SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Sunflower Like AC: सूरज को चकमा देने आया दुनिया का पहला 'सूरजमुखी AC', कड़कड़ाती धूप में देगा 135% ज्यादा कूलिंग

चीन के वैज्ञानिकों ने सूरजमुखी फूल की तर्ज पर चलने वाला अनोखा कूलिंग सिस्टम बनाया है. यह सिस्टम सूरज की लोकेशन ट्रैक करके धूप से बचता है और 135% अधिक कूलिंग देता है. जानिए यह तकनीक बिना भारी बिजली के कैसे काम करती है.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Sep 29, 2026, 07:39 AM IST | Updated: Sep 29, 2026, 07:41 AM IST
Image Credit: Sunflower Like AC
Join

गर्मियों के मौसम में भारी बिजली बिल और AC के खर्चे से हर कोई परेशान रहता है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि एक ऐसा कूलिंग पैनल भी हो सकता है जो सूरज के साथ-साथ अपनी दिशा बदलता रहे और बिना कंप्रेसर के कमरे को बिल्कुल ठंडा रखे? चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ही अनोखा कूलिंग सिस्टम तैयार किया है जो सूरजमुखी के फूल की तरह काम करता है. फर्क बस इतना है कि सूरजमुखी धूप पाने के लिए घूमता है और यह पैनल धूप से बचने के लिए खुद को मोड़ लेता है.

सितंबर 2026 में सामने आई इस रिसर्च के मुताबिक, यह नया सिस्टम नॉर्मल कूलिंग पैनलों के मुकाबले कड़कड़ाती दोपहर में 135% तक ज्यादा कूलिंग देता है. आइए बेहद आसान शब्दों में समझते हैं कि यह नई टेक्नोलॉजी क्या है और कैसे काम करती है.

क्या है यह सूरजमुखी जैसा AC?
रेडिएटिव कूलिंग कोई नई बात नहीं है. इसमें खास तौर पर तैयार किए गए मटेरियल का इस्तेमाल होता है जो गर्मी को इंफ्रारेड किरणों के रूप में सीधे खुले आसमान की तरफ फेंक देते हैं. यह तरीका बिना बिजली या भारी कंप्रेसर के चीजों को ठंडा करने में मदद करता है.

लेकिन इसके रास्ते में सबसे बड़ा विलेन बनता है सूरज. दिन के समय जब कड़क धूप होती है तो कूलिंग पैनल जितनी गर्मी बाहर फेंकते हैं, उससे कहीं ज्यादा गर्मी सूरज की किरणों से सोख लेते हैं. इसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए चाइनीज रिसर्चर्स ने पैनल का मटेरियल बदलने के बजाय उसका एंगल बदलने का दिमाग लगाया. इस नई तकनीक को 'डायनेमिक स्काई VIEW फैक्टर स्टीयरिंग' (DSVFS) नाम दिया गया है.

सूरजमुखी से बिल्कुल उल्टा है इसका काम
पहली बार देखने में लगता है कि यह पैनल सोलर पैनल की तरह सूरज का पीछा करता है, लेकिन इसका असली मकसद बिल्कुल उल्टा है. इसका काम सूरज की सीधी किरणों से खुद को बचाना है.

इसमें लगे स्मार्ट सेंसर सूरज की लोकेशन को हर सेकंड ट्रैक करते हैं. इसके बाद इसमें लगा 2-एक्सिस मैकेनिज्म पैनल को इस तरह झुका देता है कि उस पर सूरज की तेज धूप सीधे न पड़े. हालांकि पैनल को थोड़ा मोड़ने से आसमान का वह हिस्सा कम दिखता है जहां इसे अपनी गर्मी भेजनी होती है, लेकिन यह सिस्टम इन दोनों बातों के बीच एक परफेक्ट बैलेंस बना लेता है.

लैब टेस्ट में दिखे हैरान करने वाले नतीजे
वैज्ञानिकों ने इसे टेस्ट करने के लिए एक खास पेंट वाले कूलिंग पैनल का इस्तेमाल किया, जो सिर्फ 4.6% धूप सोखता है. जब इस पैनल को दोपहर 12 बजे सीधे फ्लैट रखा गया तो इसकी कूलिंग पावर 30 वाट प्रति वर्ग मीटर थी.

लेकिन जैसे ही इसे घूमने वाले मैकेनिज्म पर लगाया गया, इसकी कूलिंग पावर सीधे बढ़कर 71 वाट प्रति वर्ग मीटर हो गई. रिसर्चर्स के मुताबिक यह कूलिंग पावर में सीधे 135% का बड़ा उछाल था. दोपहर के वक्त यह पैनल आम पैनल से 1.1 डिग्री सेल्सियस ज्यादा ठंडा रहा और आसपास की हवा से करीब 2.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा ठंडा मापा गया.

काले पेंट पर भी कर दिखाया बड़ा चमत्कार
इस सिस्टम का असली टेस्ट तब हुआ जब वैज्ञानिकों ने इस पर नॉर्मल ब्लैक पेंट लगी एल्युमिनियम प्लेट का इस्तेमाल किया. हम सब जानते हैं कि ब्लैक पेंट 99.6% धूप को सोख लेता है, इसलिए इसे ठंडा रखना सबसे मुश्किल माना जाता है.

वैज्ञानिकों ने इसके ऊपर एक बहुत पतली पॉलीथीन लेयर लगाई जो सीधी धूप को रोकती थी लेकिन अंदर की गर्मी को बाहर जाने देती थी. इसका रिजल्ट बहुत चौंकाने वाला निकला. सीधे रखा गया काला पैनल दोपहर में बिल्कुल ठंडा नहीं हो सका, जबकि घूमने वाले मैकेनिज्म का इस्तेमाल करने पर वही काला पैनल आसपास की हवा से औसतन 6.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा ठंडा रहा. दोपहर के वक्त सीधे रखे काले पैनल और घूमने वाले काले पैनल के तापमान में पूरे 23.9 डिग्री सेल्सियस का बड़ा अंतर देखा गया.

बादल छाते ही अपने आप सीधा हो जाता है पैनल
यह टेक्नोलॉजी सिर्फ धूप से बचने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मौसम के हिसाब से अपनी चाल बदलती है.

जब आसमान में घने बादल छा जाते हैं और सीधी धूप गायब हो जाती है, तो यह पैनल अपने आप बिल्कुल सीधा यानी समतल हो जाता है. ऐसा करने से इसे पूरा आसमान दिखता है और यह ज्यादा से ज्यादा गर्मी बाहर फेंक पाता है. शाम को सूरज ढलने के बाद भी यह पैनल वापस अपनी फ्लैट पोजिशन में आ जाता है.

लैब से निकलकर हमारे घरों तक कब पहुंचेगा यह AC
कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए वैज्ञानिकों ने अंदाजा लगाया है कि अगर इस तकनीक को शहरों में इमारतों पर इस्तेमाल किया जाए, तो यह गर्मियों के मौसम में 150 से 200 किलोवाट-घंटे प्रति वर्ग मीटर तक बिजली बचा सकती है.

हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि यह रिसर्च अभी लैब के शुरुआती चरण में है और इसे arXiv प्रीप्रिंट पर पब्लिश किया गया है. अभी दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा इसका रिव्यू होना बाकी है. इसे छतों पर प्रैक्टिकली लगाने से पहले इसके घूमने वाले मोर्टर की मजबूती, मेंटेनेंस और इसे घुमाने में लगने वाली हल्की बिजली के खर्च का पूरा हिसाब लगाना होगा. लेकिन इसने दुनिया को बिना बिजली कमरे ठंडे रखने का एक बहुत ही स्मार्ट रास्ता दिखा दिया है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES