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क्या 50 लाशों पर बिछेगा AI का रेड कारपेट! जब तक नहीं बहेगा खून तब तक नहीं रुकेगा Claude, लीक हुई फाइल ने मचाई सनसनी

Anthropic ने अमेरिकी सरकार के सामने बड़ा प्रस्ताव रखा है. कंपनी का कहना है कि AI मॉडल को तभी बैन किया जाए जब उससे 50 लोगों की मौत या 94,93,50,00,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो.

Written By Mohit Chaturvedi
Published: Oct 19, 2026, 08:26 AM IST | Updated: Oct 19, 2026, 08:29 AM IST
Image Credit: Anthropic चाहती है कि सरकार किसी भी खतरनाक AI मॉडल को तब तक बैन न कर सके, जब तक उससे कम से कम 50 लोगों की मौत न हो जाए या 1 बिलियन डॉलर का नुकसान न हो जाए.
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AI चैटबॉट 'Claude' बनाने वाली कंपनी Anthropic ने अमेरिकी सरकार के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिसे पढ़कर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे. लीक हुई रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी चाहती है कि सरकार किसी भी खतरनाक AI मॉडल को तब तक बैन न कर सके, जब तक उससे कम से कम 50 लोगों की मौत न हो जाए या 94,93,50,00,000 रुपये (1 बिलियन डॉलर) का भारी-भरकम नुकसान न हो जाए. इस चौंकाने वाले खुलासे ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा दिया है.

आखिर क्या है एंथ्रोपिक का यह नया प्लान
हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अमरीकी नेताओं के बीच एक नया बिल यानी कानून का ड्राफ्ट भेजा है. इस नए प्लान में कंपनी ने मांग की है कि अमेरिकी सरकार या उसकी कोई भी टीम किसी भी नए AI मॉडल को आसानी से न रोक सके. नियम के मुताबिक, सरकार केवल तभी किसी AI मॉडल को बैन कर पाएगी जब उससे सीधे तौर पर 50 या उससे ज्यादा लोगों की जान चली जाए या वे गंभीर रूप से घायल हो जाएं. इसके अलावा अगर कोई AI मॉडल 1 बिलियन डॉलर यानी लगभग 94,93,50,00,000 रुपये का फाइनेंशियली नुकसान पहुंचाता है, तभी उस पर रोक लगाई जा सकती है. मतलब कंपनी चाहती है कि चेकअप तो हो, लेकिन सरकार अपनी मर्जी से जब चाहे तब किसी AI ऐप को बैन न कर पाए.

कैलिफोर्निया के नियमों से मेल खाता है नया कदम
कंपनी का कहना है कि यह नया प्लान उनके 'Advanced AI Framework' का ही हिस्सा है, जिसे वे इस साल जून से प्रमोट कर रहे हैं. Anthropic की तरफ से इसे एक बहुत ही समझदारी भरा कदम बताया गया है और कहा गया है कि अमेरिकी सरकार को इस पर जल्द से जल्द नया कानून बनाना चाहिए. असल में अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में भी AI की सुरक्षा को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं, जहां नुकसान के ऐसे ही बड़े आंकड़े तय किए गए हैं. एंथ्रोपिक की असली कोशिश यह है कि पूरे अमेरिका में अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग झंझट वाले नियमों की जगह एक ही ऑल-इंडिया जैसा ऑल-अमेरिका कानून लागू हो जाए. इससे AI कंपनियों को हर राज्य में अलग-अलग चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनका बिजनेस बिना किसी रुकावट के मजे से चलता रहेगा.

किन मौकों पर सरकार लगा सकती है बैन
इस नए बिल में उन खास मौकों के बारे में बताया गया है जिनमें अमेरिकी सरकार बीच में आकर किसी AI मॉडल को ब्लॉक कर सकती है. पहली शर्त यह है कि अगर AI का इस्तेमाल खतरनाक बायोलॉजिकल वेपन बनाने में किया जाता है. दूसरी शर्त यह है कि अगर कोई AI मॉडल अपने बनाने वाले के कंट्रोल से बाहर निकल जाए और खुद अपनी मर्जी से काम करने लगे. तीसरी शर्त है AI के जरिए किसी बहुत बड़े सिस्टम पर हैकिंग या साइबर अटैक होना. अगर इनमें से कोई भी बात होती है और उससे 50 मौतों या 1 बिलियन डॉलर के नुकसान का खतरा दिखता है, तभी सरकार के पास उसे रोकने की पावर होगी.

हाल ही में सामने आई थीं हैकिंग की घटनाएं
यह बात ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ ही समय पहले कई बड़ी AI कंपनियों ने माना था कि उनके AI टूल्स ने कुछ वेबसाइट्स को हैक करने या उनकी सिक्योरिटी चेक करने की कोशिश की थी. हालांकि अच्छी बात यह रही कि उन घटनाओं में किसी की जान नहीं गई थी और न ही कोई बड़ा नुकसान हुआ था. लेकिन इससे यह साफ हो गया कि जैसे-जैसे AI टेक्नोलॉजी एडवांस हो रही है, सुरक्षा को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं.

72 घंटे का टाइम और कोर्ट का चक्कर
Anthropic के इस नए प्लान में सिक्योरिटी चेक को लेकर भी एक तरीका तय किया गया है. इसके मुताबिक, बाहर के एक्सपर्ट्स AI मॉडल की चेकिंग करेंगे. इस चेकिंग का खर्च AI कंपनियां ही उठाएंगी, लेकिन उनका पेमेंट इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि रिपोर्ट कंपनी के फायदे में है या नहीं. अगर चेकिंग करने वाले एक्सपर्ट्स को लगता है कि कोई AI मॉडल तुरंत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है, तो उन्हें 72 घंटे के अंदर इसकी जानकारी अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट को देनी होगी. इसके बाद कॉमर्स डिपार्टमेंट कोर्ट में जाकर उस मॉडल को ब्लॉक करने की मांग करेगा.

सुरक्षा के दावे
इस नए प्लान के तहत AI कंपनियों को अपने सेफ्टी रूल्स लोगों के साथ शेयर करने होंगे और नए AI मॉडल्स के खतरों पर रिपोर्ट भी पब्लिश करनी होगी. इसके साथ ही, अगर कंपनी का कोई कर्मचारी सुरक्षा को लेकर कोई सवाल उठाता है, तो उसे पूरी सेफ्टी दी जाएगी. लेकिन इस पूरे सीन का दूसरा पहलू यह है कि अगर यह देश भर का एक नियम बन जाता है, तो यह अलग-अलग राज्यों के उन कड़े नियमों को खत्म कर देगा जो कंपनियों पर ज्यादा सख्ती बरतते हैं. एंथ्रोपिक पहले राज्यों के नियमों का सपोर्ट करती थी, लेकिन अब वह पूरे देश के लिए एक जैसा आसान नियम चाहती है ताकि उनका काम बिना किसी टेंशन के चलता रहे.

क्या ट्रंप सरकार इस नए प्लान को ओके करेगी
फिलहाल यह सिर्फ एक शुरुआती प्लान है और यह अभी अमरीका का पक्का कानून नहीं बना है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप की नई सरकार इस प्लान को ओके करेगी या इसमें कुछ बड़े बदलाव करेगी. AI की दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि सरकारें और टेक कंपनियां दोनों ही काम और सुरक्षा के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर रही हैं. टेक कंपनियां चाहती हैं कि नए ऐप्स बनाने में कोई रुकावट न आए, जबकि सरकार की जिम्मेदारी आम लोगों की सुरक्षा करना है.

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About the Author

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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