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Blockchain Technology: बिना ताले की तिजोरी और बिना बैंक का पैसा, एक बार डेटा चढ़ गया तो भगवान भी नहीं बदल सकता

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी क्या है और यह क्रिप्टो करेंसी में कैसे काम करती है? जानिए इस सुपर-सिक्योर डिजिटल बही-खाते और डिसेंट्रलाइजेशन नेटवर्क की पूरी कहानी...

Blockchain Technology: बिना ताले की तिजोरी और बिना बैंक का पैसा, एक बार डेटा चढ़ गया तो भगवान भी नहीं बदल सकता
Image Credit: ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी क्या है और यह क्रिप्टो करेंसी में कैसे काम करती है?

आज के दौर में जब भी हम इंस्टाग्राम या यूट्यूब रील्स स्क्रॉल करते हैं, तो क्रिप्टो करेंसी, बिटकॉइन या एनएफटी (NFTs) जैसे शब्द कान से टकरा ही जाते हैं. इन सबके पीछे एक ऐसा नाम बार-बार सामने आता है जो इस पूरी डिजिटल इकोनॉमी का इंजन है और वो है ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी (Blockchain Technology). इसका बेसिक कॉन्सेप्ट उतना ही सिंपल है जितना दोस्तों के बीच पैसों का हिसाब रखना. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां कोई एक सिंगल डायरी या बैंक नहीं होता, बल्कि हजारों-लाखों कंप्यूटर्स का एक ऐसा नेटवर्क होता है जहां हर एक ट्रांजैक्शन का पक्का रिकॉर्ड दर्ज होता है.

ब्लॉकचेन आखिर है क्या?
आपके पांच दोस्तों का एक ग्रुप है और आप सब ने मिलकर एक ट्रिप प्लान की. ट्रिप का सारा खर्च कभी राहुल ने दिया, कभी अतुल ने, तो कभी अनुज ने. अब पैसे के इस खेल में गड़बड़ न हो, इसके लिए आप क्या करेंगे?

आप एक कॉमन ग्रुप चैट या एक ऐसी डिजिटल डायरी बना देते हैं जिसमें हर एक खर्चे की एंट्री तुरंत नोट हो जाती है और वो डायरी ग्रुप के पांचों सदस्यों के पास एक साथ सिंक रहती है. अगर कोई एक बंदा चुपके से डायरी में लिखकर राहुल के पैसे कम करना चाहेगा, तो बाकी चार लोगों के पास जो ओरिजिनल रिकॉर्ड है, वो उसे तुरंत पकड़ लेंगे.

बस, ब्लॉकचेन भी कुछ ऐसा ही डिजिटल और डिस्ट्रीब्यूटेड बही-खाता है. इसमें डेटा किसी एक कंपनी या बैंक के सेंट्रल सर्वर पर सेव नहीं होता, बल्कि नेटवर्क से जुड़े हर एक कंप्यूटर (जिन्हें 'Nodes' कहते हैं) पर उसकी एक कॉपी हमेशा के लिए सेव हो जाती है.

कैसे बनती है यह 'ब्लॉक' की 'चेन'?
ब्लॉक क्या है?: जब भी कोई डिजिटल ट्रांजैक्शन या डेटा ट्रांसफर होता है, तो उसे एक 'ब्लॉक' के अंदर डेटा के रूप में पैक कर दिया जाता है. जब वह ब्लॉक डेटा से पूरी तरह भर जाता है, तो उस पर ताला लग जाता है.

चेन कैसे बनती है?: हर नया ब्लॉक अपने से ठीक पिछले वाले ब्लॉक के साथ एक यूनीक डिजिटल कोड (जिसे क्रिप्टोग्राफिक हैश कहते हैं) के जरिए मजबूती से जुड़ जाता है. इससे मोतियों की एक ऐसी माला या चेन बन जाती है जिसे बीच में से तोड़ना या छेड़छाड़ करना नामुमकिन हो जाता है. अगर आपने इतिहास के किसी पुराने ब्लॉक से छेड़खानी की कोशिश की, तो उसके आगे की पूरी चेन का हिसाब अपने आप बिगड़ जाएगा और सिस्टम उसे तुरंत रिजेक्ट कर देगा.

क्रिप्टोकरेंसी में ब्लॉकचेन का असली खेल कैसे काम करता है?
अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि भाई, क्रिप्टो करेंसी (जैसे बिटकॉइन या एथेरियम) में यह सब कैसे काम करता है?

जब आप ट्रेडिशनल बैंकिंग सिस्टम से पैसे ट्रांसफर करते हैं, तो बीच में बैंक या कोई थर्ड-पार्टी मध्यस्थ बैठा होता है जो आपके पैसों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाता है और इसके बदले अपना कमीशन काटता है. लेकिन क्रिप्टो में कोई बैंक या सरकार बीच में नहीं होती.

पूरा प्रोसेस ऐसे काम करता है:
ट्रांजैक्शन की शुरुआत: मान लीजिए आपने अपने किसी दोस्त को कुछ क्रिप्टो कॉइन भेजने के लिए कमांड दी. 
नेटवर्क में ब्रॉडकास्ट: आपका यह ट्रांजैक्शन ब्लॉकचेन नेटवर्क से जुड़े हजारों कंप्यूटर्स (नोड्स) के पास वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाता है.
मैथमैटिकल पजल और माइनिंग: नेटवर्क के कंप्यूटर्स (या माइनर्स) एक जटिल गणितीय एल्गोरिदम को सॉल्व करके यह वेरीफाई करते हैं कि भेजने वाले के पास वाकई उतने कॉइन हैं या नहीं और ट्रांजैक्शन सही है या फर्जी.
ब्लॉक का जुड़ना: जैसे ही मेजॉरिटी कंप्यूटर्स इस ट्रांजैक्शन को हरी झंडी दिखा देते हैं, यह एक नए ब्लॉक में दर्ज होकर हमेशा के लिए ब्लॉकचेन की चेन में परमानेंटली फिट हो जाता है.

क्यों इतनी सिक्योर्ड और फेमस है यह टेक्नोलॉजी?
नो मिडलमैन: बैंक या किसी थर्ड पार्टी का झंझट खत्म, सीधा पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांसफर होता है जिससे समय और फीस दोनों बचती है.

नहीं कर सकते एडिट: एक बार जो डेटा ब्लॉकचेन पर चढ़ गया, इसका मतलब पत्थर की लकीर हो गया. उसे कोई एडिट, डिलीट या हैक नहीं कर सकता.

फुल ट्रांसपेरेंसी: नेटवर्क पर क्या हो रहा है, इसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सबके पास रहता है, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश लगभग जीरो हो जाती है.

क्या सिर्फ क्रिप्टो तक ही सीमित है ब्लॉकचेन का दायरा?
बहुत से लोगों को लगता है कि ब्लॉकचेन का मतलब सिर्फ बिटकॉइन या डिजिटल कॉइन है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. आज के समय में इसका इस्तेमाल कई और जगहों पर हो रहा है:
सप्लाई चेन मैनेजमेंट: कोई सामान फैक्ट्री से निकलकर आपके तक पहुंचने के असली रास्ते पर है या नकली, इसे ट्रैक करने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियां ब्लॉकचेन का इस्तेमाल कर रही हैं.   
लैंड रिकॉर्ड्स और सरकारी कामकाज: जमीन के कागजों की हेराफेरी रोकने और डेटा को सुरक्षित रखने के लिए कई देश इसे अपना रहे हैं.   
स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स: ऐसे ऑटोमैटिक डिजिटल समझौते जो शर्तों के पूरा होते ही खुद-ब-खुद एक्सक्यूट हो जाते हैं, बिना किसी वकील या ब्रोकर के.

ब्लॉकचेन सिर्फ एक ट्रेंडिंग टेकवर्ड नहीं है, बल्कि यह डिजिटल दुनिया में भरोसे का नया पैमाना बन चुका है. आने वाले समय में इंटरनेट की दुनिया कैसे चलेगी, इसकी एक बड़ी चाबी इसी टेक्नोलॉजी के पास है.

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About the Author

Mohit Chaturvedi

Mohit Chaturvedi

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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