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दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन का सामना साउथ जोन से हो रहा है. चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में खेले जा रहे मुकाबले में भारत के स्टार विकेट कीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने शानदार दोहरा शतक जड़कर महफिल लूट ली. ईस्ट जोन की कप्तानी कर रहे ईशान ने 334 गेंदों का सामना करते हुए 270 रन बनाए. हालांकि, वो दलीप ट्रॉफी के इतिहास में ट्रिपल सेंचुरी जड़ने वाले स्पेशल सूची में अपनी जगह नहीं बना सके. दलीप ट्रॉफी में अब तक सिर्फ दो बल्लेबाजों के नाम तिहरा शतक जड़ने का रिकॉर्ड दर्ज है. इस लिस्ट में एक ऐसे बल्लेबाज का नाम शामिल है, जिसने क्रिकेट के मैदान पर ही दम तोड़ दिया था. सिर पर गेंद लगने के कारण उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी.
दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अब तक सिर्फ दो बल्लेबाजों ने तिहरा शतक ठोका है. रमन लांबा ने 1987 में ये कारनामा किया था, जबकि 2001 में गगन खोड़ा ने 300 रन के मिल के पत्थर को छुआ था. दलीप ट्रॉफी में सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड रमन लांबा के नाम है. उन्होंने नॉर्थ जोन की तरफ से खेलते हुए फाइनल में वेस्ट जोन के खिलाफ 320 रनों की मैराथन पारी खेली थी.
किसने सोचा था कि दलीप ट्रॉफी में 320 रन बनाकर क्रिकेट के मैदान पर ऐतिहासिक कारनामा करने वाले रमन लांबा की जान इसी क्रिकेट के मैदान पर चली जाएगी. 20 फरवरी, 1998 का वो मनहूस दिन, जब ये दर्दनाक हादसा हुआ और क्रिकेट जगत में मातम छा गया. रमन लांबा बांग्लादेश के ढाका में स्थित बंगबंधु स्टेडियम में एक क्लब मैच खेल रहे थे.
ढाका प्रीमियर लीग में अबाहनी क्रीड़ा चक्र के लिए खेलते हुए, कप्तान ने रमन लांबा को फॉरवर्ड शॉर्ट लेग (बल्लेबाज के बेहद नजदीक) पर फील्डिंग के लिए बुलाया. ओवर की केवल 3 गेंदें बची थीं, इसलिए उन्होंने हेल्मेट पहनने से मना कर दिया. इस गलती ने उनकी जिंदगी छीन ली. बल्लेबाज मेहराब हुसैन ने एक शॉर्ट डिलीवरी पर जोरदार पुल शॉट खेला. गेंद सीधे रमन लांबा के माथे पर जाकर लगी. चोट इतनी जोरदार थी कि उनके सिर से टकराकर गेंद विकेटकीपर के हाथों में चली गई और बल्लेबाज आउट हो गया.
चोट लगने के बाद रमन लांबा ने वहां मौजूद बांग्लादेशी खिलाड़ी अमीनुल इस्लाम से कहा था- "बुली, मैं तो मर गया". शुरुआत में चोट उतनी गंभीर नहीं लगी और वे खुद चलकर ड्रेसिंग रूम तक गए. लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, उन्हें दौरे पड़ने लगे और वे कोमा में चले गए. अस्पताल में डॉक्टरों ने उनके दिमाग से खून का थक्का हटाने के लिए सर्जरी भी की, लेकिन दिमाग में अत्यधिक ब्लीडिंग हो चुकी थी. हादसे के तीन दिन बाद, 23 फरवरी 1998 को मात्र 38 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया.

रमन लांबा ने 1986 में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया था. हालांकि, वो सिर्फ 4 टेस्ट खेल सके. उन्होंने भारत के लिए 32 ODI भी खेले और इंटरनेशनल क्रिकेट में 885 रन बनाए. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वो उतने सफल नहीं हो सके, इसलिए उन्होंने डोमेस्टिक क्रिकेट और बांग्लादेश में क्लब मैचों पर फोकस किया. वे फ़र्स्ट-क्लास क्रिकेट में लगातार अच्छा स्कोर करने वाले खिलाड़ी रहे, जिसमें दो तिहरे शतक और रणजी ट्रॉफ़ी में 53 का औसत शामिल है. महज 38 साल की उम्र में फील्डिंग के दौरान सिर पर गेंद लगने की वजह से उनकी दर्दनाक मौत हो गई.
इस दुखद घटना के बाद पूरी दुनिया में क्रिकेटरों की सुरक्षा को लेकर नियम कड़े किए गए और बल्लेबाज के नजदीक खड़े होने वाले फील्डरों के लिए हेल्मेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया.