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18 साल से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया पर बंद हो सकती है एंट्री! सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर केंद्र सरकार ने दिया बड़ा संकेत

हाथ में स्मार्टफोन लिए स्क्रीन पर टकटकी लगाए बच्चों की डिजिटल दुनिया जल्द बदलने वाली है. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार 18 साल से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया पर एंट्री रोकने के लिए आईटी नियमों में बड़ा बदलाव कर सकती है.

Written By Udbhav Tripathi
Published: Sep 29, 2026, 01:43 PM IST | Updated: Sep 29, 2026, 01:57 PM IST
Image Credit: सोशल मीडिया अकाउंट एज लिमिट
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हाथ में स्मार्टफोन, स्क्रीन पर टकटकी लगाए बैठे बच्चे और पैरेंट्स को लगता है कि उनका बच्चा सिर्फ वीडियो देख रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस उम्र में बच्चा अपना फैसला खुद नहीं ले पाता है, उसी उम्र में वह फेसबुक, इंस्टाग्राम या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मर्जी से अकाउंट कैसे बना लेता है? अब देश की सबसे बड़ी अदालत और सरकार इसी सवाल पर गंभीर हो गई है. बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद, केंद्र सरकार IT नियमों में एक ऐसा बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है, जो देश के करोड़ों बच्चों की डिजिटल जिंदगी को पूरी तरह बदल कर रख देगा.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह ऐसे नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिनके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 18 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोक सकते हैं. केंद्र सरकार की तरफ से यह बात उस याचिका की सुनवाई के दौरान कही गई, जिसमें नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा उपायों की मांग की गई है. सरकार ने कोर्ट को बताया कि IT नियमों में बदलाव किया जा सकता है.

क्या है पूरा मामला?

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस नाम की एक NGO ने याचिका दायर की थी. इस याचिका में सवाल उठाया गया था कि जब भारतीय कानून इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट की धारा 11 के अनुसार नाबालिग यानी 18 साल से कम उम्र के बच्चे किसी तरह का कानूनी कॉन्ट्रैक्ट करने के योग्य नहीं हैं, तो वे सोशल मीडिया कंपनियों की टर्म्स एंड कंडीशंस को एक्सेप्ट करके अपना अकाउंट कैसे तैयार कर लेते हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सवाल पर सहमति जताई कि विदेशी कंपनियों के नियम भारत में वैसे के वैसे लागू नहीं हो सकते, जहां कानून कुछ और कहता है. बेंच ने सरकार से साफ कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर में बदलाव करने के निर्देश दिए जाएं, जिससे वे भारतीय कानूनों का पालन करें.

18 साल से कम उम्र में अकाउंट बनाने पर रोक!

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच कर रही है. सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नाबालिगों और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच होने वाले ऐसे समझौते कानूनी तौर पर मान्य नहीं माने जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह जरूरी किया जा सकता है कि वे 18 साल से कम उम्र के यूजर्स को सोशल मीडिया अकाउंट खोलने की अनुमति न दें.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल पूरी तरह बंद हो जाएगा. कोर्ट में यह भी कहा गया कि एजुकेशनल वेबसाइट्स पर बच्चों की सदस्यता पैरेंट्स की सहमति से ली जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सिर्फ कंपनियों की तरफ से बनाए गए नियमों पर निर्भर रहने के बजाय कानूनी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है. कोर्ट का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों के अनुसार काम करना चाहिए. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल उठाया कि अगर किसी प्लेटफॉर्म के सॉफ्टवेयर या सिस्टम में बदलाव की जरूरत है, तो कंपनियों को भारतीय कानून के मुताबिक अपनी तकनीक में बदलाव करना चाहिए.
कोर्ट ने केंद्र से यह भी पूछा कि क्या इंटरमीडिएरी रूल्स के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर और प्लेटफॉर्म को भारतीय कानून के अनुसार तैयार करने का निर्देश दिया जा सकता है.

सरकार ने क्या कहा?

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है. उन्होंने कहा कि जिस तरह एजुकेशनल वेबसाइट्स पर बच्चों का एडमिशन माता-पिता की सहमति से होता है, उसी तरह सोशल मीडिया के लिए भी सख्त नियम बनाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि इस मामले में कुछ किया जा सकता है और किया जाना चाहिए.

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बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं

यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब बच्चों के ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है. याचिका में कोर्ट का ध्यान इस बात की तरफ खींचा गया था कि कैसे सोशल मीडिया की वजह से बच्चे ऑनलाइन ग्रूमिंग, साइबरबुलिंग, गलत कंटेंट और डेटा के गलत इस्तेमाल जैसी गंभीर समस्याओं का शिकार हो रहे हैं. कोर्ट ने यह भी स्वीकारा है कि इसके लिए हमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के पूरी तरह लागू होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बच्चों के कॉन्ट्रैक्ट न कर पाने का नियम देश में पहले से ही मौजूद है.
बता दें कि ऑस्ट्रेलिया, UAE समेत कई देशों में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक है. 

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उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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