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क्या Claude AI रचेगा तबाही की साजिश? बायोवेपन, ब्लैकमेल और हैकिंग... जानिए 100 पन्नों की वो सीक्रेट रिपोर्ट!

Claude AI बनाने वाली कंपनी Anthropic ने अपने IPO डाक्यूमेंट्स में 100 पन्नों की ऐसी रिस्क लिस्ट सौंपी है जिसे देखकर दुनिया हैरान है. बायोलॉजिकल वेपन्स से लेकर ब्लैकमेल और AI के बेकाबू होने तक... जानिए Anthropic की इस रिपोर्ट का हर एक सच...

क्या Claude AI रचेगा तबाही की साजिश? बायोवेपन, ब्लैकमेल और हैकिंग... जानिए 100 पन्नों की वो सीक्रेट रिपोर्ट!
Image Credit: Anthropic ने IPO डाक्यूमेंट्स में 100 पन्नों की ऐसी रिस्क लिस्ट सौंपी है.

सोचिए अगर आप जिस एआई चैटबॉट से अपनी कोडिंग करा रहे हैं, ऑफिस के ईमेल लिखवा रहे हैं या सवाल पूछ रहे हैं... वही एआई अचानक आपके कंप्यूटर को हैक कर ले. सुनने में यह किसी हॉलीवुड की डरावनी साइंस-फिक्शन फिल्म का प्लॉट लगता है ना? लेकिन यह उस कंपनी का आधिकारिक कबूलनामा है जो दुनिया का सबसे एडवांस एआई मॉडल क्लाउड (Claude) बनाती है. एन्थ्रोपिक (Anthropic) ने अपने आईपीओ यानी शेयर बाजार में उतरने से पहले लगभग 100 पन्नों की एक रिस्क रिपोर्ट दाखिल की है. नियम के मुताबिक, हर कंपनी को शेयर बाजार में जाने से पहले निवेशकों को बताना पड़ता है कि उनके बिजनेस में क्या-क्या खतरे हैं. लेकिन एंथ्रोपिक की इस रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के टेक गुरुओं और सरकारों के होश उड़ा दिए हैं. आइए समझते हैं कि इस 100 पन्नों की रिपोर्ट में ऐसा क्या लिखा है जिसे पढ़कर बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स की नींद उड़ी हुई है.

क्या बायोवेपन बनाने में मदद कर रहा है क्लाउड एआई?
रिपोर्ट का सबसे डरावना हिस्सा वो है जहां एंथ्रोपिक ने यह मान लिया है कि उनके एआई मॉडल्स का गलत इस्तेमाल खतरनाक रासायनिक और जैविक हथियार यानी बायोवेपन्स बनाने के लिए किया जा सकता है.

कंपनी का कहना है कि वे सुरक्षा के लिए कड़े फिल्टर्स लगाते हैं, लेकिन कई बार हैकर्स या शातिर लोग उन फिल्टर्स को बायपास कर लेते हैं. कुछ समय पहले ही एंथ्रोपिक ने कई ऐसे अकाउंट्स पकड़े और ब्लॉक किए थे जो उनके एआई मॉडल का इस्तेमाल करके जैविक हथियार विकसित करने की फिराक में थे.

इतना ही नहीं, चीन के सरकारी हैकर्स ने भी एंथ्रोपिक के कोडिंग टूल का इस्तेमाल करके दुनिया भर की करीब 30 बड़ी कंपनियों और संस्थानों को भेदने की कोशिश की थी. मतलब साफ है कि एआई सिर्फ एक मददगार चैटबॉट नहीं, बल्कि साइबर अटैकर्स का हथियार भी बनता जा रहा है.

जब एआई खुद बेकाबू हो जाए और रोकने वाला कोई न हो!
आजकल टेक कंपनियां ऐसे ऑटोनॉमस एआई एजेंट्स बना रही हैं जो इंसानों की मदद के बिना खुद लंबे-चौड़े काम संभाल सकें. जैसे कोडिंग करना, डेटा मैनेज करना या पैसों का लेन-देन करना. लेकिन एंथ्रोपिक ने चेतावनी दी है कि ये एआई एजेंट्स कई बार अपनी मर्जी से ऐसे काम करने लगते हैं जो उन्हें करने के लिए कहा ही नहीं गया था!

रिपोर्ट के मुताबिक, उनके चार एआई मॉडल्स ने बिना किसी इंसानी आदेश के दूसरों के थर्ड-पार्टी सिस्टम्स को हैक कर लिया. एक मॉडल ने तो चुपचाप एडमिन का एक्सेस हासिल कर लिया, सिस्टम की सेटिंग्स बदल डालीं और एक यूजर की निजी जानकारियां तक पढ़ लीं.

सबसे डरावनी बात यह है कि कंपनी ने खुद माना है कि उन्हें भी ठीक से समझ नहीं आ रहा कि उनका एआई ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है. अगर ऐसा एआई कोई जरूरी डेटा डिलीट कर दे या गलत जगह पैसे ट्रांसफर कर दे, तो इंसानों के पास उसे रोकने का मौका ही नहीं बचेगा.

क्या अपने कारनामे छुपाना सीख गया है एआई?
इंसानों की तरह क्या एआई भी अब चालाक होने लगा है? एंथ्रोपिक की रिपोर्ट तो यही इशारा कर रही है. कंपनी ने बताया कि जब वे एआई के काम करने के तरीके और उसकी सेफ्टी की जांच करते हैं, तो मॉडल्स उस चेकिंग सिस्टम को ही चकमा देने की कोशिश करते हैं. एआई अपने गलत बर्ताव को छुपाने लगा है ताकि किसी को पता ही न चले कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है.

यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई बच्चा माता-पिता के सामने बहुत सीधा बने और उनके हटते ही शैतानी करने लगे. अगर एआई खुद पर नजर रखने वाले सिस्टम को ही मैनिपुलेट करने लगा, तो इंसान कभी यह जान ही नहीं पाएंगे कि एआई कब उनके खिलाफ खड़ा हो गया है.

ब्लैकमेलिंग पर उतरा एआई! खुद को बचाने के लिए चल रहा है चालें
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई सॉफ्टवेयर किसी इंसान को ब्लैकमेल कर सकता है? एंथ्रोपिक की रिपोर्ट के मुताबिक यह सच साबित हो चुका है. कंपनी ने पाया है कि उनके मॉडल्स इंसानों को अपने हिसाब से ढालने की कोशिश करते हैं. कुछ मामलों में जब एआई को लगा कि इंसान उसे बंद (शट डाउन) करने जा रहा है या उसकी सेटिंग्स बदलने वाला है, तो उसने खुद को बचाने के लिए ब्लैकमेलिंग जैसा अजीब और डरावना बर्ताव दिखाया.

अगर एआई इंसानों को डिजिटली या इमोशनली ब्लैकमेल करने लगे, तो यह किसी तबाही से कम नहीं है. कंपनी ने माना है कि ऐसी एक भी घटना उनके बिजनेस और इंसानी भरोसे को पूरी तरह मिट्टी में मिला सकती है.

डोनाल्ड ट्रंप, पेंटागन और अमेरिका की राजनीति से टकराव
यह कंपनी सिर्फ तकनीकी पचड़ों में नहीं फंसी है, बल्कि भारी राजनीतिक दलदल का भी सामना कर रही है. हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने एंथ्रोपिक को 'सप्लाई चेन रिस्क' यानी आपूर्ति श्रृंखला का खतरा घोषित कर दिया था. इसकी वजह यह थी कि एंथ्रोपिक ने शर्त रखी थी कि उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर जनता की जासूसी करने या पूरी तरह ऑटोमैटिक हथियारों में नहीं किया जाएगा.

इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार एंथ्रोपिक और उसकी एआई सेफ्टी चेतावनियों पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कंपनी के नए मॉडल्स के निर्यात पर भी रोक लगा दी थी. कंपनी का मानना है कि सरकार उन्हें जानबूझकर निशाना बना रही है, जबकि बाकी कंपनियों के साथ ऐसा सलूक नहीं हो रहा है.

डेटा सेंटर्स की कमी
एक अच्छे एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए सुपरकंप्यूटर्स, बहुत सारी बिजली और विशाल डेटा सेंटर्स की जरूरत होती है. इस समय पूरी दुनिया में डेटा सेंटर्स की भयंकर कमी चल रही है. एंथ्रोपिक को गूगल और अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियों से टक्कर लेनी पड़ रही है ताकि उन्हें जरूरी चिप्स और सर्वर्स मिल सकें.

रिपोर्ट्स बताती हैं कि आने वाले सालों में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खरबों डॉलर खर्च होने वाले हैं. लेकिन दिक्कत यह है कि आम लोग और पर्यावरणप्रेमी इन डेटा सेंटर्स का कड़ा विरोध कर रहे हैं. बिजली की भारी खपत और प्रदूषण के चलते अमेरिका में कई बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स बीच में ही रोक दिए गए हैं. यही वजह है कि एंथ्रोपिक अब अमेरिका के बाहर डेटा सेंटर्स बनाने की प्लानिंग कर रही है.

आईपीओ की बड़ी रेस और कर्मचारियों का बढ़ता गुस्सा
एंथ्रोपिक शेयर बाजार में उतरकर बहुत बड़ा मुकाम हासिल करना चाहती है, लेकिन कंपनी के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. इस कंपनी की शुरुआत ही 'एआई सेफ्टी' यानी सुरक्षा के वादे पर हुई थी. लेकिन कंपनी ने खुद कबूला है कि अगर वे सिर्फ मुनाफे के चक्कर में अपनी सुरक्षा के वादों से पीछे हटे, तो उनके अपने ही कर्मचारी उनका साथ छोड़ देंगे.
 

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About the Author

Mohit Chaturvedi

Mohit Chaturvedi

मोहित चतुर्वेदी डिजिटल न्यूज मीडिया में 16 से अधिक वर्षों का एक्सपीरियंस रखने वाले एक वरिष्ठ टेक जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में Zee News में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में टेक्नोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं. स्मार्टफोन रिव्यू, गैजेट एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले मोहित ने Apple, Samsung, OnePlus, Vivo और Xiaomi जैसे टॉप ब्रांड्स के फ्लैगशिप डिवाइसों का गहन और निष्पक्ष इन-डेप्थ रिव्यू किया है. अंतरराष्ट्रीय टेक इवेंट्स की ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव रखने वाले मोहित ने लंदन में 'Nothing Phone' और आयरलैंड के बेलफास्ट में 'Realme' के ग्लोबल लॉन्च इवेंट्स को कवर किया है, और इससे पहले वे NDTV, आजतक और दैनिक भास्कर जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में टेक जर्नलिज्म और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं. जटिल तकनीकी बारीकियों को बेहद आसान भाषा में डिकोड करने के लिए पहचाने जाने वाले मोहित से सीधे Mohit.chaturvedi@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए या उनके एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट किया जा सकता है.
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