3 भारतीय लड़कों का कमाल...Claude को हथियार बनाकर पकड़ी OpenAI की बड़ी खामी, 72 घंटे में जीते 5.5 लाख
भारतीय मूल के तीन युवाओं ने कमाल का काम किया है. इस काम के बदले उन्हें OpenAI ने 6.2 लाख रुपये का इनाम दिया. इस कमाल को उन्होंने Claude AI के जरिए पूरा किया. आइए जानते हैं पूरा मामला...
आज के दौर में ऑनलाइन सुरक्षा कितनी जरूरी है, यह बात किसी से छिपी नहीं है. इसी बीच भारतीय मूल के 3 युवाओं ने AI की दुनिया में एक दिलचस्प कारनामा कर दिखाया है. इन्होंने एंथ्रोपिक के Claude AI का सहारा लेकर चैटजीपीटी (ChatGPT) बनाने वाली दिग्गज कंपनी OpenAI के सिस्टम में सेंध लगाई और एक बड़ी खामी बताकर करीब 6 लाख रुपये का इनाम हासिल कर लिया.
इस कमाल की शुरुआत एक पब्लिक फोरम की छोटी सी खामी से हुई थी, लेकिन देखते ही देखते ये लड़के कंपनी के प्राइवेट कर्मचारी अकाउंट्स तक जा पहुंचे. तीनों ने साबित कर दिया कि अगर तेज दिमाग के साथ AI की ताकत मिल जाए, तो क्या कुछ नहीं हो सकता.
कोई साइबर हमला नहीं, बग-बाउंटी में लिया था हिस्सा
सबसे पहले यह जान लीजिए कि जिन्होंने यह कमाल किया, वे तीनों साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर हैं. इन्होंने कोई गलत नीयत से हैकिंग नहीं की थी, बल्कि OpenAI के आधिकारिक 'बग-बाउंटी' प्रोग्राम में हिस्सा लिया था. बग-बाउंटी ऐसा मुकाबला होता है, जहां टेक कंपनियां एथिकल हैकर्स को बुलाती हैं ताकि वे सिस्टम की कमजोरियां ढूंढ सकें. इसके बदले कंपनियां उन्हें मोटा इनाम देती हैं.
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों रिसर्चर्स ने OpenAI के कर्मचारियों के अकाउंट से लेकर उनके सबसे सुरक्षित प्राइवेट डेटा (गिटहब) तक पहुंच बना ली. खामी ढूंढने से लेकर सिस्टम के अंदर घुसने तक का यह पूरा खेल सिर्फ 72 घंटे में खत्म हो गया.
कौन हैं ये तीनों भारतीय रिसर्चर्स?
इस कारनामे को अंजाम देने वाली टीम में हर्ष जैसवाल, मोहन पेढपति और राहुल मैनी शामिल हैं. इन तीनों का अपना एक स्टार्टअप है 'हैक्ट्रॉन एआई' (Hacktron AI). मोहन पेढपति इस कंपनी के सीटीओ और को-फाउंडर हैं. हर्ष जैसवाल भी कंपनी के को-फाउंडर हैं, जबकि राहुल मैनी बग बाउंटी और पेनिट्रेशन टेस्टिंग के जाने-माने एक्सपर्ट हैं.
पब्लिक फोरम से शुरू हुआ खेल
रिसर्चर्स को सबसे पहले OpenAI के पब्लिक कम्युनिटी फोरम में एक बड़ा लूपहोल दिखा. यह खामी खास तरह की इमेज फाइल्स को प्रोसेस करने के दौरान सामने आई. रिसर्चर्स ने समझा कि इस रास्ते से फोरम के सर्वर पर अनचाहा कोड चलाया जा सकता है. यहीं पर उन्होंने Claude AI का सहारा लिया. क्लॉड की मदद से उन्होंने कोड तैयार किया, उसे डिबग किया और पूरा एक्सप्लॉइट बना डाला.
प्राइवेट गिटहब तक जा पहुंची टीम
कहानी सिर्फ फोरम तक सीमित नहीं रही. रिसर्चर्स ने इस लूपहोल को आगे बढ़ाया, तो उन्हें सिस्टम में दूसरी बड़ी कमजोरी हाथ लगी. इसके जरिए वे लॉगिन टोकन का इस्तेमाल कर OpenAI के कर्मचारियों के अकाउंट्स तक पहुंच गए. इसके बाद टीम ने एक कर्मचारी के 'Codex' अकाउंट के जरिए OpenAI के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले प्राइवेट गिटहब (GitHub) एनवायरमेंट का रास्ता भी तलाश लिया.
क्या Claude AI ने खुद सिस्टम हैक किया?
इस मामले में सबसे अहम बात यह समझना है कि क्लॉड ने अपने आप OpenAI को हैक नहीं किया. दिमाग, रणनीति और कड़ियों को जोड़ने का काम रिसर्चर्स का ही था. Claude AI ने सिर्फ एक सुपरफास्ट असिस्टेंट की तरह काम किया, यानी कोडिंग और टेस्टिंग के घंटों के काम को कुछ ही मिनटों में समेट दिया.
इस पूरी टेस्टिंग के दौरान Claude AI के टोकन्स पर रिसर्चर्स के करीब 2.5 लाख रुपये खर्च हुए. बाद में OpenAI ने अपनी कमियों को तुरंत सुधारा और खुश होकर इन तीनों युवाओं को 6,500 डॉलर यानी करीब 6 लाख रुपये का इनाम थमा दिया.
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