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वैज्ञानिकों ने एक कमाल का करिश्मा कर दिखाया है और 2000 साल पहले स्कॉटलैंड में रोमन बॉर्डर के पास रहने वाले एक शख्स के चेहरे को डिजिटल तरीके से दोबारा तैयार किया है. यह चेहरा आज से लगभग दो हजार साल पुराना है जिसे एक प्राचीन कंकाल की मदद से रीक्रिएट किया गया है. नेशनल म्यूजियम ऑफ स्कॉटलैंड में इस चेहरे को अगले महीने प्रदर्शनी के लिए रखा जाने वाला है.
साइंस और टेक्नोलॉजी आज इतनी आगे बढ़ चुकी है कि वह मरे हुए इंसानों को भी एक नए रूप में हमारे सामने ला सकती है. 'स्काई न्यूज' की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल वैज्ञानिकों की एक टीम ने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके आज से लगभग 2000 साल पुराने एक शख्स के चेहरे को डिजिटल रूप से फिर से बना दिया है. यह शख्स रोमन साम्राज्य के दौर में स्कॉटलैंड की सीमा पर रहा करता था.
वैज्ञानिकों ने यह कमाल उसकी हड्डियों और खोपड़ी के अवशेषों की मदद से किया है. इस शानदार चेहरे को उस शख्स की असली खोपड़ी के साथ अगले महीने एडिनबर्ग स्थित नेशनल म्यूजियम ऑफ स्कॉटलैंड में 'रोमन स्कॉटलैंड: लाइफ ऑन द एज ऑफ एंपायर' नाम की प्रदर्शनी में दिखाया जाएगा.
नेशनल म्यूजियम ऑफ स्कॉटलैंड के प्रीहिस्ट्री और रोमन आर्कियोलॉजी के प्रमुख क्यूरेटर डॉ. फ्रेजर हंटर ने मीडिया को बताया कि उन्होंने सालों तक रोमन इन्वरस्क की चीजों पर काम किया है लेकिन इस फेशियल रिकंस्ट्रक्शन ने उन्हें पहली बार यह एहसास कराया है कि वहां रहने वाला कोई आम इंसान असल में कैसा दिखता रहा होगा. उनका कहना है कि पुरातत्व हमें उन लोगों के बारे में बताता है जिनकी जिंदगी में भी हमारी तरह उम्मीदें और डर हुआ करते थे.
वैज्ञानिकों ने इस शख्स के चेहरे का पता लगाने के लिए एडवांस डीएनए टेस्ट, हड्डियों की जांच और फेशियल मॉडलिंग जैसी कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया. साइंटिफिक टेस्ट से यह बात सामने आई कि जब इस शख्स की मौत हुई तब उसकी उम्र करीब 50 साल के शुरुआती दौर में थी. उसकी मौत लगभग 140 से 165 ईस्वी के बीच इन्वरस्क नाम की जगह पर हुई थी जो आज के एडिनबर्ग के पास है.
सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि डीएनए रिपोर्ट से पता चला कि यह शख्स मूल रूप से स्कॉटलैंड का रहने वाला नहीं था. वह ब्रिटेन के दक्षिणी हिस्से में पला-बढ़ा था और वहां से सैकड़ों मील का लंबा और कठिन सफर तय करके नॉर्थ में फर्थ ऑफ फोर्थ के तट तक पहुंचा था.
एक्सपर्ट्स ने जब उसके कंकाल की जांच की तो उसकी फिजिकल लाइफ से जुड़ी कई अहम बातें पता चलीं. जांच में यह सामने आया कि वह कोई सैनिक नहीं था क्योंकि उसके शरीर पर पुरानी चोटें थीं जिनकी वजह से उसके लिए तलवार चलाना मुमकिन नहीं था. उसकी नाक की हड्डी टूटी हुई थी जो बाद में जुड़ गई थी और उसके दाहिने हाथ की कोहनी के पास एक हड्डी बढ़ गई थी जो सेप्टिक आर्थराइटिस की वजह से हुई थी. इस वजह से उसके उस हाथ की मूवमेंट बहुत ज्यादा सीमित थी.
यह शख्स इन्वरस्क में एक रोमन किले के पास कुछ अन्य पुरुषों के एक छोटे से ग्रुप के साथ दफनाया गया था. रिसर्चर्स का कहना है कि इन कब्रों में एक बहुत ही डार्क और अजीबोग्राइब राज छिपा हुआ है. वहां दफनाए गए छह वयस्क पुरुषों में से चार पुरुषों के सिर उनकी मौत के बाद काट दिए गए थे. आर्कियोलॉजिस्ट्स का यह मानना है कि ब्रिटेन में मिलने वाले ये अब तक के सबसे पुराने मामलों में से एक हैं और स्कॉटलैंड में तो यह इस तरह का पहला मामला है.
एक्सपर्ट्स अभी तक इस बात को लेकर पूरी तरह से साफ नहीं हैं कि ऐसा क्यों किया गया था. उनका मानना है कि यह किसी सजा का हिस्सा हो सकता है, कोई सांस्कृतिक रीति-रिवाज हो सकता है या फिर उन लोगों की मौत से जुड़ी कोई अंधविश्वास भरी प्रथा हो सकती है. नेशनल म्यूजियम ऑफ स्कॉटलैंड की ओस्टियोआर्कियोलॉजी की क्यूरेटर डॉ. जेस थॉम्पसन ने मीडिया आउटलेट को बताया कि इन्वरस्क की ये कब्रें बेहद दुर्लभ हैं और रोमन स्कॉटलैंड से जुड़ी एक नायाब खोज हैं. उनका कहना है कि इस तरह की इंटरडिसिप्लिनरी स्टडी से हमें इन इंसानों की फिजिकल खूबियों और उनकी जिंदगी की कहानियों को समझने में बहुत मदद मिलती है.