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क्या आपने भी सुना था कि लकड़बग्घे शेरों का खाना चुराते हैं? ठहरिए, यह नई साइंटिफिक रिसर्च आपका दिमाग घुमा देगी

अफ्रीकी जंगलों में शेर और लकड़बग्घों की दुश्मनी पर हुई नई रिसर्च ने सालों पुराने भ्रम को तोड़ दिया है. GPS कॉलर्स और कैमरा ट्रैप्स के जरिए वैज्ञानिकों को पता चला है कि लकड़बग्घे नहीं, बल्कि बब्बर शेर उनका पीछा करते हैं.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Sep 17, 2026, 10:03 AM IST | Updated: Sep 17, 2026, 10:05 AM IST
Image Credit: Lion vs Hyena
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बचपन से हम नेशनल ज्योग्राफिक या टीवी शोज में देखते आए हैं कि लकड़बग्घे यानी हाइनाज बहुत चालाक होते हैं. वे शेरों के आसपास मंडराते हैं ताकि जैसे ही शेर शिकार करे, वे उसमें से अपना हिस्सा चुरा सकें. सदियों से वैज्ञानिक भी यही मानते आ रहे थे कि लकड़बग्घे ही शेरों का पीछा करते हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक नई वाइल्डलाइफ रिसर्च ने इस सालों पुरानी बात को पूरी तरह झुठला दिया है. अफ्रीका के जंगलों में GPS कॉलर्स और कैमरा ट्रैप्स की मदद से किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि असल में मामला बिल्कुल उल्टा है. जंगल में जब भी इन दोनों का सामना होता है, तो लकड़बग्घे दूर भागते हैं और बब्बर शेर यानी मेल लायन्स उनका पीछा करते हैं.

कैसे शुरू हुई यह अनोखी रिसर्च?
इस रिसर्च की अगुवाई साउथ अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वाजुलु-नटाल की इकोलॉजिस्ट नैन्सी बार्कर ने की है. नैन्सी जब अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई के दौरान भूरे रंग के लकड़बग्घों पर स्टडी कर रही थीं, तब उन्होंने कई बार देखा कि शेर लकड़बग्घों का पीछा कर रहे थे.

जब उन्होंने यह बात दूसरे एक्सपर्ट्स को बताई, तो सबने उनका मजाक उड़ाया. लोगों ने कहा कि वे उल्टा देख रही हैं और यह महज एक इत्तेफाक है. लेकिन नैन्सी को लगा कि दाल में कुछ काला जरूर है. इस बात की गहराई तक जाने के लिए उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर एक बड़ी रिसर्च शुरू की.

हाई-टेक गैजेट्स का लिया गया सहारा
जंगल के इस रहस्य को सुलझाने के लिए रिसर्चर्स ने नामीबिया के एटोशा नेशनल पार्क और बोट्सवाना के चोबे-लिण्यांती इलाके को चुना. उन्होंने 17 शेरों और 14 स्पॉटेड हाइनाज के गले में GPS और एक्सीलेरोमीटर वाले खास कॉलर्स बांध दिए. इसके अलावा जंगल में जगह-जगह नाइट विजन कैमरा ट्रैप्स भी लगाए गए. 

यह पूरी स्टडी 4 साल तक चली. इन GPS कॉलर्स से हर 5 मिनट में जानवरों की लोकेशन का डेटा मिलता था. वैज्ञानिकों ने करीब 3,49,163 GPS लोकेशंस का बारीक विश्लेषण किया ताकि यह समझा जा सके कि जब दोनों जानवर आसपास होते हैं तो कौन किस तरफ जाता है.

GPS डेटा से सामने आया चौंकाने वाला सच
जब इस पूरे डेटा की जांच की गई, तो वैज्ञानिकों के होश उड़ गए. डेटा से साफ पता चला कि 2 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की दूरी से ही लकड़बग्घे शेरों से दूर भागने लगते थे. 

लगभग हर मामले में लकड़बग्घों ने शेरों से दूरी बनाना ही बेहतर समझा. वहीं दूसरी ओर, बब्बर शेरों का व्यवहार इसके बिल्कुल उलट था. तीन में से हर बार बब्बर शेर यानी मेल लायन्स लकड़बग्घों की तरफ बढ़ते हुए और उनका पीछा करते हुए पाए गए. हालांकि फीमेल लायन्स यानी शेरनियों में यह ट्रेंड थोड़ा अलग था. वे अपने झुंड के हिसाब से फैसला लेती थीं.

रात के अंधेरे में होता था असली खेल
वैज्ञानिकों ने जब अपने कैमरों और नाइट विजन चश्मों से रात के वक्त जंगल का जायजा लिया, तो GPS डेटा की पुष्टि हो गई. रात में बब्बर शेर चुपके-चुपके लकड़बग्घों की लोकेशन ट्रैक कर रहे थे और उनके पीछे-पीछे चल रहे थे. वहीं लकड़बग्घे जैसे ही शेर की गंध पाते या उसे देखते, वे चुपचाप वहां से खिसक लेते थे. इससे यह साफ हो गया कि जंगल में पावर का असली गेम कौन खेल रहा है.

बब्बर शेर क्यों करते हैं लकड़बग्घों का पीछा?
अब सवाल यह उठता है कि जंगल का राजा बब्बर शेर आखिर लकड़बग्घों के पीछे क्यों पड़ता है? वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके दो बड़े कारण हो सकते हैं. पहला कारण यह कि लकड़बग्घे शिकार करने में बहुत माहिर होते हैं. कई बार बब्बर शेर खुद शिकार करने की मेहनत से बचने के लिए लकड़बग्घों के शिकार को छीनने की फिराक में रहते हैं. दूसरा कारण इलाका और वर्चस्व है. बब्बर शेर अपने इलाके में किसी दूसरे बड़े शिकारी की मौजूदगी पसंद नहीं करते, इसलिए वे लकड़बग्घों को डराकर भगाने के लिए उनका पीछा करते हैं.

जंगल के इकोसिस्टम के लिए क्या हैं इसके मायने?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नई खोज का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि लकड़बग्घे कभी शेरों का खाना नहीं चुराते. इसका असली मतलब यह है कि इन दो बड़े शिकारियों के बीच का रिश्ता उतना सीधा नहीं है जितना हम समझते थे. जब भी यह दोनों आमने-सामने होते हैं, तो ताकत का संतुलन हमेशा शेरों के पक्ष में झुका रहता है. इस तरह का व्यवहार इन दोनों प्रजातियों को एक ही जंगल में एक साथ रहने में मदद करता है.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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