'सुपरमार्केट भी इसके आगे फेल:' दिल्ली में गली के किराना स्टोर पर फिदा हुई अमेरिकी महिला; वायरल हुआ रिव्यू
अमेरिका में छोटी-मोटी खरीदारी के लिए भी कई बार लोगों को बाहर काफी दूर तक जाना पड़ता है, लेकिन दिल्ली में रहने वाली अमेरिकी महिला क्रिस्टन फिशर को अपने घर के पास मिली किराना दुकान ने खूब प्रभावित किया है. वह सुबह-सुबह दूध और दही लेने निकलीं और कुछ ही देर में सामान लेकर घर लौट आईं. उन्होंने भारतीय किराना मॉडल को फास्ट और सुविधाजनक बताया.
आपको कभी अपने घर या मोहल्ले के बाहर किराना दुकान को देखकर आश्चर्य नहीं हुआ होगा. क्योंकि यह भारत में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी ही आम बात है. लेकिन एक अमेरिकी महिला जब अपनी गली के बाहर किराना स्टोर से सामान लेने गई, तो उसने इसका वीडियो बनाकर खूब तारीफ की. उसने अपने वीडियो में बताया कि कैसे उसको घर से थोड़ी दूर पर अपनी जरूरत का सारा सामान मिल गया. इसके लिए उसको न कहीं दूर जाना पड़ा, न ही कोई लंबी तैयारी करनी पड़ी.
दरअसल, अमेरिका की रहने वाली क्रिस्टन फिशर इन दिनों दिल्ली के एक इलाके में रह रही हैं. एक सुबह उनको अपने घर में दूध-दही की जरूरत थी, तो क्रिस्टन फिशर बाहर के किराना स्टोर से जरूरत का सारा सामान लेकर आईं. वह घर से निकलीं और पैदल ही पास की किराना दुकान पर पहुंचीं. क्रिस्टन ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में इसी छोटी सी खरीदारी का अनुभव शेयर किया है. वीडियो में वह सड़क से गुजरते हुए दुकान की तरफ जाती दिखाई देती हैं. उन्होंने बताया कि दुकान उनके घर से एक मिनट से भी कम दूरी पर है. जरूरत का सामान लेना हो, तो वह अक्सर यहीं आ जाती हैं.
दुकानदार से हिंदी में मांगा दूध और दही
दुकान पर पहुंचकर क्रिस्टन ने दुकानदार से हिंदी में बात की. उन्होंने दो किलो फुल क्रीम दूध और आधा किलो दही मांगा. सामान मिला, पैसे दिए और फिर पैदल ही घर की तरफ लौट गईं. पूरे काम में न ज्यादा समय लगा और न किसी खास इंतजाम की जरूरत पड़ी. यही बात उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आई. उनके लिए यह सुविधा इसलिए भी खास थी, क्योंकि डेली नीड के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. क्रिस्टन ने वीडियो में कहा कि दुकान उनके घर से बस एक मिनट की दूरी पर है. वह यहां से कई तरह की चीजें खरीदती हैं. सामान लिया और कुछ ही देर में वापस घर पहुंच गईं. उन्होंने इस अनुभव को तेज और सुविधाजनक बताया.
'भारत में हर जगह छोटी दुकानें हैं'
क्रिस्टन ने वीडियो के साथ भारत की छोटी दुकानों की तारीफ करते हुए लिखा कि यहां उन्हें एक बात बेहद पसंद है. देश में जगह-जगह छोटी दुकानें मिल जाती हैं और जरूरत की चीजें अक्सर पैदल दूरी पर ही उपलब्ध होती हैं. उन्होंने किराना दुकानों को भारत की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बताया. उनका कहना था कि यहां दूध, दही या घर का कोई छोटा-मोटा सामान चाहिए, तो हर बार बड़े सुपरमार्केट जाने की जरूरत नहीं पड़ती. आसपास की दुकान से काम आसानी से हो जाता है. भारत में बहुत से लोगों के लिए यह रोज का अनुभव है. घर से निकलकर गली के नुक्कड़ पर पहुंचना, दुकानदार को सामान बताना और कुछ मिनट में वापस आ जाना. लेकिन दूसरे देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह सुविधा अलग अनुभव हो सकती है.
अमेरिका से तुलना करने लगे लोग
क्रिस्टन की पोस्ट पर लोगों ने अपनी-अपनी राय भी शेयर की. कई भारतीय यूजर्स ने कहा कि अपने देश में आसपास दुकानें होने की सुविधा को लोग अक्सर मामूली समझ लेते हैं, जबकि विदेश में यही काम मुश्किल हो सकता है. एक यूजर ने लिखा कि भारतीय कई बार अपने आसपास आसानी से मिलने वाली चीजों की अहमियत नहीं समझते. उसके अनुसार, अमेरिका में बिना कार के रोजमर्रा की खरीदारी करना कई जगह आसान नहीं होता और छोटी जरूरतों के लिए भी गाड़ी की जरूरत पड़ सकती है. एक दूसरे यूजर ने लिखा कि भारत आने पर उन्हें भी यही सुविधा अच्छी लगती है. उन्होंने कहा कि छोटी सी किराना दुकान में भी जरूरत का काफी सामान मिल जाता है.
छोटी दुकानों से जुड़ा है रोज का भरोसा
किराना दुकानें केवल सामान खरीदने की जगह नहीं होतीं. कई मोहल्लों में दुकानदार अपने ग्राहकों को पहचानते हैं और लोगों को भी पता होता है कि घर के पास जरूरत की चीजें कहां मिलेंगी. कभी दूध खत्म हो गया, कभी चाय बनाने के लिए चीनी चाहिए या अचानक कोई घरेलू सामान लेना हो, तो आसपास की दुकान काम आ जाती है. हर छोटी जरूरत के लिए बड़े स्टोर तक जाना जरूरी नहीं होता. कई दुकानों पर लोग रोजाना या उधार का हिसाब भी रखते हैं. यह व्यवस्था हर जगह एक जैसी नहीं है, लेकिन बहुत से मोहल्लों में दुकानदार और ग्राहकों के बीच ऐसा रिश्ता आज भी दिख जाता है. क्रिस्टन के वीडियो में भी यही रोजमर्रा वाली सहूलियत नजर आई. उन्होंने किसी बड़े स्टोर या चमकदार शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की तारीफ नहीं की, बल्कि उस छोटी सी दुकान को पसंद किया, जहां से वह कुछ मिनटों में अपना सामान लेकर लौट सकती हैं.
ऑनलाइन खरीदारी के दौर में भी किराना दुकान का अलग महत्व
आज ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक कॉमर्स की सुविधा तेजी से बढ़ रही है. मोबाइल पर सामान चुनकर घर तक मंगाना भी आसान हो गया है. इसके बावजूद आसपास की किराना दुकानों की अपनी जगह है. कई बार जरूरत की चीज तुरंत चाहिए होती है और दुकान तक पैदल पहुंचना ही सबसे आसान ऑप्शन होता है. क्रिस्टन की पोस्ट पर एक यूजर ने इस बात की भी तारीफ की कि वह बड़े सुपरमार्केट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बजाय स्थानीय दुकानदार से सामान खरीद रही हैं. छोटे दुकानदारों के लिए आसपास के ग्राहकों का हर रोज आना उनके कारोबार में मददगार हो सकता है. हालांकि, हर इलाके में दुकानों की दूरी और उपलब्ध सामान अलग-अलग हो सकते हैं. फिर भी जहां किराना दुकानें पास में हैं, वहां लोगों को रोजमर्रा की खरीदारी में काफी सहूलियत मिलती है.
लोगों को याद दिलाई अपने मोहल्ले की खासियत
क्रिस्टन फिशर का वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने केवल उनकी हिंदी की तारीफ नहीं की, बल्कि उस सुविधा पर भी बात की, जिसे वे रोज देखते हैं. एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि क्रिस्टन ने हिंदी बोलकर सबका दिल जीत लिया. इस छोटी सी खरीदारी ने एक आम बात को फिर सामने ला दिया. किसी शहर की सुविधा हमेशा बड़ी इमारतों, मॉल या चमकदार बाजारों से नहीं तय होती. कई बार घर से कुछ कदम दूर मिलने वाला दूध, दही और जरूरत का सामान भी जिंदगी को आसान बना देता है. क्रिस्टन के लिए दिल्ली की किराना दुकान का अनुभव इसी वजह से खास रहा. वह सामान लेने निकलीं, कुछ ही देर में घर लौट आईं और इस बीच उन्हें भारत की रोजमर्रा की जिंदगी की एक ऐसी बात पसंद आ गई, जिसे यहां के लोग अक्सर सामान्य मानकर आगे बढ़ जाते हैं.
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