'विदेशों में भारत की झूठी तस्वीर दिखाते हैं': केरल पहुंचते ही टूटे विदेशी महिला के सारे भ्रम; दिल जीत लेगी कहानी
11 साल पहले नीदरलैंड की इवाना ने सस्ती फ्लाइट के चक्कर में दिल्ली के बजाय केरल के कोच्चि पहुंचने का टिकट बुक कर लिया. भारत आने से पहले उनके मन में कई तरह के डर थे. यहां तक कि फ्लाइट में वह पूरी रात सो नहीं पाईं. लेकिन कोच्चि पहुंचने के कुछ ही देर बाद उनका अनुभव उन आशंकाओं से बिल्कुल अलग निकला, जिनके बारे में उन्होंने पहले सुना था.
किसी अनजान देश में पहली बार अकेले जाना हो, तो मन में कई तरह के सवाल उठना आम बात है. खासकर तब, जब आपने उस देश के बारे में जो भी पढ़ा या देखा हो, वह नेगेटिव हो. तब आपको अपने ठहरने से लेकर वहां के लोगों के व्यवहार तक को जानना होता है. इवाना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. फर्क बस इतना था कि भारत आने से पहले उनके मन में डर कुछ ज्यादा ही था.
नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम से भारत आने की तैयारी करते समय उनके सामने फ्लाइट का किराया भी एक बड़ा सवाल था. कुआलालंपुर से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट महंगी पड़ रही थी. ऐसे में उन्होंने कम किराये वाला ऑप्शन चुना और केरल के कोच्चि के लिए टिकट बुक कर लिया. उस समय इवाना ने शायद यह नहीं सोचा होगा कि पैसों की बचत के लिए लिया गया यही फैसला आगे चलकर उनकी जिंदगी की यादगार कहानी बन जाएगा. अब उन्होंने अपनी उसी पहली यात्रा को याद करते हुए भारत की अपनी कहानी दुनिया के साथ शेयर की है.
भारत आने से पहले पूरी रात नहीं सो पाईं
इवाना ने सोशल मीडिया पर अपनी पुरानी यात्रा को याद करते हुए बताया कि कुआलालंपुर से भारत के लिए अकेले रवाना होने के दौरान वह पूरी रात सो नहीं पाई थीं. जिस जगह वह जा रही थीं, उसके बारे में उन्होंने पहले बहुत ज्यादा कुछ नहीं जाना था. जैसे-जैसे प्लेन कोच्चि के करीब पहुंच रहा था, उनके मन में कई आशंकाएं थीं. उन्होंने बताया कि वह खुद को सबसे खराब हालात के लिए तैयार कर रही थीं. दूसरे शब्दों में कहें, तो भारत पहुंचने से पहले ही उनके दिमाग में कई तरह की चिंताएं चल रही थीं. लेकिन जमीन पर उतरने के बाद जो अनुभव मिला, उसने उनकी सोच को एक नया मोड़ दे दिया.
एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही बदली सोच
इवाना के अनुसार, भारत पहुंचने के एक घंटे के अंदर ही उनकी कई पुरानी धारणाएं टूटने लगी थीं. उन्होंने एयरपोर्ट को साफ-सुथरा और व्यवस्थित पाया. वहां से बाहर निकलने पर भी उन्हें ऐसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा, जैसा उन्होंने अपने मन में सोच रखा था. एयरपोर्ट के बाहर एटीएम की सुविधा थी और करीब 15 मिनट से भी कम समय में उन्हें सिम कार्ड भी मिल गया. सबसे ज्यादा असर इस बात ने डाला कि आसपास के लोग उनकी मदद करने के लिए तैयार थे. इवाना के लिए यह अनुभव इसलिए भी खास था, क्योंकि भारत आने से पहले उनके मन में लोगों और यहां की व्यवस्था को लेकर कई सवाल थे. लेकिन पहली मुलाकातों ने ही उनके डर को काफी हद तक कम कर दिया.
बिना प्लान के आईं, योग ट्रेनिंग में हो गया दाखिला
इवाना की कहानी का दिलचस्प हिस्सा सिर्फ इतना नहीं है कि भारत आने के बाद उनका डर कम हो गया. असली मोड़ तब आया, जब बिना किसी खास योजना के शुरू हुई उनकी यात्रा उन्हें केरल में एक महीने की योग शिक्षक ट्रेनिंग तक ले गई. उन्होंने अपनी एक दूसरी पोस्ट में बताया कि वह हमेशा उन घिसे-पिटे किस्सों से दूर रहना चाहती थीं, जिनमें कोई विदेशी पर्यटक भारत आकर अचानक किसी आश्रम में पहुंच जाता है. लेकिन आखिरकार उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ और वह केरल की खूबसूरती की दीवानी बन गईं. कोच्चि पहुंचने के बाद उन्होंने एक महीने के योग शिक्षक ट्रेनिंग कोर्स में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्हें सिर्फ एक नई चीज सीखने का मौका नहीं मिला, बल्कि भारत को करीब से जानने और यहां के लोगों के साथ वक्त बिताने का अनुभव भी मिला.
गेस्टहाउस में मिला परिवार जैसा अपनापन
इवाना ने अपनी पोस्ट में इमैनुएल गेस्टहाउस के मैनुअल और लीना का भी जिक्र किया. उनके अनुसार, इन दोनों ने उन्हें वहां बिल्कुल परिवार जैसा महसूस कराया. किसी अनजान देश में अकेले घूम रहे इंसान के लिए यह एहसास काफी मायने रखता है. नई जगह, नए लोग और अलग भाषा के बीच अगर कोई अपनेपन से पेश आए, तो सफर की मुश्किलें भी आसान लगने लगती हैं. इवाना को कोच्चि के लोगों का व्यवहार भी काफी पसंद आया. उन्होंने बताया कि वहां के मलयाली लोग किसी विदेशी को रास्ता भटकते या परेशानी में देखते, तो उसकी मदद करने के लिए अपना काम तक छोड़ देते थे. उनके लिए यही छोटी-छोटी बातें भारत की सबसे खूबसूरत यादों में शामिल हो गईं. इवाना का मानना है कि केरल ऐसी जगह है, जो धीरे-धीरे आपका दिल जीत लेती है.
पश्चिमी मीडिया की तस्वीर और असल जिंदगी में दिखा फर्क
इवाना ने भारत को लेकर पश्चिमी मीडिया में दिखाई जाने वाली खबरों पर भी अपनी राय रखी. उनका कहना है कि उन्होंने भारत के बारे में कई ऐसी खबरें देखी थीं, जिनसे उनके मन में डर बैठ गया था. लेकिन यहां पहुंचने के बाद उनका सामना एक अलग तस्वीर से हुआ. एयरपोर्ट की व्यवस्था से लेकर आम लोगों के व्यवहार तक, कई चीजें उनकी पहले से बनी सोच से अलग थीं. इवाना का कहना है कि अगर वह उन्हीं डरों पर भरोसा करके भारत आने का फैसला टाल देतीं, तो शायद उन्हें यह अनुभव कभी नहीं मिलता.उनके अनुसार, किसी देश को सिर्फ नकारात्मक खबरों के आधार पर समझना सही नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह भारत की समस्याओं से इनकार नहीं करतीं. उनका कहना है कि हर देश में कमियां होती हैं, लेकिन किसी पूरे देश को सिर्फ खराब बताकर पेश करना उसकी पूरी तस्वीर नहीं दिखाता.
सोशल मीडिया के जरिए भारत की दूसरी तस्वीर दिखाना चाहती हैं
इवाना ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि भारत और भारतीयों को दुनिया के सामने बेहतर तरीके से पेश किए जाने की जरूरत है. उन्होंने 'व्हाइट सुप्रीमेसी' यानी गोरे लोगों को दूसरों से श्रेष्ठ मानने वाली सोच का जिक्र करते हुए कहा कि सिर्फ व्यूज हासिल करने के लिए किसी देश को बार-बार गलत तरीके से दिखाना ठीक नहीं है. उनका कहना है कि वह किसी से भारत से प्यार करने के लिए नहीं कह रही हैं. वह बस चाहती हैं कि लोग अपनी राय बनाने से पहले अलग-अलग अनुभवों को भी देखें. इवाना के अनुसार, आज सोशल मीडिया की मदद से वह भारत के बारे में अपना नजरिया साझा कर सकती हैं. इससे लोगों को उन अनुभवों के बारे में भी पता चलता है, जो अक्सर नकारात्मक खबरों के बीच सामने नहीं आ पाते.
एक सस्ती टिकट, जिसने यादगार सफर शुरू कर दिया
इवाना की कहानी में सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस यात्रा को लेकर वह रातभर परेशान रहीं, वही आगे चलकर उनकी जिंदगी का खास अनुभव बन गई. दिल्ली की महंगी फ्लाइट छोड़कर कोच्चि का टिकट लेना उस समय सिर्फ पैसों की बचत का फैसला था. लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें नए लोग मिले, योग सीखने का मौका मिला और एक ऐसी जगह से जुड़ाव महसूस हुआ, जिसके बारे में उन्होंने पहले ज्यादा कुछ नहीं जाना था. उनका अनुभव यह भी दिखाता है कि किसी देश के बारे में पहले से बनी धारणा और वहां पहुंचकर मिलने वाला असली अनुभव हमेशा एक जैसा नहीं होता.