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आपकी बैटरी में अब नमक है...लिथियम का मिला तोड़, पुणे के वैज्ञानिकों ने बनाई Salt Battery, समझिए कैसे करेगी काम?

पुणे के वैज्ञानिकों ने नमक यानी सोडियम-आयन बैटरी से बनने वाली देश की पहली स्वदेशी सॉल्ट बैटरी तैयार कर ली है. लिथियम को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता घटाने वाली यह तकनीक अब हैदराबाद में सोलर पावर के साथ मैदान में उतर चुकी है.

आपकी बैटरी में अब नमक है...लिथियम का मिला तोड़, पुणे के वैज्ञानिकों ने बनाई Salt Battery, समझिए कैसे करेगी काम?
Image Credit: नमक वाली देसी बैटरी

इलेक्ट्रिक गाड़ियों से लेकर स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल होने वाली बैटरी के लिए जिस लिथियम की समस्या होती है, उसका तोड़ आखिरकार भारत के वैज्ञानिकों ने निकाल लिया है. चीन और दूसरे देशों पर बैटरी के कच्चे माल के लिए निर्भर रहने की मजबूरी भारत के सामने से जल्द ही खत्म हो सकती है. पुणे की स्टार्टअप कंपनी ने देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी मेड इन इंडिया सोडियम-आयन बैटरी मार्केट में उतार दी है, जो न सिर्फ देश में बनी है बल्कि सोलर पावर से सीधे कमाल दिखाने के लिए भी तैयार है.

पुणे की स्टार्टअप कंपनी Rechargion Energy ने देश की पहली 1 kWh क्षमता की पूरी तरह स्वदेशी सोडियम-आयन बैटरी हैदराबाद में डिप्लॉय कर दी है. इसे कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री यानी CII के हैदराबाद स्थित गॉडरेज ग्रीन बिजनेस सेंटर में लगाया गया है. एनर्जी एफिशिएंसी समिट 2026 के दौरान कंपनी ने इस बात का ऐलान किया.

कैसे काम करती है यह तकनीक?

बैटरी का यह सेटअप बहुत ही अनोखा है. ग्रीन बिजनेस सेंटर की छत पर लगे सोलर पैनल्स इस 1 kWh की सोडियम बैटरी को दिनभर चार्ज करते हैं. सबसे खास बात यह है कि इसमें डीसी से एसी में बिजली बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ती. इससे बिजली का नुकसान यानी पॉवर लॉस बच जाता है और यह साफ दिखाता है कि आने वाले समय में कैसे सोलर और बैटरी मिलकर बिना किसी झंझट के काम कर सकते हैं.

क्यों खास है सोडियम-आयन बैटरी?

लिथियम के मुकाबले सोडियम पृथ्वी पर बहुत ज्यादा मात्रा में और आसानी से उपलब्ध है. इसके आने से भारत की निकेल, कोबाल्ट और इम्पोर्टेड लिथियम पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी.
रीचार्जियन के पास अपनी खुद की प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी है, जिसमें हार्ड-कार्बन एनोड का इस्तेमाल किया जाता है. कंपनी का दावा है कि इसकी वजह से बैटरी बहुत तेजी से चार्ज होती है, तापमान कितना भी ज्यादा हो यह सेफ रहती है और इसकी लाइफ भी काफी लंबी है. अगस्त 2025 में ही इस कंपनी की सोडियम-आयन सेल्स ने देश में सबसे पहले ARAI के कड़े सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पास किया था.

बैटरी में सोडियम यानी 'नमक' की भूमिका क्या है?

जैसे लिथियम-आयन बैटरी में चार्ज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम लिथियम आयन करते हैं, वैसे ही इस बैटरी में सोडियम आयन यह जिम्मेदारी निभाते हैं. जब बैटरी चार्ज होती है, तो सोडियम आयन कैथोड से निकलकर एनोड में चले जाते हैं, और डिस्चार्ज होने पर वापस आते हैं.

इलेक्ट्रोलाइट का हिस्सा

बैटरी के अंदर लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट में सोडियम सॉल्ट घुले होते हैं, जो इन आयनों को आपस में बहने और सर्किट पूरा करने का रास्ता देते हैं, जिससे बिजली पैदा होती है.

लिथियम का सस्ता और देशी विकल्प

लिथियम बहुत दुर्लभ और महंगा है, जो भारत को ज्यादातर विदेशों से आयात करना पड़ता है. इसके विपरीत, सोडियम धरती पर, समुद्र के पानी और नमक की खदानों में भरपूत मात्रा में मौजूद है. यही वजह है कि सोडियम के इस्तेमाल से बैटरी की लागत भारी मात्रा में कम हो जाती है और देश की निर्भरता दूसरे देशों पर खत्म हो सकती है.

2021 में हुई थी इस पहल की शुरुआत

पुणे की इस कंपनी की शुरुआत साल 2021 में CSIR-NCL की रिसर्च लैब से हुई थी. इसे जानी-मानी रिसर्चर डॉ. मंजूषा शेल्के, डॉ. विलास शेल्के और डॉ. जॉन रेमंड नॉर्टन ने मिलकर शुरू किया था. जून 2024 में इस कंपनी ने देश का पहला डेडिकेटेड सोडियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी शुरू किया था. कंपनी का मानना है कि भारत जैसी बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए अपनी खुद की सप्लाई चेन और लोकल मैन्युफैक्चरिंग वाली ऐसी टेक्नोलॉजी गेम-चेंजर साबित होगी, जिसे आने वाले समय में पूरी दुनिया में अपनाया जा सकेगा.

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About the Author

Udbhav Tripathi

Udbhav Tripathi

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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