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यूरोप के पास पैसा है, पर जीने की कला भारत के पास: फ्रेंच योग ट्रेनर ने गिनाईं वो 11 बातें, जो पश्चिम को सीखनी चाहिए

भारत घूमकर फ्रांस लौटीं योगा ट्रेनर रोक्सान ने अपना अनुभव बताते हुए एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि भारत की रोजमर्रा की जिंदगी की 11 ऐसी बातें हैं, जिनसे यूरोप के लोग भी कुछ सीख सकते हैं. परिवार और पड़ोसियों का साथ, खाने को लेकर अपनापन, चाय, रंगीन कपड़े, बाहर बैठकर बातें करना और बिना किसी खास वजह मुस्कुराना, रोक्सान के मुताबिक ये छोटी चीजें भारत में जिंदगी को खास बना देती हैं.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 02, 2026, 07:55 AM IST | Updated: Oct 02, 2026, 08:11 AM IST
Image Credit: @yog.rox | फ्रेंच योगा ट्रेनर रोक्सान का वायरल वीडियो
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भारत घूमने आने वाले कई लोगों का यहां आने के बाद अपने देश को देखने का नजरिया बिल्कुल बदल जाता है. कई बार भारत उनके लिए सिर्फ घूमने की जगह नहीं रह जाती, वो लोग यहां से बहुत कुछ सीखकर जाते हैं. फ्रांस और कनाडा में योगा सिखाने वाली रोक्सान की यही दिलचस्पी उन्हें भारत तक लेकर आई. उन्होंने यहां योगा की ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन पूरा किया. इसी दौरान उन्हें योगा को देखने का एक ऐसा तरीका मिला, जो उनके अनुसार पश्चिमी देशों में सीखी गई चीजों से काफी अलग था.

भारत से वापस यूरोप लौटने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यहां बिताए समय ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में कई छोटी-छोटी चीजें बदल दी हैं. इसी एहसास को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में शेयर किया और बताया कि यूरोप के लोग भारत की जिंदगी से क्या सीख सकते हैं.

'यहां हर कोई अकेला नहीं है'

रोक्सान की लिस्ट में सबसे पहली बात लोगों का एक-दूसरे के साथ रहना है. उन्होंने कहा कि यूरोप में लोग काफी हद तक अपनी जिंदगी खुद संभालने के आदी हैं. अपनी जरूरत के काम खुद करना और दूसरों पर निर्भर न रहना वहां सामान्य बात है. लेकिन भारत में उन्हें कई बार बिल्कुल अलग माहौल महसूस हुआ. परिवार, पड़ोसी, दोस्त और यहां तक कि ऐसे लोग भी, जिन्हें वे ठीक से जानती तक नहीं थीं, जरूरत पड़ने पर आसपास मौजूद दिखे. उनके अनुसार भारत में लोगों के बीच कम्युनिटी और साथ होने का एहसास ज्यादा आसानी से महसूस होता है.

आध्यात्मिकता जिंदगी का हिस्सा

भारत की दूसरी चीज जिसने रोक्सान को प्रभावित किया, वह आध्यात्मिकता है. उन्होंने खास तौर पर इस भक्ति का जिक्र किया. उनके मुताबिक भारत में आध्यात्मिक होना कोई अजीब बात नहीं लगती. पूजा, भक्ति या अपने तरीके से भगवान को याद करना यहां रोजमर्रा की जिंदगी में ही दिखाई दे सकता है. रोक्सान को यह बात पसंद आई कि आध्यात्मिकता को लेकर लोगों को हमेशा दूसरों के सामने खुद को समझाने की जरूरत नहीं पड़ती.

 

 

बाहर बैठकर जिंदगी देखना

रोक्सान ने भारत की गलियों और मोहल्लों में दिखाई देने वाली एक बेहद सामान्य तस्वीर भी नोटिस की. उनके मुताबिक यहां लोग बाहर बैठते हैं, पड़ोसी आपस में बातें करते हैं और हाथ में चाय लेकर काफी देर तक यूं ही बैठे रहते हैं. उन्होंने मजाकिया अंदाज में प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठे अंकल और चाय पीते हुए आसपास की जिंदगी देखते लोगों का जिक्र किया. उनके लिए यह सिर्फ खाली बैठना नहीं था. यह जिंदगी के साथ कुछ समय बिताने जैसा था.

'कैसे हो?' से पहले पूछा जाता है- खाना खाया?

रोक्सान को भारत का खाना और खाने को लेकर लोगों का रवैया भी काफी पसंद आया. उन्होंने कहा कि यहां किसी से हालचाल पूछने के साथ ही कई बार सवाल आता है कि खाना खाया या अभी नहीं? उनके अनुसार, खाने को लेकर यह अपनापन उन्हें बहुत अच्छा लगा. उन्होंने मजाक में कहा कि खाने की शौकीन होने के नाते उन्हें भारत में खुद को काफी समझा हुआ महसूस हुआ. और बात सिर्फ खाने की नहीं थी. चावल, दाल, दही, पनीर, डोसा, सब्जियां और नारियल जैसे सामान से बनने वाले अलग-अलग स्वाद और कॉम्बिनेशन ने भी उन्हें खूब आकर्षित किया. रोक्सान ने तो यहां तक कहा कि भारत में उनका डाइजेशन उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा रहा.

हर वक्त कुछ हासिल करना जरूरी नहीं

रोक्सान की एक बात खास तौर पर ध्यान खींचती है. उन्होंने कहा कि यूरोप में लोग हर समय कुछ न कुछ प्रोडक्टिव करने की कोशिश करते रहते हैं. भारत में उन्हें बैठकर बातें करने, साथ समय बिताने और कभी-कभी बिना किसी खास काम के भी कुछ देर यूं ही रहने की आदत दिखाई दी. उनके मुताबिक जिंदगी का हर पल किसी काम या रिजल्ट से जुड़ा होना जरूरी नहीं है. किसी के साथ बैठना, बातें करना या बस आसपास की जिंदगी को गुजरते हुए देखना भी अपने आप में एक अनुभव हो सकता है.

यूरोप में रंग कम क्यों हो गए?

रोक्सान ने यूरोप के कपड़ों और आसपास के रंगों को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि वहां का कलर पैलेट धीरे-धीरे काफी बेज और फीका होता जा रहा है. इसके मुकाबले भारत में उन्हें चमकीले कपड़े, साड़ियां, चूड़ियां, गहने और फूल नजर आए. उनके मुताबिक भारत के रंग सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा दिखाई देते हैं. उन्होंने यूरोप से भी जिंदगी में कुछ ज्यादा रंग शामिल करने की बात कही.

बिना वजह मुस्कुराने वाले लोग

रोक्सान को भारत के लोगों की मुस्कान भी याद रह गई. उन्होंने कहा कि यहां लोग कई बार बिना किसी खास वजह के भी आपको देखकर मुस्कुरा देते हैं. उन्हें इन मुस्कानों में बनावटीपन महसूस नहीं हुआ. एक अनजान व्यक्ति की छोटी सी मुस्कान भी किसी सफर के दौरान माहौल को बदल सकती है. रोक्सान के लिए यह भारत की उन छोटी चीजों में शामिल है, जिनकी कीमत लौटने के बाद ज्यादा महसूस हुई.

सीधे बोलने का अपना अंदाज

भारत की बातचीत का अंदाज भी रोक्सान को अलग लगा. उन्होंने कहा कि यहां लोग कई बार अपनी बात सीधे तरीके से कह देते हैं. उनके मुताबिक यूरोप में बातचीत के दौरान शिष्टाचार और छोटी-मोटी बातचीत की कई परतें होती हैं. भारत में उन्हें कई मौकों पर ज्यादा सीधी और खुली बातचीत देखने को मिली. उन्हें यह अंदाज काफी पसंद आया.

दिन में कई बार चाय

अब बारी आती है उस चीज की, जिससे भारत को अलग करना मुश्किल है. रोक्सान का मानना है कि वह चाय है. रोक्सान ने दिन में कई बार चाय पीने की आदत को भी अपनी लिस्ट में शामिल किया. भारत में चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि लोगों के मिलने-बैठने का बहाना भी बन जाती है. घर में मेहमान आएं, पड़ोसी मिल जाएं या दोस्तों के साथ बातचीत हो, चाय किसी न किसी तरह उस पल का हिस्सा बन जाती है.

टॉयलेट पेपर के साथ पानी भी

रोक्सान ने लास्ट में सोशल मीडिया पर लोगों को खूब हंसाया. उन्होंने यूरोप में टॉयलेट पेपर के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि अब वहां की आदतों में पानी को भी जगह मिलनी चाहिए. उन्होंने इस बात को मजाकिया अंदाज में रखा, लेकिन यह भी दिखाया कि भारत में बिताए समय के दौरान उन्होंने यहां की रोजमर्रा की कई ऐसी आदतों पर ध्यान दिया, जिनके बारे में यूरोप में शायद अलग तरीके से सोचा जाता है.

लोगों ने कहा- 'भारत को समझने की कोशिश की'

रोक्सान का वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो कई लोगों ने उनके अनुभवों की तारीफ की. एक यूजर ने कहा कि वह उनके लगभग हर पॉइंट से सहमत है, खासकर फैशन और रंगों वाली बात से. एक अन्य यूजर ने उनके 'बस जिंदगी को होते हुए देखना' वाले विचार को भारत का सटीक अनुभव बताया. भारत में रह चुके एक एक्सपैट ने लिखा कि बिना हर चीज को प्रोडक्टिव बनाने की कोशिश किए बैठना और बातें करना उनके लिए भी बड़ा बदलाव था. कई लोगों ने रोक्सान की इस बात की सराहना की कि उन्होंने भारत को सिर्फ अच्छी या बुरी चीजों के एक पैकेज की तरह नहीं देखा. उन्होंने खुद भी साफ कहा कि भारत परफेक्ट नहीं है और न ही उनका कहना है कि कोई एक कल्चर दूसरे से बेहतर है.

भारत लौटकर मिली जिंदगी की नई नजर

रोक्सान की कहानी का दिलचस्प हिस्सा यही है कि भारत में रहते हुए जिन चीजों को हम शायद रोज देखकर नजरअंदाज कर देते हैं, वही बातें किसी बाहर से आए इंसान को काफी खास लग सकती हैं. परिवार के साथ बैठना, पड़ोसी से बात करना, चाय के लिए रुक जाना, रंगीन कपड़े पहनना या कुछ देर बिना किसी काम के बाहर बैठना. यह सब बेहद सामान्य चीजें हैं. लेकिन शायद जिंदगी की खूबसूरती भी कई बार इन्हीं छोटी चीजों में छिपी होती है. रोक्सान भारत से अपने साथ सिर्फ योगा का अनुभव लेकर नहीं लौटीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को थोड़ा ठहरकर देखने का एक नया नजरिया भी लेकर गईं.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी फैसले से पहले संबंधित आधिकारिक विभाग से संपर्क जरूर करें.)

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संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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