भारतीय क्रिकेट में टैलेंट की खान है, कई बार इसका खामियाजा टीम इंडिया के कोच और कप्तान को भी भुगतना पड़ता है. हेड कोच गौतम गंभीर के लिए वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन में किसी एक को चुनने का एक फैसला 'आगे कुआं, पीछे खाईं' जैसा हो गया है. वैभव ने आईपीएल में एंट्री के बाद महज 15 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का दरवाजा पीट-पीटकर जुलाई में इंडिया डेब्यू किया. आईपीएल 2026 में टॉप स्कोरर थे और पिछली इंडिया सीरीज में 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का खिताब जीता. इसके बावजूद वैभव सूर्यवंशी को अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में मौका नहीं मिला. आखिर क्यों गंभीर ने सैमसन को चुना और इस फैसले के पीछे कितनी वजह थीं, आइए समझतेहैं.
एक सवाल ये भी है, कि जब अर्शदीप को यश ठाकुर रिप्लेस कर सकते हैं, सैमसन को सूर्यवंशी क्यों नहीं. यश ठाकुर का भी डेब्यू जिम्बाब्वे के खिलाफ जुलाई में हुआ था. उन्होंने 2 मैच में 4 ही विकेट लिए थे. इस हिसाब लेकिन उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ आखिरी टी20 मुकाबले में मौका मिल गया और प्लेइंग-XI से अर्शदीप बाहर रहे. इस तर्क को देखें तो वैभव को भी आखिरी मैच में खिलाया जा सकता था.
संजू को क्यों नहीं दिया गया आराम?
संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा स्थापित खिलाड़ी हैं, लेकिन उन्हें रेस्ट देकर वैभव को मौका क्यों नहीं मिला. सैमसन पहले मैच में फ्लॉप थे, लेकिन दूसरे में फिफ्टी ठोककर वह अभिषेक के सामने रोड़ा बन गए. उन्होंने दूसरे टी20 में महज 22 गेंद में फिफ्टी ठोकी थी. इसके बाद तीसरे मुकाबले में भी लगातार दूसरा अर्धशतक ठोका. बात करें रेस्ट की, तो जुलाई में सैमसन को रेस्ट देकर वैभव को जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू कराया गया था. ऐसे में रेस्ट के तुरंत बाद वापसी कर रहे संजू को फिर बाहर बिठाना भी एक सवाल छोड़ जाता. हालांकि, अगर संजू फ्लॉप होते तर्क देकर वैभव को मौका दिया जा सकता था.
क्या डर रहे गंभीर?
वैभव सूर्यवंशी अभी महज 15 साल के हैं और मैनेजमेंट उनके साथ जल्दबाजी भी नहीं करना चाहेगा. वैभव इस तरह की फॉर्म में हैं, कि अगर उन्हें मौका मिलता और बल्ले से कोई रिकॉर्डतोड़ पारी आती तो उन्हें बाहर करना मुश्किल हो जाता. सैमसन के करियर पर भी तलवार लटक सकती थी. चूंकि वैभव के पास अभी बहुत समय है, ऐसे में जब तक सैमसन के प्रदर्शन का ग्राफ नहीं गिरता, उन्हें बेवजह ड्रॉप करना बेतुका फैसला होगा. गौतम गंभीर ने भी सैमसन का टीम के लिए योगदान गिनाते हुए वैभव के ड्रॉप होने करने पर खुलकर बात की.
| खिलाड़ी (Player) | रन (Runs) | पारियां (Innings) |
|---|---|---|
| विराट कोहली (Virat Kohli) | 14,218
| 413
|
| रोहित शर्मा (Rohit Sharma) | 12,531
| 459
|
| शिखर धवन (Shikhar Dhawan) | 9,797
| 331
|
| सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) | 9,729
| 347
|
| संजू सैमसन (Sanju Samson) | 9,027
| 334 |
क्या बोले गौतम गंभीर?
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा, "वैभव के नजरिए से देखें तो बात बिल्कुल साफ है, कि उन्हें अपने मौके का इंतजार करना होगा. हम जानते हैं कि उनमें कितना टैलेंट है. हमें पता है, कि वह क्या कर सकते हैं. लेकिन फिर भी, जिसने कई सालों से बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, उसे तरजीह मिलेगी. अभी-अभी टीम में आया है, जब भी उन्हें मौका मिलेगा, उन्हें भी लंबे समय तक खेलने का मौका दिया जाएगा."
गंभीर के लिए मुश्किल था फैसला
उन्होंने आगे कहा, "भारतीय क्रिकेट का यही मतलब है. हम कॉम्पिटिशन चाहते हैं, हम ड्रेसिंग रूम में टैलेंट चाहते हैं. लेकिन कभी-कभी क्रिकेट में ऐसा ही होता है, चाहे 15 साल का खिलाड़ी हो या 30 साल का आपको मौके का इंतजार करना ही पड़ता है. ये सबसे मुश्किल फैसला होता है."
एक सीरीज के बाद बुरे नहीं बनते प्लेयर्स
संजू सैमसन के साथ ये पहली बार नहीं है, जब उनके कॉम्पटीशन में कोई खड़ा है. कई प्लेयर्स आए, जिनके चलते उन्हें बाहर बैठना पड़ा. एक समय ऋषभ पंत के चलते सैमसन को मौके नहीं मिले. उनके करियर में उतार-चढ़ाव देखने को सालों से मिला. लेकिन अब टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद काया पलट चुकी है. सैमसन प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे, क्योंकि उन्होंने बड़े मुकाबलों में जीत दिलाई है. गंभीर ने सैमसन का सपोर्ट किया और कहा कि कोई भी खिलाड़ी एक सीरीज में बुरा नहीं बन जाता और वह टी20 वर्ल्ड कप के कॉम्बिनेशन के साथ ही आगे जाना चाहते थे.
इंग्लैंड टूर पर सैमसन को करना पड़ा था ड्रॉप
गंभीर ने सैमसन पर आगे कहा, "मुझे लगता है कि सैमसन ने दिखा दिया कि वह क्या कर सकते हैं. कोई बिना टैलेंट के वर्ल्ड कप में 'प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट' नहीं बनता, इसलिए उन्होंने काफी कुछ किया है. जाहिर है, यह मुश्किल था, शायद मेरे कोचिंग करियर का सबसे मुश्किल फैसला उन्हें उस इंग्लैंड सीरीज से बाहर करना था, क्योंकि उससे पहले उन्होंने जैसा प्रदर्शन किया था. लेकिन फिर, कभी-कभी आपको खिलाड़ियों की फॉर्म को भी देखना पड़ता है. मेरे नजरिए से, मैं उसी कॉम्बिनेशन के साथ वापस जाना चाहता था जो वर्ल्ड कप के दौरान था, क्योंकि तीन या चार बार नाकाम होने से वे खिलाड़ी बुरे नहीं हो जाते. अगर कोई टीम एक वर्ल्ड कप से दूसरे वर्ल्ड कप तक बिना हारे जाती है और वर्ल्ड कप जीतती है, तो अचानक एक सीरीज के बाद वे बुरे खिलाड़ी नहीं बन जाते."