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अगर आज आपने अपने स्मार्टफोन या फिर लैपटॉप पर सर्च इंजन गूगल ओपन किया होगा, तो कुछ बदला-बदला नजर आया होगा. होम पेज पर आपको पुराना गूगल का लोगो दिखाई दे रहा होगा, जो 1998 के दौर का है. ऐसे में मन में सवाल आना लाजमी है कि गूगल ने आज यह पुराना लोगो क्यों लगाया है? इसका जवाब है कि आज गूगल का बर्थडे है!
गूगल आज अपना 28वां जन्मदिन मना रहा है और इसी जश्न में डूबा हुआ है. लेकिन कहानी में एक ऐसा दिलचस्प ट्विस्ट है, जिसे जानकर आप भी चौंक जाएंगे. जिस तारीख को आज पूरी दुनिया गूगल का बर्थडे मान रही है, क्या सच में इसका जन्म इसी दिन हुआ था? आइए जानते हैं टेक जगत के इस सबसे बड़े और मजेदार राज का पूरा किस्सा!
गूगल हर साल 27 सितंबर को अपना जन्मदिन मनाता है. इस मौके पर कंपनी हर बार खास डूडल पर शेयर करती है. इस बार गूगल ने 1998 यानी शुरुआती दौर का ने एक खास डूडल भी शेयर किया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस तारीख को गूगल अपना बर्थडे मनाता है, वह इसकी असली जन्मतिथि है ही नहीं? गूगल की कहानी में एक ऐसा अनोखा ट्विस्ट है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है.
कागजों और कानूनी तौर पर देखें तो गूगल की स्थापना 4 सितंबर 1998 को हुई थी. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो पीएचडी छात्र लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने मिलकर इस कंपनी को रजिस्टर किया था. इससे भी दिलचस्प बात यह है कि गूगल के अपने इतिहास के अनुसार, कंपनी का वजूद असल में अगस्त 1998 में ही आ गया था. सन माइक्रोसिस्टम्स के को-फाउंडर एंडी बेक्टोलशोइम ने लैरी और सर्गेई को 1,00,000 डॉलर का एक चेक सौंपा था, जिसने Google Inc. की नींव रख दी थी.
अब सवाल यह उठता है कि जब कंपनी सितंबर के पहले हफ्ते या अगस्त में शुरू हुई थी, तो फिर 27 सितंबर को जन्मदिन क्यों मनाया जाता है? सच तो यह है कि खुद गूगल के पास भी इसका कोई पक्का जवाब नहीं है. साल 2000 के शुरुआती दौर में गूगल अलग-अलग तारीखों पर अपना जन्मदिन मनाता रहा था. कभी ये तारीख कुछ और होती थी तो कभी कुछ और. लेकिन साल 2006 से कंपनी ने फिक्स कर लिया कि वे हर साल 27 सितंबर को ही अपना बर्थडे मनाएंगे. माना जाता है कि सितंबर के आखिरी हफ्ते में वेब सर्च और इंडेक्सिंग को लेकर कोई बड़ा मुकाम हासिल किया गया था, जिसे याद रखने के लिए इसी तारीख को चुना गया.
वजह चाहे जो भी हो, आज गूगल एक छोटे से गैराज से निकलकर दुनिया की सबसे ताकतवर टेक कंपनियों में शुमार हो चुका है. आज जीमेल, यूट्यूब, गूगल मैप्स, एंड्रॉयड से लेकर एआई की दुनिया का बेताज बादशाह बन चुका है. गूगल का एआई मॉडल Gemini भी पल भर में लोगों के सवालों के जवाब देने से लेकर टास्क को पूरा करता है. साल 2015 में पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक बनने के बाद से भारतीय मूल के सुंदर पिचाई इसकी कमान संभाल रहे हैं.
जैसे गूगल के जन्मदिन का किस्सा बहुत ही अलग है, वैसे ही गूगल के नाम के पीछे की कहानी भी बहुत ही रोमांचक है. शुरुआत में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने अपने इस सर्च इंजन का नाम BackRub रखा था. BackRub नाम रखने के पीछे की वजह थी कि यह इंजन वेबसाइट्स के बैकलिंक्स को ट्रैक करके काम करता था. लेकिन यह नाम कुछ खास नहीं लग रहा था, इसलिए एक बेहतर और दमदार नाम की तलाश शुरू हुई.
और फिर साल 997 में एक दिन लैरी पेज और उनके साथी व्हाइटबोर्ड पर नए नाम पर चर्चा कर रहे थे. तभी वहां मौजूद एक साथी सीन एंडरसन ने गणितीय शब्द Googolplex नाम का सजेशन दिया. इसके जवाब में लैरी पेज ने उसका छोटा रूप Googol यानी गूगोल कहा. गणित में Googol एक बहुत बड़ी संख्या को कहते हैं, यानी 1 के आगे 100 शून्य. लैरी और सर्गेई ने यह नाम इसलिए चुना क्योंकि वे इंटरनेट की अथाह और विशाल जानकारी को समेटकर ऑर्गेनाइज करना चाहते थे. इसके बाद उनके साथी ने इंटरनेट पर यह चेक करने के लिए डोमेन नेम सर्च किया कि Googol.com मौजूद है या नहीं. लेकिन स्पेलिंग की गलती के कारण उन्होंने टाइप कर दिया Google.com.
नाम की यह स्पेलिंग लैरी पेज को इतनी पसंद आई कि उन्होंने उसी वक्त यानी 15 सितंबर 1997 को google.com डोमेन अपने नाम रजिस्टर करवा लिया. इस तरह एक छोटी सी टाइपिंग की गलती ने हमेशा के लिए इंटरनेट की दुनिया का नाम बदल दिया और BackRub हमेशा के लिए Google बन गया!