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डिजिटल तबाही का 'किल स्विच' दबा! अमेरिका से लेकर यूरोप तक छाया सन्नाटा, PHP के वो दो बग्स जिन्होंने उड़ा दी दुनिया की नींद!

जापान की पीएम सनाए ताकाइची और अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने इंटरनेट की दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी इमरजेंसी घोषित की है. पीएचपी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में मिले दो खतरनाक बग्स के कारण दुनिया भर की बड़ी वेबसाइट्स ठप पड़ गई हैं. जानिए क्या है ये पूरा साइबर खतरा और क्यों वेबसाइट्स बंद करने के आदेश दिए गए हैं.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Oct 22, 2026, 08:13 AM IST | Updated: Oct 22, 2026, 08:20 AM IST
Image Credit: एफबीआई ने इंटरनेट की दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी इमरजेंसी घोषित की है.
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जापान, अमेरिका से लेकर यूरोप तक... इस वक्त पूरे ग्लोब में साइबर सिक्योरिटी का एक ऐसा भयंकर बवंडर आया हुआ है जिसने बड़ी-बड़ी सरकारों के भी पसीने छुड़ा दिए हैं. हालात इतने ज्यादा बिगड़ गए कि जापानी प्रधानमंत्री से लेकर अमेरिका की खुफिया एजेंसियों एफबीआई और एनएसए तक को आधी रात को इमरजेंसी गाइडलाइंस जारी करनी पड़ीं. उनका साफ-साफ कहना है कि या तो अपनी साइट्स का पैच तुरंत अपडेट कर लो, नहीं तो सीधे अपनी वेबसाइट का प्लग उखाड़ो और उसे पूरी तरह से ऑफलाइन कर दो.

इंटरनेट की दुनिया में अचानक आया भूकंप
हर छोटी-बड़ी कंपनी या स्टार्टअप का पूरा का पूरा बिजनेस उनकी वेबसाइट्स पर ही निर्भर रहता है. मगर अचानक एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया के आईटी एक्सपर्ट्स की रातों की नींद पूरी तरह से हराम कर दी. हुआ यह कि अमेरिका, यूरोप और एशिया की कई दिग्गज वेबसाइट्स अचानक एक-एक करके ठप होने लगीं और स्क्रीन पर एरर मैसेज आने लगा. शुरुआत में तो सबको लगा कि यह कोई रोजमरा का सर्वर क्रैश या नॉर्मल डाउनटाइम है. लेकिन जैसे ही जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का ऑफिशियल बयान आया, पूरी दुनिया में तहलका मच गया. उन्होंने खुलासा किया कि पूरे इंटरनेट की रीढ़ मानी जाने वाली पीएचपी (PHP) कोडिंग लैंग्वेज में दो बेहद खतरनाक सुराख पाए गए हैं, जिनकी मदद से हैकर्स पूरा डेटा चुरा सकते हैं.

आखिर क्या है यह PHP और क्यों मच गई इतनी अफरा-तफरी?
पीएचपी एक ऐसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसके भरोसे दुनिया की करीब 70 से 80 परसेंट वेबसाइट्स चल रही हैं. चाहे आप कोई शॉपिंग साइट खोलें, कोई ब्लॉग पढ़ें या किसी सरकारी विभाग का पोर्टल चलाएं- ज्यादातर जगहों पर बैकएंड में पीएचपी का कोड ही दौड़ता है. अब खुद पीएचपी की अपनी सिक्योरिटी टीम ने हाथ खड़े करते हुए बताया है कि उनके कोड में दो बेहद खौफनाक बग्स मिले हैं, जिन्हें 'CVE-2026-109618' और 'CVE-2026-109619' नाम दिया गया है. ये बग्स इतने डरावने हैं कि कोई भी हैकर मीलों दूर बैठकर आपकी वेबसाइट के मेन सर्वर में घुस सकता है और बिना कोई पासवर्ड डाले पूरा सिस्टम अपने कब्जे में ले सकता है.

जापान की पीएम सनाए ताकाइची ने आधी रात को बजाया अलार्म
मामले की गंभीरता को देखते हुए जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद अर्जेंट पोस्ट शेयर की. उन्होंने दुनिया भर के सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर्स और टेक मैनेजर्स को सीधे चेतावनी दी कि 21 अक्टूबर की रात 11 बजे जापानी समय के मुताबिक पीएचपी की टीम एक इमरजेंसी सिक्योरिटी पैच जारी कर रही है. उन्होंने सभी कंपनियों से कहा कि बिना एक सेकंड की देरी किए तुरंत चेक करो कि आपकी वेबसाइट पीएचपी पर चल रही है या नहीं. पीएम ताकाइची ने तो यहां तक साफ कह दिया कि अगर कोई कंपनी इस पैच को तुरंत अप्लाई नहीं कर पा रही है, तो फालतू का रिस्क लेने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. अपनी वेबसाइट को तुरंत ऑफलाइन कर देना ही इस बड़े खतरे से बचने का सबसे सेफ तरीका है.

एफबीआई और एनएसए ने भी जारी किया डेंजर रेड अलर्ट
यह सिर्फ जापान तक सीमित कोई छोटा मामला नहीं है. अमेरिका की टॉप इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एफबीआई और नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (NSA) ने भी इस पर बहुत ही डरावनी एडवाइजरी जारी की है. एफबीआई के साइबर डिवीजन का कहना है कि पीएचपी के ये दोनों सुराख हैकर्स को किसी भी सर्वर के डेटाबेस और उसकी सीक्रेट फाइलों का डायरेक्ट एक्सेस दे देते हैं. इसका मतलब साफ है कि अगर आपकी साइट पर यूजर्स का प्राइवेट डेटा, उनके क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स या कोई कॉन्फिडेंशियल फाइल्स हैं, तो हैकर्स उन्हें चुटकियों में साफ कर सकते हैं. एफबीआई ने सीधे हिदायत दी है कि अगर पैच लगाना तुरंत पॉसिबल न हो, तो सर्वर को तुरंत ऑफलाइन कर दो. साथ ही किसी भी तरह की संदिग्ध हलचल दिखने पर तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करने को कहा गया है.

हैकर्स कैसे उठा रहे हैं इस कमजोरी का पूरा फायदा?
ये दोनों बग्स सर्वर के 'मेमोरी मैनेजमेंट' और 'इंटरनल स्टेट' में छिपी कमियों से जुड़े हुए हैं. जब भी कोई यूजर किसी वेबसाइट को खोलता है, तो सर्वर बैकएंड में कुछ कोड रन करता है. लेकिन इस कमजोरी के कारण पुरानी रिक्वेस्ट्स का कुछ डेटा सर्वर की मेमोरी में ही अटका रह जाता है. बस, चालाक हैकर्स इसी सुराख का फायदा उठाकर सर्वर में अपना एक मैलिशियस (खतरनाक) कोड इंजेक्ट कर देते हैं. जैसे ही वह कोड रन होता है, सर्वर पूरी तरह से हैकर का गुलाम बन जाता है. इसके बाद हैकर चाहे तो आपका पूरा डेटा चुरा ले, साइट को हमेशा के लिए उड़ा दे या फिर उसी सर्वर का इस्तेमाल करके किसी दूसरे बड़े टारगेट पर साइबर हमला कर दे.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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