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चीन ने इंटरनेट की दुनिया में तहलका मचाते हुए डेटा ट्रांसमिशन का एक ऐसा नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला है जिसके आगे आज का सुपरफास्ट 5G और वाई-फाई भी बच्चों का खेल लगने लगेगा. चीन के कुछ सबसे बड़े टेक इंस्टीट्यूट्स और ऑप्टिकल कंपनियों ने मिलकर एक तगड़ा वेंचर शुरू किया था. इसमें नेशनल की लेबोरेटरी ऑफ ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड नेटवर्क, पेंगचेंग लेबोरेटरी और फाइबरहोम फुजिकुरा जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल थीं. इन सबने मिलकर एक स्पेशल 24-कोर ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए 3.2 पेटाबिट्स प्रति सेकंड (Pb/s) की रफ्तार से डेटा ट्रांसफर करके पूरी दुनिया को चौंका दिया है.
क्या है पेटाबिट?
यह डेटा की एक बहुत ही भारी-भरकम मात्रा है. इस भयंकर स्पीड का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसकी मदद से सिर्फ एक सेकंड के अंदर 20 हजार से ज्यादा 4K क्वालिटी की फिल्में डाउनलोड की जा सकती हैं. सोचिए, जितनी देर में आप अपने फोन की स्क्रीन पर स्क्रॉल करते हैं, उतनी देर में तो पूरी हार्ड डिस्क भरकर फिल्में आपके पास आ जाएंगी.
सिर्फ एक साल में 30 परसेंट की छलांग
इस पूरी कहानी का सबसे मजेदार ट्विस्ट यह है कि चीन की इसी रिसर्च टीम ने कुछ महीने पहले ही 2.5 पेटाबिट्स प्रति सेकंड की रफ्तार का रिकॉर्ड बनाया था. लेकिन इन लोगों ने रुकना नहीं सीखा. महज 12 महीने के अंदर यानी एक साल से भी कम वक्त में इन्होंने अपनी परफॉर्मेंस को सीधे 30 प्रतिशत तक बढ़ा लिया. इससे साफ पता चलता है कि टेक की दुनिया में चीन कितनी तेजी से आगे भाग रहा है. अगर यह तकनीक आने वाले वक्त में आम लोगों के इस्तेमाल के लिए मार्केट में आ गई, तो इंटरनेट इंडस्ट्री का पूरा गेम ही बदल जाएगा.
आम इंसान की जिंदगी पर इसका क्या असर होगा
जब यह टेक्नोलॉजी कमर्शियल होकर हम जैसे आम यूजर्स तक पहुंचेगी, तो इंटरनेट की दुनिया की हर परेशानी हमेशा के लिए गायब हो जाएगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस 3.2 पेटाबिट्स प्रति सेकंड की क्षमता से एक साथ करीब 32 लाख घरों में सुपरफास्ट गीगाबिट स्पीड वाला ब्रॉडबैंड कनेक्शन चलाया जा सकता है.
यह रफ्तार आज के हमारे आम इंटरनेट कनेक्शन से करीब 32 लाख गुना ज्यादा तेज है. यानी यूट्यूब वीडियो देखते वक्त वो गोल-गोल घूमने वाला बफरिंग का चक्कर हमेशा के लिए इतिहास बन जाएगा. आप कोई भी भारी-भरकम गेम या फाइल डाउनलोड पर लगाएंगे और वो बिना एक सेकंड गंवाए तुरंत डाउनलोड हो जाएगी.
टेक्नोलॉजी के रास्ते में क्या थीं मुश्किलें
जब साइंटिस्ट इस 24-कोर केबल पर काम कर रहे थे, तो उनके सामने सबसे बड़ी मुसीबत यह थी कि इतनी सारी कोर के अंदर से जो सिग्नल्स एक साथ गुजर रहे थे, वो आपस में मिलकर करप्ट न हो जाएं. यानी एक का डेटा दूसरे में घुसकर कचरा न कर दे. इसके अलावा, अलग-अलग फ्रीक्वेंसी बैंड्स (जैसे एस, सी और एल बैंड) के नखरे और उनके काम करने के तरीकों को एक साथ संभालना भी किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं था. लेकिन चीन के इंजीनियर्स ने इन सभी मुश्किलों को पार करते हुए एक शानदार रास्ता निकाल लिया.
इस 3.2 पेटाबिट्स वाले सेटअप को उन हार्डवेयर पार्ट्स के साथ तैयार किया गया है जिन्हें आसानी से रियल दुनिया में इस्तेमाल किया जा सके. इससे पहले भी दुनिया भर की कई यूनिवर्सिटीज ने लैब के अंदर इससे भी ज्यादा स्पीड के दावे किए थे, लेकिन उनके लिए ऐसे अजीबोगरीब और महंगे इक्विपमेंट्स की जरूरत पड़ती है जिन्हें आम दुनिया या ऑफिसों में लगाना नामुमकिन सा है. इसके उलट, चीन का यह नया सेटअप बिल्कुल प्रैक्टिकल है और आने वाले कल में यही तकनीक हमारे घरों, ऑफिसों और शहरों के मेन इंटरनेट नेटवर्क्स की रीढ़ बनने वाली है.