारत में इलाज जल्दी मिलने की बात कही, तो कुछ ने विदेश में मेडिकल अपॉइंटमेंट के लंबे इंतजार का अपना अनुभव बताया. यही वजह है कि वीडियो सिर्फ भारत बनाम यूरोप की बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों ने अपने-अपने हेल्थकेयर अनुभव सामने रखने शुरू कर दिए.

नीदरलैंड्स से इलाज कराने भारत आया मरीज

एक यूजर ने कमेंट में दावा किया कि वह नीदरलैंड्स से आए एक मरीज के संपर्क में था, जिसे पाइल्स की समस्या थी. यूजर के मुताबिक, वहां सर्जरी के लिए करीब 6 महीने तक इंतजार करने की बात कही गई थी. उसने बताया कि मरीज इलाज के लिए भारत आया और कुछ ही समय बाद उसकी समस्या का इलाज हो गया. कमेंट में यूजर ने इस अनुभव को भारत में इलाज की तेजी से जोड़कर देखा. यह किसी एक व्यक्ति का अनुभव है, इसलिए इसे पूरे नीदरलैंड्स या यूरोप की मेडिकल व्यवस्था की तस्वीर नहीं माना जा सकता. लेकिन सोशल मीडिया पर ऐसे व्यक्तिगत अनुभवों ने बहस को जरूर तेज कर दिया.

पेरिस में रहने वाली महिला ने भी शेयर किया अनुभव

एक अन्य यूजर ने बताया कि वह पेरिस में रहती है और रूमेटॉइड आर्थराइटिस से जूझ रही है. उसके मुताबिक, कूल्हे में तेज दर्द के बाद जांच में उसकी बाईं हिप जॉइंट की गंभीर समस्या सामने आई. उसने दावा किया कि सर्जरी की अपॉइंटमेंट उसे करीब 40 दिन बाद मिली. उसने यह भी बताया कि उस समय वह कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थी. सोशल मीडिया पर आए ऐसे कमेंट यह बताते हैं कि हेल्थकेयर सिस्टम का अनुभव हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है. किसी को भारत में जल्दी इलाज मिल सकता है, तो किसी दूसरे मरीज को यहां भी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.

क्या भारत का सिस्टम हर मामले में तेज है?

डॉक्टर भट्ट की बात ने भारत की हेल्थकेयर व्यवस्था की एक अहम खासियत पर ध्यान खींचा है. भारत में कई शहरों में मरीजों के लिए प्राइवेट अस्पताल और स्पेशलिस्ट डॉक्टर तक सीधे पहुंच बनाना संभव है. कई जगह जांच भी तेजी से हो जाती है. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है. भारत में इलाज की सुविधा हर व्यक्ति को एक जैसी नहीं मिल पाती है. बड़े शहरों और छोटे कस्बों के बीच मेडिकल सुविधाओं का बड़ा अंतर है. प्राइवेट अस्पतालों में जांच और इलाज जल्दी मिल सकता है, लेकिन उसका खर्च हर परिवार के बजट में हो, यह जरूरी नहीं. इसका मतलब सिर्फ इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ, इससे किसी देश की पूरी हेल्थकेयर व्यवस्था को आंकना सही नहीं होगा. इलाज की कीमत, डॉक्टरों की उपलब्धता, सरकारी अस्पतालों की क्षमता और मरीज की आर्थिक स्थिति भी उतनी ही अहम हैं.

डॉक्टर की बात ने छेड़ी बड़ी बहस

डॉक्टर भट्ट के वीडियो की सबसे बड़ी वजह यही है कि इसने लोगों को अपने हेल्थकेयर अनुभवों पर बात करने का मौका दे दिया. विदेश में रहने वाले कई भारतीयों ने बताया कि कुछ मेडिकल अपॉइंटमेंट के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ा, जबकि भारत में वे कई बार जल्दी डॉक्टर तक पहुंच पाए. वहीं, कुछ लोगों ने यह भी याद दिलाया कि भारत में हर मरीज को एक जैसा अनुभव नहीं मिलता. बड़े शहरों में उपलब्ध सुविधाएं गांवों या छोटे शहरों से काफी अलग हो सकती हैं.

इलाज की रफ्तार के साथ पहुंच भी जरूरी

इस पूरी चर्चा से एक बात साफ है कि हेल्थकेयर की असली ताकत सिर्फ यह नहीं कि मरीज को डॉक्टर कितनी जल्दी मिला. जरूरी यह भी है कि सही इलाज समय पर मिले, उसकी कीमत मरीज की पहुंच में हो और जरूरत पड़ने पर अच्छी मेडिकल सुविधा उपलब्ध हो. डॉक्टर पालक भट्ट की यूरोप के डॉक्टरों से हुई बातचीत ने भारत के हेल्थकेयर सिस्टम की उस तस्वीर को सामने रखा है, जिसमें कुछ मामलों में मरीज तेजी से स्पेशलिस्ट और जांच तक पहुंच सकता है. सोशल मीडिया पर लोगों के अलग-अलग अनुभवों ने इस तस्वीर को और बड़ा बना दिया है. अब बहस सिर्फ भारत या यूरोप में कौन बेहतर है, इस पर नहीं, बल्कि इस बात पर हो रही है कि मरीज के लिए सबसे जरूरी चीज आखिर क्या है? सही इलाज, सही समय और उसकी पहुंच के अंदर खर्च.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES