400 Volts का झटका देने आया लहसुन का छिलका! भारतीय वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला फ्री बिजली बनाने का तरीका
भारतीय वैज्ञानिकों ने लहसुन के बेकार छिलकों से 400 वोल्ट बिजली पैदा करके दुनिया को चौंका दिया है. जानिए कैसे इस वेस्ट मटेरियल से बना एक स्मार्ट होम सिक्योरिटी अलार्म जो बिना किसी बैटरी के काम करता है.
भारत के मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के टैलेंटेड वैज्ञानिकों ने लहसुन के छिलके का इस्तेमाल करके पूरे 400 वोल्ट तक की तगड़ी बिजली बना डाली है. सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने इस छिलके वाली बिजली से एक पूरा काम करता हुआ होम सिक्योरिटी सिस्टम भी चलाकर दिखा दिया है. तो चलिए आज के इस आर्टिकल में बहुत ही कूल और आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर लहसुन के इन छिलकों में ऐसा कौन सा सीक्रेट जादू छुपा हुआ है.
लहसुन के कचरे से लैब तक का सफर
आजकल पूरी दुनिया के सामने वेस्ट मैनेजमेंट यानी कचरे का सही ठिकाना लगाना एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन चुका है. रोज घरों और होटलों से हजारों टन सब्जियों और फलों का कचरा सीधे लैंडफिल या कूड़ेदान में डंप कर दिया जाता है. लहसुन के छिलके भी इसी कचरे का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैं जिन्हें कोई कभी नहीं पूछता. लेकिन एमएनआईटी के असिस्टेंट प्रोफेसर दीपक भारती और उनके पीएचडी स्टूडेंट मानस तिवारी ने इस कचरे को एक बिल्कुल नए और कूल नजरिए से देखा. उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसी चीज पर हाथ आजमाया जाए जो हर घर में आसानी से मिल जाती है, वजन में बेहद हल्की होती है और हमारे एनवायरनमेंट को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाती.
जब उन्होंने माइक्रोस्कोप से लहसुन के छिलके की बनावट को ध्यान से देखा, तो उन्हें पता चला कि इसकी सतह पर कई छोटी-छोटी और नेचुरल परतें होती हैं. साइंस की दुनिया में इस तरह की बनावट बिजली पैदा करने के लिए एकदम परफेक्ट मानी जाती है. इससे पहले भी ये दोनों साइंटिस्ट मूंगफली के छिलकों और गन्ने के वेस्ट पर अपनी रिसर्च कर चुके थे. लेकिन इस बार लहसुन के छिलके का जो रिजल्ट सामने आया, उसने सच में सबको हैरान कर दिया.
रगड़ से कैसे बनती है बिजली? जानिए इसकी एकदम सिंपल साइंस
अब आपके दिमाग में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि भला लहसुन के छिलके से भी कभी बिजली बन सकती है क्या. इसको समझने के लिए आपको फिजिक्स की कोई भारी-भरकम और बोरिंग किताबें पढ़ने की जरूरत बिल्कुल नहीं है. बचपन में हम सबने स्कूल के दिनों में प्लास्टिक के स्केल को अपने बालों में जोर से रगड़कर छोटे-छोटे कागज के टुकड़ों को अपनी तरफ खींचा ही होगा. बस समझ लीजिए कि यह पूरी तकनीक भी कुछ-कुछ वैसी ही मस्ती और साइंस पर काम करती है.
साइंस की भाषा में इस धांसू डिवाइस को ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर कहा जाता है. इसमें दो अलग-अलग चार्ज वाली चीजों को आमने-सामने रखा जाता है. इस एक्सपेरिमेंट में वैज्ञानिकों ने लहसुन के छिलकों के पाउडर (जिस पर पॉजिटिव चार्ज होता है) को एक पॉलिथीन की शीट (जिस पर नेगेटिव चार्ज होता है) के ऊपर बढ़िया से बिछा दिया.
जब ये दोनों लेयर आपस में रगड़ खाती हैं या दबने के बाद अलग होती हैं, तो इनके बीच से इलेक्ट्रॉन्स का तगड़ा आदान-प्रदान होता है. इसी लगातार मूवमेंट से बिजली का स्पार्क यानी वोल्टेज पैदा होने लगता है. इसके लिए आपको घर में कोई बड़ी इन्वर्टर बैटरी या बिजली का भारी कनेक्शन लगाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. बस दरवाजे का खुलना, फर्श पर आपके पैरों की आहट या थोड़ी सी भी हलचल इस सेंसर के लिए बिजली पैदा करने के लिए काफी है.
एक छोटे से छिलके से मिल गई 400 वोल्ट की भारी पावर
इस पूरी रिसर्च में सबसे ज्यादा चौकाने वाली चीज इसके फाइनल आंकड़े थे. जब वैज्ञानिकों ने लहसुन के छिलके की सिर्फ एक ही लेयर का इस्तेमाल किया, तो उससे लगभग 210 वोल्ट की बिजली पैदा हो गई. यह वोल्टेज उतना ही है जितना हमारे घरों के प्लग में नॉर्मल बिजली का करंट आता है.
इसके बाद जब उन्होंने पॉलिथीन शीट की दूसरी तरफ लहसुन के छिलके की एक और लेयर चिपका दी, तो वोल्टेज सीधा डबल होकर 400 वोल्ट तक पहुंच गया. हालांकि इसमें जो करंट यानी माइक्रोएम्पीयर्स बहता है, वह बहुत ही हल्का होता है. इस तरह की हाई वोल्टेज और लो करंट वाली बिजली का इस्तेमाल घर का एसी या फ्रिज चलाने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि इसका इस्तेमाल छोटे-छोटे स्मार्ट सेंसर्स और वायरलेस गैजेट्स को चलाने के लिए एकदम बेस्ट माना जाता है. सबसे मजेदार बात यह देखने को मिली कि जब वैज्ञानिकों ने दो से ज्यादा लेयर और बढ़ाने की कोशिश की, तो बिजली बढ़ना अचानक रुक गई. इस अनोखी पहेली पर अभी हमारे वैज्ञानिक और भी ज्यादा रिसर्च कर रहे हैं.
लहसुन के छिलके ने पकड़ लिया चोर! ऐसे बना डाला स्मार्ट अलार्म
लैब के अंदर बिजली बनाने के बाद रिसर्चर्स का अगला बड़ा टास्क यह साबित करना था कि क्या इस जुगाड़ का इस्तेमाल रियल लाइफ में भी हो सकता है या नहीं. इसके लिए उन्होंने लहसुन के छिलके वाले सेंसर से एक बहुत ही काम का होम सिक्योरिटी सिस्टम डिजाइन कर डाला.
उन्होंने इस पतले और छोटे से सेंसर को घर के मेन दरवाजे और उसकी चौखट के बीच में एकदम फिट कर दिया. जैसे ही कोई घर का दरवाजा खोलता है, सेंसर की दोनों लेयर आपस में अलग हो जाती हैं. इस मामूली सी हलचल से तुरंत बिजली का एक स्पार्क पैदा होता है, जो सीधे एक छोटे से माइक्रोकंट्रोलर और ब्लूटूथ मॉड्यूल को सिग्नल भेज देता है. यह ब्लूटूथ आपके स्मार्टफोन में डाउनलोड किए गए एक कस्टम एंड्रॉइड ऐप से कनेक्ट रहता है.
जैसे ही कोई दरवाजा खोलेगा, आपके फोन का ऐप तुरंत आवाज निकाल कर बता देगा कि भाई, दरवाजे पर कोई आया है या दरवाजा खुल गया है. इस पूरे स्मार्ट सेंसर को काम करने के लिए किसी भी एक्सटर्नल बैटरी या मेन बिजली के तार की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ी. लैब के अंदर जब इस सिस्टम का 50 बार टेस्ट किया गया, तो इसने लगभग 92 परसेंट बिल्कुल सही रिजल्ट दिए. सिर्फ किचन के वेस्ट कचरे से बने किसी गैजेट के लिए यह परफॉर्मेंस सच में नेक्स्ट लेवल है.
6 महीने बाद भी नहीं हुआ खराब, टिकने में भी एकदम सॉलिड
कई बार ऐसा होता है कि इस तरह के इको-फ्रेंडली और नेचुरल गैजेट्स कुछ ही दिनों में नमी पाकर सड़ जाते हैं या खराब हो जाते हैं. लेकिन लहसुन के छिलके से बने इस सेंसर ने अपनी ड्यूरेबिलिटी और मजबूती के मामले में भी सबको पूरी तरह चौंका दिया.
वैज्ञानिकों ने इस सेंसर को पूरे 6 महीने तक नॉर्मल कमरे के टेम्परेचर पर ऐसे ही रखा और बाद में इसे दोबारा चेक किया. छह महीने बीत जाने के बाद और लगभग 200 से ज्यादा बार लगातार दबाए जाने के बावजूद यह सेंसर बिल्कुल नए जैसा मक्खन की तरह काम कर रहा था. इसकी परफॉर्मेंस में ज़रा सी भी गिरावट देखने को नहीं मिली. इस शानदार टेस्ट से यह बात बिल्कुल साफ हो गई कि लहसुन का छिलका सिर्फ स्कूल या कॉलेज का कोई एक दिन का टेंपरेरी साइंस प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि इससे फ्यूचर के लिए एकदम सॉलिड और लंबे समय तक चलने वाले प्रोडक्ट्स बनाए जा सकते हैं. इस धमाकेदार रिसर्च को दुनिया के मशहूर इंटरनेशनल जर्नल 'IEEE Sensors Letters' में भी जगह मिल चुकी है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है.