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यूरोप छोड़ पहाड़ों में बसाया आशियाना: हिमालय के गांव पर आया जर्मन महिला का दिल, दो महीने में लौट आई वापस; बोली- 'ये नजारे अनमोल हैं'

जर्मनी की डिजिटल कंटेंट क्रिएटर जोहाना डेहनिंग को हिमालय के गांवों की जिंदगी इतनी पसंद आई कि यूरोप लौटने के महज दो महीने बाद ही वह फिर भारत आ गईं. उत्तराखंड की उर्गम घाटी में रहकर वह पहाड़ों की खूबसूरती को कैमरे में कैद कर रही हैं और सफाई अभियान में भी जुटी हैं. जोहाना का कहना है कि इस जिंदगी ने उन्हें कॉर्पोरेट नौकरी और सुकून के बीच का फर्क समझा दिया है.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 20, 2026, 10:14 AM IST | Updated: Oct 20, 2026, 10:33 AM IST
Image Credit: @itsjohannadehning | कॉर्पोरेट लाइफ से परेशान जोहाना अब हिमालय में कर रही हैं सफाई!
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जिंदगी में कभी-कभी कोई जगह ऐसी मिल जाती है, जहां से लौटने के बाद भी मन वहीं अटका रहता है. जर्मनी की कंटेंट क्रिएटर जोहाना डेहनिंग के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. हिमालय के गांवों में बिताए दिनों की याद उन्हें इतनी खींच लाई कि यूरोप लौटने के करीब दो महीने बाद ही उन्होंने फिर भारत का रुख कर लिया.

जोहाना सोशल मीडिया पर पहाड़ों की तस्वीरें और वीडियो शेयर करती रहती हैं. उनके वीडियो में सिर्फ ऊंचे पहाड़ और खूबसूरत नजारे ही नहीं, बल्कि वहां की रोजमर्रा की जिंदगी भी दिखाई देती है. स्थानीय लोगों से मिलना, उनके साथ वक्त बिताना और गांवों के आसपास घूमना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है.

मॉनसून के बाद पहाड़ों का रंग देखना चाहती थीं

भारत लौटने के बाद जोहाना ने कई वीडियो शेयर किए. एक वीडियो में उन्होंने बताया कि मॉनसून खत्म होने के बाद पहाड़ों का नजारा सुनहरा हो गया है. उनके अनुसार, यह ऐसा दृश्य है, जिसे वह लंबे समय तक याद रखना चाहती हैं. जोहाना जानती हैं कि सर्दियां शुरू होने के बाद पहाड़ों का रंग और मौसम, दोनों बदल जाएंगे. इसलिए वह इस समय को पूरी तरह जी लेना चाहती हैं. उनके वीडियो देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हिमालय उनके लिए अब सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह बन चुका है, जहां वह बार-बार लौटना चाहती हैं.

 

 

यूरोप में रहकर परेशान हो गई थीं, फिर आया सफाई का ख्याल

जोहाना के भारत लौटने की वजह सिर्फ पहाड़ों की खूबसूरती नहीं है. उन्होंने एक दूसरे वीडियो में बताया कि पिछले दो महीने यूरोप में रहने के दौरान वह पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के बारे में सोचकर परेशान हो रही थीं. उन्हें लग रहा था कि दुनिया में कचरे और प्रदूषण जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं. वह सोचती थीं कि आखिर अपने स्तर पर क्या किया जा सकता है. इसी दौरान उनके मन में हिमालय के इलाकों में सफाई करने का विचार आया और वह वापस लौट आईं. जोहाना मानती हैं कि उनकी अकेले की कोशिश से दुनिया की सभी समस्याएं खत्म नहीं हो सकतीं. लेकिन अगर इससे पहाड़ों की मिट्टी और पानी के स्रोतों तक पहुंचने वाले प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिलती है, तो यह भी जरूरी काम है.

 

 

उर्गम घाटी में रहकर जी रही हैं गांव की जिंदगी

फिलहाल जोहाना उत्तराखंड के चमोली जिले की उर्गम घाटी में एक होमस्टे में रह रही हैं. यहां उनका समय शहरों की तेज रफ्तार जिंदगी से काफी अलग गुजर रहा है. वह स्थानीय लोगों से मिलती हैं, उनसे बातचीत करती हैं और उनकी जिंदगी से जुड़ी कहानियां तस्वीरों और वीडियो के जरिए लोगों तक पहुंचाती हैं. उनकी फोटोग्राफी में पहाड़ों के नजारे, गांव का माहौल और वहां के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी देखने को मिलती है. जोहाना सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने के साथ कुछ ब्रांड्स के लिए पेड पार्टनरशिप भी करती हैं. यानी पहाड़ों में रहते हुए वह अपना काम भी जारी रखे हुए हैं. उनके वीडियो देखकर कई लोग उर्गम घाटी की खूबसूरती और वहां की जिंदगी के बारे में जानना चाहते हैं.

 

 

'कॉर्पोरेट लाइफ मुझे हमेशा स्कैम जैसी लगी'

जोहाना ने अपने एक वीडियो में कॉर्पोरेट लाइफ को लेकर भी खुलकर बात की. उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय से ऐसा लगता रहा है कि नौकरी के दौरान दिन का सबसे कीमती हिस्सा स्क्रीन के सामने बैठकर और कई बार गैरजरूरी मीटिंग्स में निकल जाता है. उन्होंने माना कि आज की व्यवस्था में पैसे कमाना जरूरी है. रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए आमदनी चाहिए, इसलिए नौकरी करने की मजबूरी को भी वह समझती हैं. लेकिन उनके अनुसार, अगर पैसे कमाने की कीमत सेहत और मानसिक शांति बन जाए, तो इस बारे में दोबारा सोचना चाहिए. जोहाना का कहना है कि हिमालय में रहने से उन्हें अपनी जिंदगी और काम को लेकर गहराई से सोचने का मौका मिला है. उन्होंने साफ कहा कि इस तरह की जिंदगी जीने के बाद अब उनका मन कॉर्पोरेट नौकरी में लौटने का नहीं है.

 

 

सोशल मीडिया पर लोगों को पसंद आई उनकी सोच

जोहाना की कहानी और उनके वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. कई यूजर्स ने उनकी पहल की तारीफ की, तो कुछ ने पहाड़ों में कचरा फैलने की समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया. एक यूजर ने लिखा कि उनकी छोटी सी कोशिश भी बड़ा असर डाल सकती है, हालांकि भारत में कचरा फैलाने की समस्या से निपटना आसान नहीं है. एक दूसरे यूजर ने सर्दियों में पहाड़ों की खूबसूरती का जिक्र किया और कहा कि बर्फबारी के बाद साफ आसमान का नजारा भी देखने लायक होता है. एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में उन्हें पहाड़ी खीरा खाने के तरीके सीखने की सलाह दी. वहीं, एक शख्स ने लिखा कि उर्गम घाटी पहले से ही खूबसूरत है, लेकिन जोहाना के वीडियो इसे और खास बना देते हैं. उसने बताया कि अब उसका भाई भी वहां जाने की इच्छा रखता है.

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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