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'न मुझे राजनीति आती है, न मैं काबिल हूं': पोस्टर पर सच लिखकर लड़ा चुनाव; जनता ने 37 दिग्गजों को हरा बना दिया पार्षद

चुनाव लड़ने वाले नेता आमतौर पर खुद को सबसे काबिल साबित करने में जुटे रहते हैं, लेकिन कनाडा में एक शख्स ने अपने पोस्टर पर ही लिख दिया कि उसे राजनीति की समझ नहीं है और वह इस काम के लिए योग्य भी नहीं है. इसके बावजूद ब्रैडी रोजर्स ने शहर के काउंसिल चुनाव में जीत हासिल कर ली. उनके मजेदार पोस्टर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 24, 2026, 07:33 AM IST | Updated: Oct 24, 2026, 07:45 AM IST
Image Credit: X-@mario4thenorth | कनाडा के ब्रैडी रोजर्स का अतरंगी चुनावी दांव!
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कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के केलोना शहर में रहने वाले 33 साल के ब्रैडी रोजर्स इन दिनों अपने अनोखे चुनाव प्रचार को लेकर चर्चा में हैं. आमतौर पर उम्मीदवार चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करते हैं और अपनी खूबियां गिनाते हैं. लेकिन ब्रैडी ने प्रचार का ऐसा तरीका अपनाया, जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी.

उनके चुनावी पोस्टरों पर लिखा था, 'मुझे यह करना भी खास पसंद नहीं है', 'बस किराया भरने की कोशिश कर रहा हूं' और 'ठीक है, मैं ही कर लेता हूं'. एक पोस्टर पर सवाल था, 'यह कितना मुश्किल हो सकता है?' इन नारों को देखकर लोग मुस्कुराए बिना नहीं रह सके. कुछ ही समय में उनके पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे और ब्रैडी को इंटरव्यू के लिए मीडिया से भी फोन आने लगे.

खुद ही कह दिया- मुझे राजनीति नहीं आती

ब्रैडी की वेबसाइट पर भी उनके प्रचार का यही अंदाज नजर आया. वहां उन्होंने मजाकिया लहजे में लिखा कि उन्हें राजनीति पसंद है या नहीं. इसका जवाब उन्होंने 'नहीं' में दिया था. इसके बाद अगला सवाल था कि क्या उन्हें पता है कि वह क्या कर रहे हैं? इसका भी जवाब 'नहीं' में ही था. फिर जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस काम के लिए योग्य हैं, तो उन्होंने इसका जवाब भी 'नहीं' में दिया. इस तरह के बयानों ने उन्हें दूसरे उम्मीदवारों से अलग पहचान दिलाई. हालांकि, उनके पोस्टर का अंदाज भले ही मजाकिया था, लेकिन चुनाव लड़ने के पीछे उनकी वजह गंभीर थी.

37 उम्मीदवारों के बीच मिली जीत

17 अक्टूबर को हुए स्थानीय चुनाव में ब्रैडी रोजर्स ने केलोना सिटी काउंसिल की सीट जीत ली. शुरुआती चुनावी नतीजों के अनुसार, उन्हें 12,635 वोट मिले और वह 37 उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे. शहर की काउंसिल में कुल आठ सीटों के लिए चुनाव हुआ था. अभी तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नतीजों को आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद उनकी सीट पक्की होनी थी. यानी जिस शख्स ने अपने पोस्टर पर खुद को इस काम के लिए अनक्वालिफाइड बताया, वह लोगों के वोट हासिल करके शहर की काउंसिल तक पहुंच गया.

 

 

सिर्फ मजाक करने के लिए नहीं लड़े चुनाव

ब्रैडी का कहना है कि उनके चुनाव प्रचार का तरीका भले ही हल्का-फुल्का था, लेकिन अपने शहर को लेकर वह गंभीर हैं. उन्हें केलोना की छोटी दुकानों और कारोबारों की चिंता है. इसके अलावा, बेघर लोगों की समस्या भी उनके लिए अहम है. उनके अनुसार, चुनाव लड़ने का एक मकसद यह समझना भी था कि शहर कैसे काम करता है और उसके फैसलों का फायदा आखिर किन लोगों तक पहुंचता है. वह चाहते हैं कि शहर के निवासियों की जरूरतों को फैसले लेते समय प्राथमिकता दी जाए. मतलब, पोस्टर पर लिखे मजेदार नारों के पीछे एक ऐसा व्यक्ति भी है, जो अपने आसपास की समस्याओं को समझना और उन पर काम करना चाहता है.

इंजीनियरिंग की नौकरी से राजनीति तक का सफर

राजनीति में आने से पहले ब्रैडी करीब चार साल तक रोबोटिक ऑटोमेशन इंजीनियर के तौर पर काम कर चुके हैं. इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर 'द रोजरी' नाम से एक बिजनेस शुरू किया. उनका यह कारोबार प्लास्टिक कचरे को दोबारा इस्तेमाल करके नए प्रोडक्ट बनाने से जुड़ा है. ब्रैडी का मानना है कि किसी समस्या का सही हल खोजने के लिए पहले उससे जुड़े सवालों को समझना जरूरी है. इंजीनियरिंग के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सही जवाब पाने की शुरुआत अच्छे सवाल पूछने से होती है. उनके अनुसार, राजनीति में भी यही तरीका काम आ सकता है. किसी व्यक्ति के पास हर सवाल का जवाब होना जरूरी नहीं, लेकिन उसे तब तक सवाल पूछते रहना चाहिए, जब तक समस्या ठीक से समझ में न आ जाए.

'सरकार लोगों के लिए है'

ब्रैडी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि सरकार लोगों के लिए होती है और उसे लोगों के हितों की रक्षा करनी चाहिए. कई बार लोगों को लगता है कि उनके आसपास की व्यवस्था उनके ऊपर थोपी जा रही है, जबकि इन व्यवस्थाओं को इंसानों ने ही बनाया है. उनका कहना है कि जब कोई व्यवस्था लोगों के काम नहीं आती, तो उस पर सवाल उठाना और उसे बदलने की कोशिश करना जरूरी है. ब्रैडी इसी सोच के साथ काउंसिल में एक नया नजरिया लेकर आने की बात करते हैं.

जीत के बाद भी काम को लेकर गंभीर

अपने समर्थकों के लिए जारी किए गए वीडियो में ब्रैडी ने साफ किया कि उनके प्रचार का अंदाज भले ही अलग था, लेकिन वह काउंसिल की जिम्मेदारी को गंभीरता से लेते हैं. वह शहर के कामकाज को समझना चाहते हैं और स्थानीय लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहते हैं. उनकी कहानी इसलिए चर्चा में है, क्योंकि चुनाव के दौरान जहां ज्यादातर उम्मीदवार अपनी काबिलियत का प्रचार करते हैं, वहीं ब्रैडी ने अपनी कमियों को ही पोस्टर का हिस्सा बना लिया. इसके बावजूद उन्हें हजारों लोगों के वोट मिले और वह जीत हासिल करने में कामयाब रहे.

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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