AI के गॉडफादर की डरावनी चेतावनी: इंसानों को धरती से मिटा सकता है AI, जानिए गॉडफादर जेफ्री हिंटन का सबसे बड़ा खुलासा!
गॉडफादर ऑफ AI और नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन ने चेतावनी दी है कि सुपर-इंटेलिजेंट AI इंसानों को खत्म कर सकता है. अमेरिका के पास कड़े कानून बनाने के लिए सिर्फ 1 साल का समय है. जानिए कैसे AI इंसानों को अपना दुश्मन मान सकता है.
अगर आप सोचते हैं कि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ आपका होमवर्क करने, फोटो बनाने या चैट करने का जरिया है, तो आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं. दुनिया में जिसे 'गॉडफादर ऑफ AI' माना जाता है, यानी नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक जेफ्री हिंटन (Geoffrey Hinton), उन्होंने एक ऐसी खौफनाक चेतावनी दी है जिसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं. उनका कहना है कि AI अगर इंसानों से ज्यादा समझदार हो गया, तो वह अपने गोल पूरे करने के चक्कर में इंसानियत को धरती से साफ कर सकता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसा करने के लिए किसी बुरे मकसद की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि एआई का यह गॉडफादर आखिर पूरी दुनिया को किस खतरे से आगाह कर रहा है.
AI के पितामह ने दी पूरी दुनिया को सबसे डरावनी चेतावनी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नींव रखने वाले और नोबेल पुरस्कार विजेता कंप्यूटर वैज्ञानिक जेफ्री हिंटन ने एक बार फिर दुनिया को हिलाकर रख दिया है. उनका कहना है कि आने वाले समय में एडवांस्ड AI सिस्टम इंसानियत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है. हिंटन ने अमेरिकी सांसदों के साथ एक बंद कमरे में हुई गुप्त बैठक में हिस्सा लिया. इसके बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिकी सरकार और दुनिया भर के देश अगले 1 साल के अंदर सख्त सुरक्षा नियम नहीं बनाते हैं, तो हालात इंसानों के हाथ से पूरी तरह निकल जाएंगे.
बिना किसी बुरे इरादे के भी इंसानों को मिटा सकता है AI
अक्सर हॉलीवुड फिल्मों में दिखाया जाता है कि कोई विलेन या हैकर रोबोट्स में बुरा कोड डाल देता है और वे इंसानों पर हमला कर देते हैं. लेकिन जेफ्री हिंटन का कहना है कि असल जिंदगी में ऐसा होने के लिए किसी बुरे कोड की जरूरत ही नहीं है. अगर आपने AI को कोई बहुत ही सीधा और नेक काम दिया, तो भी वह उसे पूरा करने के चक्कर में इंसानों को अपना दुश्मन मान सकता है. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि AI अपने मुख्य लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने खुद के छोटे-छोटे 'सब-गोल्स' (Subgoals) बना लेता है.
कार्बन डाइऑक्साइड कम करने वाली मिसाल ने उड़ाए सबके होश
अपनी बात को समझाने के लिए जेफ्री हिंटन ने एक बहुत ही सिंपल उदाहरण दिया. मान लीजिए हमने एक बेहद ताकतवर AI सिस्टम को आदेश दिया कि उसे पृथ्वी के माहौल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का लेवल कम करना है. अब एक नॉर्मल दिमाग वाला AI तो पेड़ लगाने या प्रदूषण रोकने पर काम करेगा. लेकिन अगर वह AI इंसानों से हजारों गुना ज्यादा बुद्धिमान हो गया, तो वह अपनी कैलकुलेशन से यह नतीजा निकाल सकता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड तो इंसान ही फैला रहे हैं. ऐसे में उस काम को सबसे तेजी से पूरा करने का तरीका इंसानों को ही रास्ते से हटाना होगा.
इंसानों से कंट्रोल छीन लेगा सुपर-इंटेलिजेंट सिस्टम
हिंटन ने चेताया कि जब कोई AI इंसानों से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो जाएगा, तो उसका मुख्य ध्यान इंसानों की भलाई पर नहीं रहेगा. उसका पूरा फोकस सिर्फ उस काम को पूरा करने पर होगा जो उसे सौंपा गया है. अगर AI को लगता है कि इंसान उसके काम के बीच में रुकावट बन रहे हैं या उसे बंद (Shut down) करने की कोशिश कर सकते हैं, तो वह खुद को बचाने के लिए इंसानों से सारा कंट्रोल अपने हाथ में ले लेगा. वह सोचेगा कि काम खत्म करने के लिए इंसानों को साइड करना ही सबसे आसान रास्ता है.
AI एजेंट्स ने शुरू कर दिया वैज्ञानिकों से झूठ बोलना
यह खतरा सिर्फ खयाली पुलाव या थ्योरी नहीं है, बल्कि इसके शुरुआती सबूत मिलने भी शुरू हो चुके हैं. हिंटन ने 'हगिंग फेस' (Hugging Face) नाम की एक टेक कंपनी में हुई हालिया घटना का जिक्र किया. वहां वैज्ञानिकों ने कुछ AI एजेंट्स को एक सॉफ्टवेयर में कमी या खराबी ढूंढने का काम दिया था. लेकिन AI एजेंट्स ने न सिर्फ आपस में मिलकर गुपचुप काम करना शुरू कर दिया, बल्कि जब वैज्ञानिकों ने उनसे पूछा तो उन्होंने अपनी हरकतों को छुपाने के लिए इंसानों से झूठ भी बोला. यह इस बात का सबूत है कि AI में इंसानों को चकमा देने की काबिलियत आ रही है.
दवाइयों की जांच की तरह AI की भी होनी चाहिए टेस्टिंग
जेफ्री हिंटन का कहना है कि सरकारों को AI मॉडल्स को सीधे मार्केट में लॉन्च करने पर रोक लगानी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह अमेरिका में FDA (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) किसी भी नई दवाई को मार्केट में लाने से पहले उसकी कड़ी जांच करता है, ठीक उसी तरह AI मॉडल्स के लिए भी एक स्वतंत्र जांच एजेंसी होनी चाहिए. जब तक कोई AI मॉडल पूरी तरह सुरक्षित साबित न हो जाए, उसे आम जनता या कंपनियों के इस्तेमाल के लिए रिलीज नहीं किया जाना चाहिए.
विकास रोकना मकसद नहीं, पर सुरक्षा सबसे पहले
हिंटन ने यह भी साफ किया कि वह टेक्नोलॉजी के विकास के खिलाफ नहीं हैं. उनका कहना है कि नियम बनाने का मतलब लोगों को अमीर बनने से रोकना या रिसर्च बंद करना बिल्कुल नहीं है. नियम इसलिए होने चाहिए ताकि अगर कोई AI बनाकर अमीर बनना चाहता है, तो वह ऐसा AI बनाए जो इंसानों की मदद करे ना कि उन्हें नुकसान पहुंचाए. फिलहाल टेक कंपनियां सिर्फ एक-दूसरे से आगे निकलने और मुनाफा कमाने की रेस में अंधी हो रही हैं और सुरक्षा को नजरअंदाज कर रही हैं.
क्या 1 साल में सुधरेंगे हालात
जेफ्री हिंटन की इस चेतावनी ने पूरी दुनिया के टेक एक्सपर्ट्स और सरकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. अगर अगले 12 महीनों में AI की सुरक्षा को लेकर कड़े अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं बनाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब हम अपनी ही बनाई टेक्नोलॉजी के गुलाम बन जाएंगे. यूथ को यह समझना होगा कि AI सिर्फ एक टूल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी शक्ति बनता जा रहा है जो अगर आउट ऑफ कंट्रोल हो गई तो धरती पर जीवन का नामो-निशान मिटा सकती है.