नवरात्रि में गरबा सिर्फ डांस नहीं, बल्कि गुजरात की संस्कृति और उत्सव का बड़ा हिस्सा है. रात होते ही अहमदाबाद के गरबा पंडालों में लोगों की भीड़ जुटने लगती है. कहीं ढोल की आवाज गूंजती है, तो कहीं रंग-बिरंगी ड्रेस में लोग गोल घेरा बनाकर गरबा खेलते नजर आते हैं.
इसी भीड़ में कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जो देखने में बाकी लोगों जैसी ही लगती हैं. वे पारंपरिक कपड़े पहनती हैं और आम लोगों के बीच घूमती हैं. लेकिन उनका ध्यान डांडिया के साथ-साथ आसपास मौजूद लोगों की एक्टिविटी पर भी रहता है. ये अहमदाबाद पुलिस की 'शी टीम' की महिला पुलिसकर्मी हैं, जिन्हें महिलाओं की सुरक्षा के लिए सादे कपड़ों में तैनात किया गया है.
पश्चिमी अहमदाबाद के सरखेज इलाके में एक बड़े एसी गरबा डोम के अंदर इस टीम की सक्रियता देखने को मिली. इसका वीडियो भी अहमदाबाद पुलिस ने अपने X अकाउंट से शेयर किया है. इसमें ट्रेडिशनल कपड़ों में मौजूद महिला पुलिसकर्मियों को एक युवक महिलाओं का वीडियो रिकॉर्ड करता मिला. टीम ने तुरंत उससे पूछताछ की और उसका फोन चेक किया. जांच में पता चला कि वह अपने ही ग्रुप की महिलाओं के वीडियो बना रहा था. इसके बाद उसे सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया गया. इस घटना का जिक्र सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि गरबा पंडालों में सुरक्षा के लिए पुलिस किस तरह नए तरीके अपना रही है. हालांकि, किसी का वीडियो बनाना हर स्थिति में अपने आप अपराध नहीं माना जा सकता. मामला इस बात पर निर्भर करता है कि वीडियो किस तरह बनाया गया, उसका इस्तेमाल कैसे हुआ और क्या उसमें किसी की प्राइवेसी या कानून का उल्लंघन हुआ.
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— Ahmedabad Police અમદાવાદ પોલીસ (@AhmedabadPolice) October 12, 2026
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो अहमदाबाद के पश्चिमी इलाकों में बड़े क्लबों और पार्टी प्लॉटों के आसपास ऐसी करीब आठ टीमें तैनात रहती हैं. इनकी ड्यूटी रात करीब आठ बजे से शुरू होकर गरबा खत्म होने तक चलती है. इनका काम केवल भीड़ में घूमना नहीं है. महिला पुलिसकर्मी लोगों की हर एक्टिविटी पर नजर रखती हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत आगे आ जाती हैं. सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों और दूसरे इंतजामों पर भी ध्यान दिया जाता है. सादे कपड़ों में तैनाती का फायदा यह है कि पुलिसकर्मी भीड़ के बीच रहकर उन हरकतों को भी देख सकती हैं, जो सामने वर्दी में पुलिस मौजूद होने पर शायद छिपा ली जाती हैं.
'शी टीम' महिला सुरक्षा के लिए बनाई गई पुलिस टीमों को कहा जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को पब्लिक प्लेस पर सेफ और सिक्योर माहौल देना और छेड़छाड़ या परेशान करने जैसी शिकायतों पर कार्रवाई करना है. ऐसी टीमें कई जगहों पर सादे कपड़ों में काम करती हैं, जिससे वे आम लोगों के बीच रहकर संदिग्ध एक्टिविटी पर नजर रख सकें. गरबा जैसे बड़े आयोजनों में इसकी जरूरत और बढ़ जाती है. यहां देर रात तक हजारों लोग एक साथ मौजूद रहते हैं. भीड़ के बीच किसी महिला को परेशान करना, उसका पीछा करना या बिना इजाजत वीडियो बनाना उसके लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है. ऐसे में महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से शिकायत मिलने पर तुरंत मदद पहुंचाने और गलत हरकत करने वालों को रोकने में मदद मिल सकती है. इसका मकसद लोगों को डराना नहीं, बल्कि यह भरोसा देना है कि किसी के साथ गलत होने पर पुलिस मदद के लिए मौजूद है.
वर्दी में पुलिसकर्मी को देखकर लोग अक्सर सावधान हो जाते हैं. लेकिन सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मी भीड़ के बीच सामान्य व्यक्ति की तरह रह सकती हैं. इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि लोग वास्तव में कैसा व्यवहार कर रहे हैं. हालांकि, अंडरकवर ड्यूटी का मतलब यह नहीं है कि हर महिला पुलिसकर्मी की पहचान पूरी तरह छिपी ही रहेगी. टीम के दूसरे सदस्यों, सुरक्षा व्यवस्था और आसपास के लोगों की मौजूदगी से किसी को शक हो सकता है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी कुछ लोगों ने इसी बात पर सवाल उठाया कि महिला पुलिसकर्मियों की पहचान आसानी से समझ में आ रही है. फिर भी, इस तरीके का मकसद केवल छिपकर किसी को पकड़ना नहीं, बल्कि ऐसे माहौल में सुरक्षा बनाए रखना है, जहां लोग खुलकर त्योहार का आनंद ले सकें.
सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की चर्चा के बाद लोगों ने महिला पुलिसकर्मियों की तारीफ की. कुछ यूजर्स ने उन्हें अंडरकवर एजेंट बताया, तो कुछ ने 'धुरंधर' कहकर उनके काम की सराहना की. लोगों को यह बात दिलचस्प लगी कि जो महिलाएं गरबा खेलने आई हुई दिखाई दे रही थीं, वे दरअसल सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा थीं. वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि वीडियो में उनके साथ मौजूद दूसरी महिलाओं को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे पुलिस टीम का हिस्सा हैं. इस तरह की प्रतिक्रियाओं के बीच एक बात साफ है कि लोगों का ध्यान अब त्योहारों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपनाए जा रहे नए तरीकों पर भी जा रहा है.