'पाकिस्तान ने टेस्ट क्रिकेट का किया अपमान...' नासिर हुसैन का बड़ा आरोप, किसे जमकर लताड़ा?
पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज में सैम अयूब की वापसी पर नासिर हुसैन ने बड़ा सवाल उठाया है. नासिर हुसैन ने वीरेंद्र सहवाग का उदाहरण देते हुए एक बयान दिया है.
इंग्लैंड के दौरे पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम को लगातार शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है. लीड्स और लॉर्ड्स में खेले गए पहले दो टेस्ट मैचों में बुरी तरह हार झेलने के बाद पाकिस्तान की टीम बर्मिंघम में जारी तीसरे टेस्ट में भी शिकस्त की कगार पर है. बता दें कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट से पहले पाकिस्तानी टीम के सात खिलाड़ियों को बाहर कर दिया था. इसके साथ ही पांच ऐसे खिलाड़ियों को मौका दिया गया, जिन्होंने अभी तक टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू नहीं किया था.
इतना ही नहीं, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने सैम अयूब और अब्दुल्ला फजल को भी टीम में वापस बुला लिया. यह बदलाव सीरीज के तीसरे टेस्ट के लिए किए गए, जिसका नतीजा अब सीरीज पर कोई असर नहीं डालने वाला था. तीसरे टेस्ट से पहले कप्तान बाबर आजम ने कहा था कि सीरीज गंवाने के बाद पाकिस्तान के पास अब खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है. ऐसे में टीम के खिलाड़ियों से खुलकर और बिना दबाव के खेलने की उम्मीद है.
इंग्लैंड दौरे पर कटी पाकिस्तान की नाक
हालांकि, PCB के अचानक किए गए बदलावों पर सवाल भी उठे. रिपोर्ट्स और टीम के भीतर से सामने आए बयानों के मुताबिक, बाबर आजम ने भी संकेत दिया कि उन्हें इन बदलावों से पहले सलाह-मशविरा नहीं किया गया था. PCB के इस बड़े फैसले से टीम की किस्मत बदलने की उम्मीद थी, लेकिन मैदान पर कहानी बिल्कुल अलग नजर आई. तीसरे टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान की टीम सिर्फ 133 रन पर ऑलआउट हो गई, वह भी महज 34 ओवर के अंदर.
नासिर हुसैन ने किसे जमकर लताड़ा?
इस प्रदर्शन ने एक बार फिर पाकिस्तान की बल्लेबाजी और सेलेक्शन प्रोसेस पर सवाल खड़े कर दिए. सैम अयूब को लेकर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और मशहूर क्रिकेट कमेंटेटर नासिर हुसैन ने सेलेक्शन पर गंभीर सवाल उठाया. सैम अयूब तीसरे टेस्ट से पहले कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) में खेल रहे थे और उन्हें वहां से सीधे पाकिस्तान की टेस्ट टीम में बुलाया गया.
सैम अयूब का चयन सही फैसला नहीं
नासिर हुसैन का तर्क था कि सैम अयूब ने लंबे समय से फर्स्ट-क्लास क्रिकेट तक नहीं खेला है. इसके बावजूद उन्हें इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में टेस्ट मैच खेलने के लिए उतार दिया गया. नासिर हुसैन के मुताबिक, सैम अयूब का चयन सही फैसला नहीं था. उन्होंने कहा कि खिलाड़ी विदेशी परिस्थितियों में एक अलग फॉर्मेट खेलकर आया और उसे तुरंत इंग्लैंड में ड्यूक्स गेंद के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में उतार दिया गया.
नासिर हुसैन ने यह भी याद दिलाया कि सैम अयूब ने अपना पिछला फर्स्ट-क्लास मुकाबला अक्टूबर 2025 में खेला था. ऐसे में टेस्ट क्रिकेट की सबसे कठिन परिस्थितियों में उन्हें सीधे उतारना जोखिम भरा फैसला था. नासिर हुसैन ने केवल चयन पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि इससे भी कड़ी टिप्पणी की. उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट को इस तरह हल्के में नहीं लिया जा सकता.
टेस्ट क्रिकेट सबसे कठिन फॉर्मेट
नासिर हुसैन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट किसी भी क्रिकेटर के लिए सबसे कठिन फॉर्मेट है और इंग्लैंड में टॉप ऑर्डर पर बल्लेबाजी करना उससे भी बड़ी चुनौती है. ऐसे में दुनिया के किसी दूसरे हिस्से से खिलाड़ी को अचानक बुलाकर इस परिस्थिति में उतार देना टेस्ट क्रिकेट के प्रति उचित रवैया नहीं है.
मैदान पर भी सैम अयूब इस फैसले को सही साबित नहीं कर सके. तीसरे टेस्ट की दोनों पारियों में वह अपना खाता तक नहीं खोल पाए. यानी जिस खिलाड़ी को टीम में बड़े बदलाव के बीच वापस बुलाया गया था, वह बल्लेबाजी में कोई प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा. इससे नासिर हुसैन की चयन संबंधी चिंताएं और ज्यादा चर्चा में आ गईं.
वीरेंद्र सहवाग का दिया उदाहरण
नासिर हुसैन ने अपनी बात समझाने के लिए भारतीय टीम के दिग्गज ओपनर वीरेंद्र सहवाग का उदाहरण भी दिया. उन्होंने याद दिलाया कि साल 2011 में इंग्लैंड दौरे के दौरान वीरेंद्र सहवाग को चार टेस्ट मैचों की सीरीज के बीच भारत से बुलाया गया था. वीरेंद्र सहवाग तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में मैदान पर उतरे थे. हालांकि, वह उस मुकाबले की दोनों पारियों में खाता नहीं खोल सके थे.
नासिर हुसैन ने कहा कि वीरेंद्र सहवाग, सैम अयूब से कहीं ज्यादा अनुभवी और बेहतर टेस्ट बल्लेबाज थे, फिर भी इंग्लैंड में अचानक पहुंचकर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा. नासिर हुसैन के मुताबिक, जब वीरेंद्र सहवाग जैसे अनुभवी बल्लेबाज के साथ ऐसा हो सकता है, तो सैम अयूब जैसे खिलाड़ी से तुरंत सफल होने की उम्मीद करना कितना सही है, यह बड़ा सवाल है.