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सिर्फ Hey Neuralink सोचिए और शुरू हो जाएगा AI! एलन मस्क ने बताया अपने नए प्रोडक्ट Telepathy का कमाल

सोचिए, बिना स्मार्टफोन छुए और बिना कुछ बोले आपका AI हर काम करने लगे तो कैसा होगा? एलन मस्क की कंपनी Neuralink इसी सपने को हकीकत बनाने में जुटी है. कंपनी का Telepathy प्रोडक्ट सिर्फ सोचने भर से कंप्यूटर और AI से जोड़ने से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया है.

सिर्फ Hey Neuralink सोचिए और शुरू हो जाएगा AI! एलन मस्क ने बताया अपने नए प्रोडक्ट Telepathy का कमाल
Image Credit: Telepathy प्रोडक्ट

जरा सोचिए, अगर आपको अपना स्मार्टफोन टच भी न करना पड़े, कुछ भी बोलना भी न हो और मन में सोचते ही आपका काम हो जाए तो कैसा लगेगा? साइंस फिक्शन फिल्मों जैसा लगने वाला यह सपना हकीकत में होने जा रहा है. दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक एक ऐसा कमाल करने जा रही है, जहां सिर्फ हे न्यूरालिंक सोचने भर से AI आपके दिमाग से कनेक्ट हो जाएगा और आपके दिए निर्देशों पर काम करने लगेगा. मस्क ने इस प्रोडक्ट का नाम टेलीपैथी दिया गया है.  

क्या है Neuralink का Telepathy प्रोडक्ट?

एलन मस्क ने X पर बताया कि Neuralink के पहले प्रोडक्ट का नाम Telepathy रखा गया है. इसके जरिए लोग केवल सोचकर कंप्यूटर और दूसरे इंसानों से बातचीत कर सकेंगे. यानी जो बात आप कहना चाहते हैं, उसे बोलने या कीबोर्ड पर लिखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मस्क ने इस तकनीक की रफ्तार को लेकर भी बड़ी बात कही है. उनके मुताबिक, कुछ सालों में दिमाग से कंप्यूटर तक पहुंचने वाले संकेतों की रफ्तार इंसान के बोलने या टाइप करने की क्षमता से भी काफी ज्यादा हो सकती है.

मस्क ने अपने पोस्ट में लिखा है कि Neuralink का पहला प्रोडक्ट Telepathy है. यह केवल सोचने से कंप्यूटर या इंसानों के साथ तेज रफ्तार से बातचीत करने की सुविधा देता है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले सालों में इसकी मदद से विचारों को पहुंचाने की रफ्तार इंसान के बोलने और टाइप करने से कहीं आगे निकल सकती है.

क्या लकवे के बाद फिर काम करने लगेंगे हाथ-पैर?

मस्क की बातों में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात लकवे से जूझ रहे लोगों को लेकर है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि कुछ सालों में Neuralink ऐसी तकनीक बना सकेगी, जिससे दिमाग के उन हिस्सों के संकेत सीधे हाथों और पैरों तक पहुंचाए जा सकेंगे, जो शरीर की गतिविधियों और संवेदनाओं को कंट्रोल करते हैं. मस्क ने कहा कि मोटर और सेंसरी हिस्सों से मिलने वाले संकेतों को हाथ-पैरों तक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है. ऐसा होने पर कुछ ऐसे लोग फिर से अपने हाथों का इस्तेमाल कर सकेंगे और चल पाएंगे, जिनके लिए अभी यह संभव नहीं है.

लेकिन, अभी इसे भविष्य की योजना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. Neuralink ने इस तरह की सुविधा आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं कराई है. इसके सफल होने के लिए अभी काफी काम और टेस्ट बाकी हैं.

72 घंटे तक लगातार जुटी रही Neuralink की टीम

दूसरी तरफ, Neuralink ने अपने एक 72 घंटे के हैकाथॉन का वीडियो भी शेयर किया है. इसमें कंपनी के इंजीनियर दिमाग के संकेतों को समझने वाली तकनीक में नए फीचर जोड़ने पर काम करते नजर आ रहे हैं. इस दौरान खास तौर पर उन लोगों को ध्यान में रखा गया, जिन्हें बोलने में परेशानी होती है. टीम ने ऐसा Voice Activity Detection फीचर तैयार किया है, जो यह पहचान सकता है कि कोई व्यक्ति कब बोलने की कोशिश कर रहा है. इसकी खास बात यह है कि यूजर को बोलने की कोशिश करते समय बार-बार कोई बटन दबाने की जरूरत नहीं होगी. सिस्टम खुद समझने की कोशिश करेगा कि व्यक्ति कब अपनी बात कहना चाहता है.

टीम ने कुछ विजुअल टूल भी बनाए हैं. इनकी मदद से यूजर देख सकेंगे कि उनके दिमाग से निकलने वाले संकेत कितने मजबूत हैं और किस तरह के विचारों या गतिविधियों पर कौन से संकेत मिल रहे हैं. इससे Neuralink को यह समझने में मदद मिल सकती है कि यूजर आखिर कहना क्या चाहता है.

सोचकर ही एक्टिव होगा Grok AI

हैकाथॉन में एक और दिलचस्प फीचर पर काम हुआ. Neuralink ने ऐसे सिस्टम का शुरुआती वर्जन तैयार किया है, जिसके जरिए यूजर मन में Hey Neuralink कहकर Grok एजेंट को एक्टिव कर सकता है. इसके बाद वह जो काम करवाना चाहता है, उसके बारे में सोच सकता है. यानी आने वाले समय में AI से काम करवाने के लिए बोलने या फोन पर कुछ टाइप करने की जरूरत भी नहीं पड़ सकती है. यहां ध्यान देने वाली बात है कि अभी ये सभी फीचर टेस्टिंग के दौर में हैं. 

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About the Author

Udbhav Tripathi

Udbhav Tripathi

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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