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आजकल स्कैमर्स इतने शातिर हो चुके हैं कि उन्होंने बिल्कुल असली दिखने वाली फर्जी वेबसाइट्स, खतरनाक लिंक्स और लुभावने ऑफर्स का एक ऐसा मकड़जाल फैला रखा है जिसमें अच्छे-अच्छे समझदार लोग भी फंस जाते हैं. त्योहारों की भागदौड़ और इस बात की जल्दी में कि कहीं कोई बढ़िया डील हाथ से निकल न जाए, हम बिना सोचे-समझे किसी भी लिंक पर क्लिक कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि डिस्काउंट के चक्कर में लोग अपनी गाढ़ी कमाई और पर्सनल डेटा दोनों गंवा बैठते हैं. अगर आप भी इस फेस्टिव सीजन ऑनलाइन शॉपिंग करने का मन बना रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत जरूरी है. आइए बजानते हैं कि इन ऑनलाइन स्कैमर्स के झांसे से कैसे बचें और असली ऑफर्स की पहचान कैसे करें.

बम्पर डिस्काउंट और ऑफर्स जो सच होने के लिए बहुत अच्छे लगते हैं
जब आप सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहे होते हैं, तो अचानक आपको किसी ब्रांडेड स्मार्टफोन पर 70 या 80 प्रतिशत की छूट दिख जाती है. कोई महंगा गैजेट जो बाजार में पचास हजार का मिल रहा है, वो किसी नई साइट पर सिर्फ पांच हजार रुपए में मिलने का दावा किया जाता है. भाई, यहीं पर आपको सतर्क हो जाना चाहिए.
जेनुइन सेल में ब्रांड्स डिस्काउंट जरूर देते हैं, लेकिन कोई भी कंपनी अपना सामान लागत से भी कम कीमत पर नहीं बेचेगी. स्कैमर्स जानबूझकर ऐसे लुभावने और असंभव दिखने वाले डिस्काउंट रखते हैं क्योंकि उन्हें कभी सामान डिलीवर करना ही नहीं होता है. वे सिर्फ पैसे ऐंठकर गायब होने की फिराक में रहते हैं.
खरीदारी करने से पहले हमेशा उस प्रोडक्ट की कीमत को ब्रांड के ऑफिशियल स्टोर या किसी भरोसेमंद मार्केटप्लेस पर क्रॉस-चेक जरूर करें. इसके अलावा, वेबसाइट पर चलने वाले उल्टे टाइमर (Countdown timers) और 'केवल 3 आइटम बचे हैं' वाले पॉप-अप्स ज्यादातर फेक होते हैं, जो सिर्फ आपको जल्दबाजी में गलत फैसला लेने के लिए डराने के वास्ते बनाए जाते हैं.

वॉट्सएप पर आने वाले 'फ्री गिफ्ट' और लकी ड्रॉ वाले खतरनाक लिंक्स
कई बार हमारे पास वॉट्सएप या टेक्स्ट मैसेज पर बधाई संदेश आते हैं कि आपने किसी लकी ड्रॉ में आईफोन, सोने का सिक्का या कोई बड़ा शॉपिंग वाउचर जीत लिया है. मैसेज के साथ एक लिंक भी होता है जिस पर क्लिक करके गिफ्ट क्लेम करने को कहा जाता है.
सबसे मजेदार या कहें डरावनी बात यह होती है कि हमने कभी उस कॉन्टेस्ट में हिस्सा ही नहीं लिया होता है. फिर भी लालच या जिज्ञासा में लोग उस लिंक पर क्लिक कर देते हैं. वह लिंक आपको एक ऐसे फर्जी फॉर्म पर ले जाता है जहां आपका पूरा नाम, पता, क्रेडिट कार्ड डिटेल्स और छोटी सी 'शिपिंग फीस' मांगी जाती है.
याद रखिए, दुनिया में कोई भी कंपनी आपको फ्री में इनाम देने के लिए शिपिंग फीस या पैसे नहीं मांगती है. इसके अलावा, कभी भी किसी भी गिफ्ट या पैसे को पाने के लिए UPI PIN या OTP की जरूरत नहीं पड़ती है. अगर कोई पेज आपसे पिन या ओटीपी मांग रहा है, तो समझ लीजिए कि वो सीधा-सीधा आपकी जेब साफ करने का प्लान है. तुरंत उस टैब को बंद कर दीजिए.
कॉपीकैट वेबसाइट्स और फर्जी शॉपिंग ऐप्स का खेल
स्कैमर्स का सबसे बड़ा हथियार होती हैं नकली वेबसाइट्स. वे किसी मशहूर ई-कॉमर्स वेबसाइट का बिल्कुल हूबहू डुप्लीकेट पेज बना लेते हैं, जिसका वेब एड्रेस (URL) असली कंपनी से मिलता-जुलता होता है लेकिन स्पेलिंग में थोड़ा सा फेरबदल होता है. वे स्पेलिंग में कोई अक्षर बदल देते हैं या डोमेन नेम के पीछे कुछ अजीब सा जोड़ देते हैं.
किसी भी नई साइट से पेमेंट करने से पहले हमेशा उसके यूआरएल को ध्यान से चेक करें. इसके अलावा, वेबसाइट पर दिए गए 'Contact Us' पेज और रिटर्न पॉलिसी को जरूर पढ़ें. जो स्कैमर्स होते हैं उनकी साइट पर कोई ढंग का कस्टमर केयर नंबर नहीं होता और वे पेमेंट के लिए सिर्फ डायरेक्ट यूपीआई ट्रांसफर या बैंक ट्रांसफर का ऑप्शन देते हैं.
किसी भी अनजान लिंक से फोन में शॉपिंग ऐप डाउनलोड करने की गलती बिल्कुल न करें. हमेशा अपने फोन के ऑफिशियल Google Play Store या Apple App Store से ही ऐप्स इंस्टॉल करें, क्योंकि चैट में मिलने वाली एपीके (APK) फाइल्स आपके फोन का पूरा कंट्रोल चुरा सकती हैं और आपके सारे प्राइवेट मैसेज पढ़ सकती हैं.

फेक डिलीवरी और कस्टमर-केयर मैसेज का नया स्कैम
फेस्टिव सीजन में जब हम बहुत सारे पार्सल का इंतजार कर रहे होते हैं, तो स्कैमर्स इस बात का पूरा फायदा उठाते हैं. हमारे पास मैसेज आता है कि आपका पार्सल रास्ते में अटक गया है, और डिलीवरी पूरी करने के लिए आपको नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपना एड्रेस अपडेट करना होगा या मामूली सा चार्ज देना होगा.
इसके अलावा, कई बार लोग गूगल पर किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर ढूंढते हैं, और स्कैमर्स सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) या सोशल मीडिया के जरिए अपने फर्जी नंबर ऊपर ले आते हैं. जब आप उन नंबरों पर कॉल करते हैं, तो वे ऑर्डर ठीक करने के नाम पर आपके फोन में कोई स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवा लेते हैं या ओटीपी मांग लेते हैं.
याद रखें कि कोई भी असली कंपनी कभी भी फोन पर आपका यूपीआई पिन, ओटीपी या स्क्रीन-शेयरिंग एक्सेस नहीं मांगती है. अगर आपको अपने पार्सल को लेकर कोई भी कन्फ्यूजन है, तो हमेशा उस शॉपिंग ऐप के अंदर जाकर अपना ऑर्डर स्टेटस चेक करें, न कि किसी अनजान मैसेज के लिंक पर भरोसा करें.
फेस्टिव सीजन में सेफ शॉपिंग करने की कुछ स्मार्ट आदतें
त्योहारों के इस सीजन में खुद को और अपने परिवार को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए इन छोटी-छोटी बातों का हमेशा ध्यान रखें:
हमेशा ब्राउजर में जाकर खुद पूरा वेबसाइट एड्रेस टाइप करें या फिर ऑफिशियल ऐप का इस्तेमाल करें. किसी भी रैंडम मैसेज में आए लिंक पर क्लिक करने से बचें.
हमेशा प्लेटफॉर्म के ऑफिशियल चेकआउट सिस्टम का ही इस्तेमाल करें. डायरेक्ट किसी व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करने के मुकाबले क्रेडिट कार्ड या कैश ऑन डिलीवरी (COD) ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं.
किसी भी नई साइट से शॉपिंग करने से पहले उसके ऑनलाइन रिव्यू जरूर पढ़ें. ध्यान रखें कि आजकल बहुत से फर्जी पॉजिटिव रिव्यू भी चल रहे हैं, इसलिए मिले-जुले रिव्यू पढ़ें और देखें कि वे कब पोस्ट किए गए थे.
अपने सभी शॉपिंग अकाउंट्स पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन (Two-step verification) इनेबल करके रखें और हर अकाउंट का पासवर्ड अलग और मजबूत रखें.
अगर कोई डील आपको बहुत ज्यादा हड़बड़ी या प्रेशर महसूस कराए, तो पेमेंट करने से पहले एक बार ब्रांड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर उसे जरूर वेरीफाई कर लें.
अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए, तो क्या करें?
अगर कभी ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण समय आ जाए और आपको लगे कि आप किसी ऑनलाइन स्कैम का शिकार हो चुके हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत एक्शन लें.
सबसे पहले अपने बैंक को कॉल करके अपने क्रेडिट/डेबिट कार्ड या बैंक अकाउंट को तुरंत ब्लॉक करवा दें. इसके बाद उन सभी अकाउंट्स के पासवर्ड बदल लें जो आपने उस फर्जी साइट पर इस्तेमाल किए थे. अगर आपने कोई थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड की थी, तो उसे तुरंत फोन से अनइंस्टॉल कर दें.
भारत सरकार के नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाएं या तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं. जितनी जल्दी आप फ्रॉड की रिपोर्ट करेंगे, आपके पैसे को फ्रीज होने और वापस मिलने के चांस उतने ही ज्यादा बढ़ जाएंगे.
इस फेस्टिव सीजन एक सीधा सा नियम अपनाएं: अगर कोई डील सच होने के लिए बहुत अच्छी लग रही है, या आप उसे वेरीफाई नहीं कर पा रहे हैं, तो तुरंत वहां से पीछे हट जाएं. आपकी थोड़ी सी समझदारी आपके पैसों और आपकी शांति दोनों को बचा सकती है.