हवाई जहाज जैसी सीटें, चाय-नाश्ता भी: पहली बार वंदे भारत में सफर कर विदेशी महिला हुई फैन; इंग्लैंड की रेल को दिखाया आईना
भारत की ट्रेनों को लेकर विदेशों में अक्सर कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं. लेकिन जब एक विदेशी महिला ने पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर किया, तो उसका अनुभव उम्मीद से बिल्कुल अलग निकला. साफ कोच, चमकते टॉयलेट, चाय-बिस्कुट और स्नैक्स की सुविधा देखकर वह हैरान रह गई. फ्रैंकी एरोज नाम की इस कंटेंट क्रिएटर ने अपना अनुभव सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर शेयर किया.
भारत घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक यहां की संस्कृति, खानपान और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े अपने अनुभव अक्सर सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. कई बार उनकी छोटी-छोटी बातें भी लोगों का ध्यान खींच लेती हैं. इस बार चर्चा एक विदेशी महिला की ट्रेन यात्रा को लेकर हो रही है.
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर फ्रैंकी एरोज ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर करने का अपना अनुभव बताती नजर आईं. ट्रेन में मिलने वाली सुविधाओं को देखकर वह काफी प्रभावित दिखीं. उन्होंने भारतीय ट्रेनों को लेकर विदेशों में बनी धारणाओं पर भी सवाल उठाए.
साफ कोच और टॉयलेट देखकर हुईं हैरान
फ्रैंकी ने अपने वीडियो में ट्रेन के अंदर की सुविधाओं का जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि वंदे भारत एक्सप्रेस के कोच साफ-सुथरे थे और टॉयलेट की हालत भी अच्छी थी. सफर के दौरान चाय, पानी और बिस्कुट जैसी चीजें मिलने से भी वह खुश नजर आईं. उन्होंने स्नैक्स देने के लिए ट्रेन में मौजूद कार्ट का भी जिक्र किया. फ्रैंकी के लिए यह अनुभव खास इसलिए था, क्योंकि भारतीय ट्रेनों को लेकर उन्होंने विदेश में जो बातें सुनी थीं, उनका अनुभव उससे अलग था. उन्होंने कहा कि जब तक कोई खुद किसी जगह जाकर वहां की चीजों को नहीं देखता, तब तक उसके बारे में बनी राय पूरी तरह सही नहीं हो सकती.
'इंग्लिश ट्रेनों को देखकर शर्म आ जाए'
फ्रैंकी के अनुभव का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला हिस्सा इंग्लैंड की ट्रेनों से की गई तुलना है. उनका कहना था कि वंदे भारत में सफर करने के बाद उन्हें लगा कि भारतीय ट्रेनों को लेकर विदेश में कई गलत धारणाएं हैं. उनकी पोस्ट का मतलब यही था कि सुविधाओं और साफ-सफाई के मामले में वंदे भारत ने उन्हें प्रभावित किया. इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी बात को हाथोंहाथ लिया. कुछ यूजर्स ने इसे भारतीय रेलवे की तारीफ माना, तो कुछ ने अपने पुराने ट्रेन सफर के अनुभव भी शेयर किए.
'दूसरों की बात सुनने के बजाय खुद अनुभव करें'
फ्रैंकी ने वीडियो के कैप्शन में भी अपनी बात रखी. उन्होंने साफ-सुथरे कोच, टॉयलेट और सफर के दौरान मिलने वाली खाने-पीने की चीजों का जिक्र किया. फ्रैंकी लोगों को सलाह दी कि किसी देश या जगह के बारे में केवल मीडिया में दिखाई जाने वाली तस्वीरों और दूसरों की बातों के आधार पर राय नहीं बनानी चाहिए. अगर किसी चीज को सही मायने में समझना है, तो खुद वहां जाकर उसका अनुभव करना जरूरी है. उनकी इस बात को कई लोगों ने पसंद किया. यूजर्स का कहना था कि यात्रा करने से इंसान को अलग-अलग देशों और वहां के लोगों को समझने का मौका मिलता है. कई बार असल जिंदगी का अनुभव पहले से बनी सोच को बदल देता है.
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
फ्रैंकी का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने अपनी-अपनी ट्रेन यात्राओं के अनुभव शेयर किए. एक यूजर ने वाराणसी की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए लिखा कि यह उस स्लीपर ट्रेन से बिल्कुल अलग अनुभव लग रहा है, जिसमें उसने सफर किया था. हालांकि, उसने यह भी कहा कि वाराणसी वाली यात्रा की अपनी अलग यादें हैं. एक दूसरे यूजर ने टिकट के खर्च पर बात करते हुए कहा कि ट्रेन का अनुभव काफी हद तक यात्री के बजट पर भी निर्भर करता है. वहीं, एक अन्य यूजर ने भारतीय ट्रेनों के बारे में अच्छी बातें कहने के लिए फ्रैंकी का धन्यवाद किया. कुछ लोगों ने यह भी बताया कि भारत में अलग-अलग बजट के यात्रियों के लिए कई तरह की ट्रेनें हैं. यहां सामान्य डिब्बों से लेकर आधुनिक सुविधाओं वाली प्रीमियम ट्रेनों तक कई ऑप्शन मिलते हैं.
भारतीय रेलवे की तस्वीर पर फिर छिड़ी चर्चा
फ्रैंकी का वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर भारतीय रेलवे की सुविधाओं और विदेशी यात्रियों के अनुभव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. वंदे भारत एक्सप्रेस को मॉडर्न सुविधाओं वाली ट्रेन के तौर पर पेश किया गया है और यात्रियों के अनुभवों के वीडियो इसे लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ाते रहते हैं. हालांकि, भारत में हर ट्रेन का अनुभव एक जैसा नहीं होता. किसी यात्री को साफ-सुथरे कोच और अच्छी सुविधाएं मिल सकती हैं, तो किसी दूसरे को भीड़ या दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यही वजह है कि एक अनुभव को पूरे रेलवे की तस्वीर मानना ठीक नहीं होगा. फिर भी फ्रैंकी की प्रतिक्रिया बताती है कि जब कोई विदेशी यात्री भारत में अपनी उम्मीद से बेहतर अनुभव करता है, तो उसकी बात लोगों तक तेजी से पहुंचती है.