AI से लिखा है या इंसान ने? ChatGPT का नया सिस्टम चंद सेकंड में खोल देगा पूरा राज, जानिए कैसे
अगर आप ChatGPT या दूसरे AI टूल्स से कंटेंट तैयार करते हैं, तो आपके लिए जरूरी खबर है. OpenAI अब AI से तैयार टेक्स्ट में ऐसा छिपा वॉटरमार्क जोड़ने जा रहा है, जिसे इंसान नहीं देख पाएंगे, लेकिन खास डिटेक्टर आसानी से पहचान सकेंगे.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल करने या फिर एआई की सहायता से कंटेंट तैयार करने वालों के लिए, जल्द ही बड़ा बदलाव दस्तक देने वाला है. AI की मदद से कंटेंट तैयार करने वालों का जल्दी ही एक-एक शब्द आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा. इसके लिए AI बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने खास तैयारी की है, जो आने वाले दिनों में डिजिटल कंटेंट की पूरी तस्वीर बदल सकती है. आइए जानते हैं क्या है ओपनएआई का यह नया प्लान और इसका आप पर क्या असर होगा.
ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI ने अपने टेक्स्ट में एक खास और छिपा हुआ वाटरमार्क जोड़ने की तैयारी कर ली है. कंपनी का यह नया सिस्टम आम इंसानों की आंखों से बिल्कुल नहीं दिखाई देगा, लेकिन इसके खास डिटेक्टर्स इसे आसानी से पकड़ लेंगे. फिलहाल इस नए सिस्टम को यूरोपियन यूनियन के नियमों को ध्यान में रखते हुए वहीं लॉन्च किया जा रहा है और बाकी दुनिया के लिए अभी कोई डेट फिक्स नहीं की गई है कि कब लॉन्च किया जाएगा.
कैसे काम करता है यह नया सिस्टम?
ओपनएआई के इस वाटरमार्क सिस्टम का नाम टेक्स्टग्रेन है. यह टेक्नोलॉजी कंटेंट के शब्दों के पैटर्न में हल्के बदलाव करके काम करती है. अभी तक के कई सिस्टम ऐसे हैं कि अगर उनसे कंटेंट लिखवाने के बाद कहीं और पेस्ट कर दिया जाए, तो चेक करने पर एआई कंटेंट नहीं पता चलता है. लेकिन, ओपनएआई के इस नए सिस्टम में इस परेशानी को भी दूर कर दिया गया है. कंपनी के अनुसार इस वाटरमार्क के आने से चैटजीपीटी की परफॉरमेंस या क्वालिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
यूजर और प्रॉम्प्ट की जानकारी नहीं मिलेगी
OpenAI के मुताबिक टेक्स्टग्रेन का मसकद यूजर को पहचानना नहीं है. डिटेक्टर यह नहीं बता पाएगा कि टेक्स्ट किस यूजर ने बनाया या इसके लिए कौन सा प्रॉम्प्ट इसके लिए प्रयोग किया. डिटेक्टर सिर्फ यह बता सकेगा कि दिए गए टेक्स्ट में वाटरमार्क मिला है या नहीं. यह तरीका Google DeepMind के SynthID टेक्स्ट सिस्टम जैसा है. Anthropic ने भी अपने Claude AI के लिए अगस्त में इसी तरह का वाटरमार्क सिस्टम पेश किया था.
हर AI टेक्स्ट पकड़ना आसान नहीं होगा
OpenAI ने इसके साथ ही यह भी कह दिया है कि नया डिटेक्शन सिस्टम हर स्थिति में पूरी तरह से सही AI टेक्स्ट को नहीं जान पाएगा. छोटे टेक्स्ट या ऐसे विषय जहां शब्दों के सेलेक्शन के चांस बहुत कम होते हैं या न के बराबर होते हैं, ऐसे जगहों पर वॉटरमार्क खोजना नए सिस्टम के लिए भी बहुतही मुश्किल भरा काम होगा.
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कंपनी के टेस्ट में 200 टोकन वाले मनोविज्ञान से जुड़े टेक्स्ट में करीब 80 फीसदी मामलों में वॉटरमार्क पहचाना गया. वहीं 400 टोकन वाले टेक्स्ट में यह आंकड़ा करीब 95 फीसदी रहा. गणित जैसे विषयों में डिटेक्शन इससे काफी कम रहा.
टेक्स्ट में बदलाव करने से भी वाटरमार्क कमजोर हो सकता है. OpenAI के एक टेस्ट में 400 टोकन वाले टेक्स्ट के करीब 10 फीसदी शब्दों को समान अर्थ वाले दूसरे शब्दों से बदलने पर पहचान की प्रतिशत 92 से कम होकर 66 फीसदी रह गई. 25 फीसदी शब्द बदलने पर यह दर सिर्फ 17 फीसदी रह गई. दूसरी भाषा में ट्रांसलेट करने के बाद वाटरमार्क खोजना बहुत मुश्किल हो जाता है.
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