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अब मिनटों में पकड़ा जाएगा AI वाला फोटो, वीडियो और ऑडियो, Google ने सबके लिए फ्री किया SynthID टूल, ऐसे करेगा काम

डीपफेक और AI जनरेटेड कंटेंट के बढ़ते खतरे के बीच गूगल ने अपना नया टूल SynthID टूल आम लोगों के लिए फ्री में जारी कर दिया है. अब यूजर मिनटों में यह पहचान सकेंगे कि कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो असली है या एआई का खेल.

Written By Udbhav Tripathi
Published: Oct 08, 2026, 12:12 PM IST | Updated: Oct 08, 2026, 12:21 PM IST
Image Credit: SynthID टूल
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सोशल मीडिया की दुनिया में कब क्या वायरल हो जाए और कौन सी फोटो या वीडियो असली है या नकली, यह पहचान पाना आज के समय में सबसे मुश्किल काम है. डीपफेक और AI जनरेटेड कंटेंट के दौर में लोग अक्सर भ्रम की स्थिति में रहते हैं कि सामने मौजूद तस्वीर या फिर वीडिया सच है या किसी मशीन से जनरेट किया गया है. इसी समस्या को दूरे करने के लिए टेक कंपनी गूगल ने बड़ी तैयारी कर ली है. Google ने अब SynthID टूल को आम लोगों के लिए जारी कर दिया है, जिसकी मदद से आप कुछ ही सेकंड में यह जान सकेंगे कि कोई वीडियो, फोटो या ऑडियो इंसान ने बनयाा है या फिर किसी AI टूल से तैयार किया गया है.

गूगल के इस टूल की हेल्प से यह भी जान सकेंगे कि कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो AI की मदद से बनाया गया है या उसमें AI के जरिए बदलाव किया गया है. SynthID Detector को इस्तेमाल करना फिलहाल फ्री है. लेकिन इसके लिए यूजर्स को Google, OpenAI या Apple अकाउंट से लॉगिन करना होगा.

Google का यह टूल खास इसलिए भी है क्योंकि यह सिर्फ गूगल के जेमिनी से बने कंटेंट तक ही सीमित नहीं रहेगा. ब्लकि कंपनी का कहना है कि यह दूसरे प्लेटफॉर्म पर बनाए गए कुछ AI कंटेंट को भी पहचान सकता है. इसमें OpenAI, Nvidia और Kakao के AI टूल से तैयार कंटेंट शामिल है. Apple के AI फीचर्स से बनाई गई तस्वीरों का सपोर्ट भी इस टूल में जल्द आने वाला है. गूगल के अनुसार Apple Intelligence से बनाई गई तस्वीरों की पहचान का फीचर जल्द जोड़ा जाएगा.

कैसे काम करता है SynthID

Google ने SynthID को AI से बनाए गए कंटेंट के लिए एक डिजिटल वॉटरमार्क सिस्टम के रूप में तैयार किया है. यह वॉटरमार्क फोटो, वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट में इस तरह जोड़ा जाता है कि आम तौर पर इंसानी आंखों से इसे देखा नहीं जा सकता.

जब कोई कंटेंट SynthID वॉटरमार्क के साथ तैयार किया जाता है, तो बाद में इसी डिजिटल निशान की मदद से उसकी पहचान करने की कोशिश की जाती है. यानी यूजर को सिर्फ कंटेंट देखकर अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती कि वह असली है या AI से बनाया गया है.

Google पहले भी SynthID के कुछ वर्जन पत्रकारों और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए उपलब्ध करा चुका है. अब कंपनी ने इसका वेब टूल आम यूजर्स के लिए भी खोल दिया है. इसके अलावा Google के Circle to Search फीचर के जरिए भी SynthID वॉटरमार्क और C2PA कंटेंट क्रेडेंशियल्स की जांच की जा सकती है.

हर AI कंटेंट की पहचान नहीं कर पाएगा टूल

लेकिन यहां एक ध्यान देने वाली बात यह है कि SynthID Detector को पूरी तरह सटीक AI चेकर मानना सही नहीं होगा. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अलग अलग कंपनियां AI कंटेंट की पहचान के लिए अलग तरह के वॉटरमार्क का प्रयोग करती हैं. अगर किसी कंटेंट में SynthID जैसा वॉटरमार्क मौजूद नहीं है, तो यह टूल उसे पहचानने में सक्षम नहीं भी हो सकता है. इसके साथ ही कुछ मामलों में यह बताना भी मुश्किल हो सकता है कि पूरा कंटेंट AI से तैयार किया गया है या सिर्फ उसके किसी हिस्से में AI की मदद ली गई है. टूल यह जानकारी भी हर बार नहीं दे पाएगा कि किसी फोटो, वीडियो या ऑडियो का कौन सा हिस्सा AI की मदद से बदला गया है.

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फिलहाल AI कंटेंट की पहचान के लिए कोई ऐसा एक सिस्टम नहीं है जो हर तरह के AI कंटेंट को भरोसे के साथ पकड़ सके. Meta भी अपने AI टूल्स से बनाए या बदले गए कंटेंट की पहचान के लिए अलग सिस्टम पर काम कर रहा है. आने वाले समय में अगर ज्यादा AI कंपनियां ऐसे वॉटरमार्क और पहचान सिस्टम को अपनाती हैं, तो इस तरह के डिटेक्शन टूल ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं.

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उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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