भूल जाओ एप्पल और सैमसंग! केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान, सिर्फ दो साल में बाजार में आएगा भारत का अपना ब्रांडेड मोबाइल
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अक्टूबर 2028 तक भारत का अपना खुद का डिजाइन और टेक्नोलॉजी वाला स्मार्टफोन मार्केट में आ जाएगा.
भारत अब सिर्फ दूसरे ब्रांड्स के फोन अपने यहां बनाने तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि जल्द ही देश का अपना खुद का स्मार्टफोन ब्रांड दुनिया के सामने होगा. आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बड़ा और ऐतिहासिक ऐलान करते हुए अक्टूबर 2028 की डेडलाइन तय की है. इस देसी स्मार्टफोन में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सब कुछ भारत की अपनी होगी.
भारत का अपना एप्पल और सैमसंग मोमेंट होने वाला है तय
हाल ही में जब तीन लाख रुपये तक की कीमत वाला आईफोन डुओ देश में आउट ऑफ स्टॉक हो गया, तो यह साफ हो गया कि भारतीय बाजार में प्रीमियम स्मार्टफोट्स की कितनी जबरदस्त डिमांड है. इसी बीच आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बहुत बड़ा और दूरदर्शी बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि आने वाले दो सालों यानी अक्टूबर 2028 तक भारत के पास अपना खुद का होमग्रोन स्मार्टफोन ब्रांड होगा, जिसकी अपनी डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी होगी. यह देसी ब्रांड सीधे तौर पर एप्पल और सैमसंग जैसे ग्लोबल दिग्गजों को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है.
अक्टूबर 2028 की डेडलाइन और मंत्री का बड़ा ऐलान
दिल्ली में आयोजित एक समिट के दौरान आईटी मंत्री ने सभी को तारीख याद रखने की सलाह दी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अक्टूबर 2028 तक भारत के पास ऐसे मोबाइल फोन होंगे जिन्हें देश में ही डिजाइन किया जाएगा, देश में ही बनाया जाएगा और जिन पर भारत का अपना ब्रांड नेम होगा. आज के समय में जब भारत ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अपनी मजबूत पकड़ बना रहा है, तब किसी फोन की तकनीक और उसकी अपनी टेक्नोलॉजी तैयार करना एक बहुत बड़ा और चुनौतीपूर्ण काम माना जाता है, जिसे भारत अब पूरा करने जा रहा है.
स्मार्टफोन बनाना सिर्फ पुर्जे जोड़ना नहीं है
मंत्री ने इस बात पर भी रोशनी डाली कि एक बेहतरीन स्मार्टफोन तैयार करने में सिर्फ अलग-अलग पार्ट्स को आपस में जोड़ना शामिल नहीं होता है. एक सक्सेसफुल डिवाइस के लिए बेहतरीन हार्डवेयर, दमदार पावर मैनेजमेंट, शानदार कनेक्टिविटी और ऐसा सॉफ्टवेयर चाहिए जो अंदर की टेक्नोलॉजी के साथ स्मूथली काम कर सके. फोन के अंदर रेडियो-फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन, एंटीना, कंप्यूटिंग चिप, मेमोरी, कैमरे, डिस्प्ले और बैटरी जैसी तमाम चीजों को एक कॉम्पैक्ट बॉडी में फिट करना बहुत बड़ा इंजीनियरिंग चैलेंज होता है. भारत अब इन सभी बारीकियों में महारत हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
मदरबोर्ड डिजाइन में भारत ने पहले ही साबित कर दी अपनी काबिलियत
आईटी मंत्री ने बताया कि इस बड़े देसी स्मार्टफोन प्रोजेक्ट की नींव कई साल पहले ही रख दी गई थी जब सरकार ने देश के डिजाइनरों को मोबाइल फोन के लिए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड यानी पीसीबी डिजाइन करने की चुनौती दी थी. इस चैलेंज को देश की कंपनियों ने स्वीकार किया और एक बेहतरीन डिजाइन तैयार किया जिसे बाद में अमेरिका की एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी ने भी चुना. उस भारतीय कंपनी ने अमेरिकी ऑपरेटर के लिए 5-जी प्लस मोबाइल फोन डिजाइन करके डिलीट भी किया, जिससे यह साबित हो गया कि भारतीय कंपनियां ग्लोबल मार्केट में टक्कर लेने की पूरी क्षमता रखती हैं.
मेक इन इंडिया से बदली देश की मैन्युफैक्चरिंग तस्वीर
मंत्री ने साल 2014 में शुरू किए गए मेक इन इंडिया इनिशिएटिव की जमकर तारीफ की और कहा कि इसकी वजह से देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बहुत बड़ा सुधार आया है. उन्होंने बताया कि आज भारत में मोबाइल फोन से लेकर ड्रोन, मिसाइल और ट्रेनें तक बड़े पैमाने पर बनाई जा रही हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स आज भारत का तीसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट कैटेगरी बन चुका है और बहुत जल्द यह दूसरे स्थान पर पहुंच जाएगा. भारत का यह नया स्मार्टफोन प्रोजेक्ट इस दिशा में एक और बड़ा और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने वाला है.
ग्लोबल दिग्गजों को टक्कर देना आसान नहीं होगा
एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों के पास पूरी दुनिया में फैला हुआ बिजनेस इकोसिस्टम, मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और करोड़ों वफादार ग्राहक हैं. ऐसे में जब कोई नया भारतीय ब्रांड बाजार में उतरेगा, तो उसे ग्राहकों का भरोसा जीतने और अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी. अक्टूबर 2028 का यह टारगेट एक बड़ा विजन और महत्वाकांक्षा है, जो यह तय करेगा कि आने वाले दो सालों में देश की डिजाइन क्षमताएं किस तरह एक पॉपुलर कंज्यूमर ब्रांड के रूप में बदलती हैं.