AI Detector का ‘फर्जीवाड़ा’! एक ही कंटेंट पर अलग-अलग क्यों आता है AI Score? एक्सपर्ट्स ने खोलकर रख दी पोल
क्या आपका खुद का लिखा कंटेंट भी AI Detectors द्वारा 100% एआई जेनरेटेड बताया जा रहा है? जानिए टेक एक्सपर्ट्स फैसल कवूसा, तरुण पाठक और योगेश बरार ने AI Detectors के फर्जीवाड़े, हिंदी कंटेंट में आने वाले फॉल्स फ्लैग्स और इनकी घटिया एक्यूरेसी पर क्या बड़ा खुलासा किया है.
'आपने जो आर्टिकल लिखा है वो 100% AI Generated कंटेंट है...' आपने काफी रिसर्च करके एक-एक शब्द पिरोकर आर्टिकल तैयार किया हो और उस पर ऐसा कमेंट आए तो जाहिर सी बात है आपको काफी गुस्सा आएगा. ऐसा कहकर सामने वाला आपके काम पर सीधे-सीधे सवाल उठा रहा है. सवाल उठाने वाले ने कुछ नहीं किया, उसने सिर्फ गूगल पर AI Detector वर्ड सर्च किया और 3-4 टूल खोलकर टैब पर रख लिए और आपका लिखा हुआ कंटेंट उस पर डाल दिया.
एक में 70%, दूसरे में 80% तीसरे में 100% और चौथे में 0% एआई जेनरेटेड कंटेंट दिखाने लगा. जिसने मेहनत की है, उसका सारे करे कराए पर पानी फिर गया... वो भी सिर्फ इन टूल्स की वजह से जो दावा करते हैं कि हम सबसे एग्जैक्ट बताते हैं. लेकिन इसमें कोई सच्चाई है? क्या ये टूल इतने दमदार हैं कि हर कोई इनको इस्तेमाल कर सकें? इन्हीं सवालों का जवाब पूछने के लिए हम techARC के चीफ एनालिस्ट फैसल कवूसा, काउंटरप्वाइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक और एक्सपर्ट योगेश बरार के पास पहुंचे...
एक ही आर्टिकल को कोई 10%, कोई 80% AI बता रहा, आखिर किस AI Detector पर करें भरोसा?
techARC के चीफ एनालिस्ट फैसल कवूसा के मुताबिक, किसी भी AI Detector पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए. सभी डिटेक्टर्स के पास अलग-अलग स्कोरिंग मैकेनिज्म होते हैं, जिससे उनके परिणाम अलग आते हैं. वहीं काउंटरप्वाइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक का कहना है कि किसी भी एक AI Detector पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता (विशेषकर हिंदी कंटेंट के लिए). AI डिटेक्टर्स केवल एक डायरेक्शनल इंडिकेटर देते हैं, न कि ठोस जवाब. फैसल ने यह भी बताया कि यदि किसी राइटर ने केवल कोई चीज पूछने या स्पेलिंग सुधारने के लिए AI का उपयोग किया है, तब भी अलग-अलग डिटेक्टर्स इसे अलग-अलग प्रतिशत (जैसे 10% से 90%) में AI-जनरेटेड बता देते हैं.
एक ही कंटेंट पर अलग-अलग क्यों आता है AI Score?
फैसल कवूसा और तरुण पाठक दोनों का मानना है कि एक ही कंटेंट पर स्कोर अलग-अलग आने के दो बड़े कारण हैं.
अलग लॉजिक और एल्गोरिदम: हर AI टूल अलग तरह के तर्क या एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है कि क्या AI है और क्या नहीं.
पैरामीटर्स: कुछ डिटेक्टर्स डेटा सेट्स को देखते हैं, कुछ प्रेडिक्टिबिलिटी मापते हैं, तो कुछ वाक्य की लंबाई या स्ट्रक्चरल एलीमेंट्स को आधार बनाते हैं.
हिंदी राइटर्स के लिए कितना भरोसेमंद है AI Detector?
फैसल कवूसा ने बताया कि ये डिटेक्टर्स बिल्कुल भी भरोसेमंद नहीं हैं. हिंदी और क्षेत्रीय भाषा के कंटेंट के लिए ये टूल्स अक्सर गलत होते हैं. इसका कारण यह है कि इन टूल्स के पास अभी तक हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का पर्याप्त ट्रेनिंग डेटा उपलब्ध नहीं है. वहीं तरुण पाठक का कहना है कि अंग्रेजी में यदि एरर/फॉल्स फ्लैग्स की दर 5% है, तो हिंदी के लिए यह 20% से 30% तक हो सकती है. इसलिए ह्यूमन हिंदी रिटेन को भी गलत तरीके से 'AI Generated' दिखाया जा सकता है.
किस टूल पर विश्वास किया जाए?
अक्सर सवाल उठता है कि आखिर किस टूल पर विश्वास किया जाए. फैसल और तरुण ने सीधे-सीधे कहा कि कोई भी टूल 100% सही AI स्कोर नहीं बताता. ग्लोबल टूल्स भले ही भारतीय भाषाओं को कवर करने का दावा करते हों, लेकिन उनकी डेटा ट्रेनिंग अधूरी है. इसलिए किसी एक टूल के स्कोर को अंतिम सच मानना सही नहीं है. फैसल ने कहा- AI डिटेक्टर्स में भ्रम की संभावना होती है. वे एक अनुमानित रेंज तो दिखा सकते हैं, लेकिन सटीक रिपोर्ट नहीं दे सकते. तरुण ने बताया कि गूगल पर दिख रहे टूल हिंदी के लिए पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है. हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के लिए 'सोवरन एआई' (जैसे Sarvam, Bhashini, Krutrim आदि) पर काम चल रहा है जो आगे चलकर बेहतर हो सकता है
AI Detector आपको भी बता सकता है ‘AI Writer'?
टेक एक्सपर्ट तरुण पाठक के मुताबिक, हां, अगर आपने पूरा आर्टिकल खुद लिखा है, तब भी एआई डिटेक्टर्स आपको एआई राइटर ठहरा सकते हैं. असल में, जब हम हिंदी में लिखते हैं, तो अपनी रोजमर्रा की बोली, देसी अंदाज और मुहावरों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ये ज्यादातर एआई डिटेक्टर्स अंग्रेजी के हिसाब से बने हैं और इन्हें हिंदी की गहराई और आम बोलचाल की समझ नहीं है. ऐसे में जब ये टूल्स हमारे इंसानी अंदाज में लिखे हिंदी वाक्यों को ठीक से पढ़ नहीं पाते, तो कन्फ्यूज होकर असली कंटेंट पर भी गलत फ्लैग लगा देते हैं और उसे मशीन का लिखा हुआ बता देते हैं.
English Vs Hindi: एआई डिटेक्टर्स कितने हैं एक्यूरेट?
टेक एक्सपर्ट योगेश बरार ने बताया कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी के लिए एक्यूरेसी काफी कम है. ज्यादातर AI डिटेक्टर्स मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा के आधार पर बनाए गए हैं और उन्हीं पर टेस्ट किए गए हैं. हिंदी के मामले में डेटा की कमी, शब्दों को तोड़ने का अलग तरीका और हिंदी-अंग्रेजी को मिलाकर लिखने (Hinglish) जैसी वजहों से ये सही नतीजे नहीं दे पाते. कोई भी कंपनी हिंदी के लिए अपने टूल की सटीक रिपोर्ट जारी नहीं करती, जो खुद इस बात का संकेत है कि ये हिंदी के लिए सही काम नहीं करते.
अगर मैं अपनी इस पूरी खबर को इन टूल्स पर डालूं जो मैंने खुद लिखी है और इसमें एक्सपर्ट्स के भी राय है तो नीचे देखिए कैसे ये टूल्स इस आर्टिकल को भी AI Generated बता रहे हैं. किसी ने 100% किसी ने 60% तो किसी ने 21%.