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जब NASA ने अंतरिक्ष में भेजीं 3,301 मधुमक्खियां: पहले दीवारों से टकराईं, फिर बना डाला 200cm का छत्ता!

1984 में NASA ने स्पेस शटल डिस्कवरी से 3,301 मधुमक्खियों को अंतरिक्ष में भेजा था. जानिए कैसे बिना गुरुत्वाकर्षण के मक्खियों ने 200cm छत्ता बनाया और 7 दिनों में कौन-कौन से अद्भुत चमत्कार किए.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Sep 02, 2026, 10:59 AM IST | Updated: Sep 03, 2026, 10:34 AM IST
Image Credit: NASA
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1984 में NASA ने एक ऐसा एक्सपेरिमेंट किया था, जिसके बारे में सुनकर आज का यूथ भी कहेगा- "ये तो अलग ही लेवल का काम है!" वैज्ञानिकों के दिमाग में काफी टाइम से यह सवाल घूम रहा था कि अगर पृथ्वी के जीवों को बिना गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) वाली जगह पर भेज दिया जाए, तो उनका क्या होगा?

इसी का जवाब ढूंढने के लिए NASA ने 3,301 मधुमक्खियों को स्पेस शटल डिस्कवरी में भरकर अंतरिक्ष में भेज दिया. 7 दिन के इस मिशन में मक्खियों ने शुरुआत में जो क्रेजी हरकतें कीं और फिर जिस तरह से स्पेस के माहौल में खुद को सेट किया, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया.

जब NASA ने रचा इतिहास और भेजा 3,301 मधुमक्खियों का स्क्वाड
साल 1984 में NASA का STS-41C मिशन लॉन्च हुआ था. इस स्पेस शटल डिस्कवरी में सिर्फ एस्ट्रोनॉट्स ही नहीं, बल्कि 3,301 मधुमक्खियों का एक पूरा ग्रुप भी सवार था.

वैज्ञानिकों का मेन गोल यह चेक करना था कि क्या बिना ग्रेविटी के मक्खियां जिंदा रह सकती हैं? और उससे भी बड़ा सवाल यह था कि क्या वे स्पेस में भी अपना छत्ता (Honeycomb) बना पाएंगी, जैसा वे पृथ्वी पर बनाती हैं?

मक्खियों के रहने और खाने का वीआईपी इंतजाम
स्पेस में मक्खियां सुरक्षित रहें, इसके लिए NASA ने एक खास बॉक्स तैयार किया था. इसे बी एनक्लोजर मॉड्यूल (Bee Enclosure Module) कहा गया, जिसका साइज लगभग 45.7 x 12.1 x 48.3 सेंटीमीटर था.

इस बॉक्स के अंदर एक क्वीन बी (रानी मक्खी), ढेर सारी वर्कर मक्खियां और लकड़ी के फ्रेम रखे गए थे. अब सवाल आया कि स्पेस में पानी या लिक्विड तो हवा में बूंद बनकर तैरने लगता है, तो मक्खियां खाना कैसे खाएंगी? इसके लिए वैज्ञानिकों ने चीनी, पानी और अगर (Agar) को मिलाकर एक खास जेली जैसा मिक्सचर बनाया ताकि वे आराम से खा सकें.

शुरुआत में हुआ फुल कन्फ्यूजन, दीवारों से टकराने लगीं मक्खियां
जैसे ही स्पेस शटल अंतरिक्ष में पहुंचा, मक्खियों की हालत खराब हो गई. उनके लिए यह माहौल बिल्कुल नया था. पृथ्वी पर तो ग्रेविटी की वजह से सब नीचे रहता है, लेकिन स्पेस में तो जीरो ग्रेविटी थी!

जैसे ही मक्खियों ने उड़ने की कोशिश की, वे अपना बैलेंस ही खो बैठीं. वे कभी बॉक्स की छत से टकरातीं तो कभी सीधे दीवारों से जा भिड़तीं. वैज्ञानिकों को लगा कि शायद यह एक्सपेरिमेंट फेल हो जाएगा क्योंकि मक्खियों को समझ ही नहीं आ रहा था कि स्पेस में उड़ना कैसे है.

7वें दिन आया ट्विस्ट: मक्खियों ने किया जबरदस्त कमबैक
लेकिन मक्खियों ने भी हार नहीं मानी. सिर्फ 7 दिनों के अंदर उन्होंने जीरो ग्रेविटी के माहौल को क्रैक कर लिया. 7वें दिन जब एस्ट्रोनॉट्स ने उन्हें देखा, तो वे हैरान रह गए.

मक्खियां अब दीवारों से टकरा नहीं रही थीं, बल्कि फुल कॉन्फिडेंस के साथ एक जगह से दूसरी जगह फ्लाई कर रही थीं. वीडियो फुटेज से तो यह भी पता चला कि वे पृथ्वी के मुकाबले स्पेस में ज्यादा तेजी से उड़ रही थीं. उनका यह एटीट्यूड देखकर साइंटिस्ट्स भी उनके फैन हो गए.

जीरो ग्रेविटी में बना 200 सेंटीमीटर का छत्ता
मक्खियों ने सिर्फ उड़ना ही नहीं सीखा, बल्कि अपने काम में भी लग गईं. 7 दिन के इस छोटे से मिशन में उन्होंने स्पेस के अंदर ही 200 सेंटीमीटर का शहद का छत्ता बना डाला.

वैज्ञानिकों ने जब इस छत्ते को देखा तो पाया कि इसकी दीवारें पृथ्वी वाले छत्ते से थोड़ी ज्यादा मोटी थीं और छेद का साइज थोड़ा छोटा था. लेकिन बाकी सब एकदम परफेक्ट था. मक्खियों ने उसमें चीनी का सिरप स्टोर करना भी शुरू कर दिया था.

क्वीन बी ने दिए अंडे, लेकिन रह गया एक सस्पेंस
इस पूरे मिशन में सबसे अच्छी बात यह रही कि स्पेस में मक्खियों की मौत बहुत कम हुई. यही नहीं, क्वीन बी ने स्पेस में लगभग 35 अंडे भी दिए.

लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब शटल पृथ्वी पर वापस लौटा. पृथ्वी पर आने के बाद उन अंडों से बच्चे बाहर नहीं आ पाए (वे हैच नहीं हुए). ऐसा क्यों हुआ, इसका सटीक जवाब वैज्ञानिक आज तक नहीं ढूंढ पाए हैं और यह रहस्य आज भी बना हुआ है.

आज कहां है वो ऐतिहासिक स्पेस बॉक्स?
NASA का यह एक्सपेरिमेंट स्पेस साइंस और बायोलॉजी के इतिहास में एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. जिस डिब्बे में इन 3,301 मक्खियों ने स्पेस की यात्रा की थी, उसे आज भी संभाला गया है.

हनीवेल कंपनी ने इसे स्मिथसोनियन के स्टीवन एफ. उदवार-हेजी सेंटर (वर्जीनिया, अमेरिका) को डोनेट कर दिया था, जहां यह आज भी म्यूजियम में रखा है. अगर आप कभी वहां जाएं, तो 1984 के इस सुपर कूल एक्सपेरिमेंट की याद दिलाने वाला यह बॉक्स वहां देख सकते हैं.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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