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'कंगाली में आटा गीला' ये कहावत पाकिस्तान की टेस्ट टीम पर पूरी तरह से फिट बैठती है. पहले ही टीम की जीत के लाले पड़े हैं, ऊपर से आईसीसी ने स्लो ओवर रेट के चलते टीम के 11 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) अंक काट लिए हैं. इस फटके के बाद WTC प्वाइंट्स टेबल में टीम फिसड्डी बन चुकी है. वहीं, 10 साल पहले के आंकड़े उठाकर देखें तो पाकिस्तान की टेस्ट क्रिकेट में बादशाहत देखने को मिलती थी. साल 2016 में मिस्बाह उल हक की कप्तानी वाली पाकिस्तान टीम नंबर-1 टेस्ट टीम थी. हम पाकिस्तान के इसी अर्श से फर्श तक के सफर के बारे में बात करने जा रहे हैं, आखिर क्यों पाकिस्तान क्रिकेट टीम टेस्ट से लुप्त होती नजर आ रही है?
हाल ही में पाकिस्तान ने इंग्लैंड के खिलाफ 3 टेस्ट की सीरीज खेली, लेकिन जीत आस-पास भी नहीं थी. टीम को 0-3 से हार का सामना करना पड़ा था. WTC प्वाइंट्स टेबल में पाकिस्तान टीम 9 मैचों में सिर्फ 5 अंक और 4.63 अंक प्रतिशत हासिल कर पाए हैं. हालांकि, मुद्दा सिर्फ इस सीरीज में हार नहीं है, बल्कि पिछले 4 साल से पाकिस्तान का ग्राफ हर टेस्ट से गिर रहा है.
साल 2022 की शुरुआत से पाकिस्तान की टेस्ट फॉर्मेट में हार जीत के आंकड़े उठाकर देखें, तो पाकिस्तान को सिर्फ 8 जीत नसीब हुई हैं. 33 टेस्ट मैच में टीम को 21 बार हार का सामना करना पड़ा है. ये आंकड़े गवाही दे रहे हैं, कि पाकिस्तान का टेस्ट फॉर्मेट से वजूद मिटता नजर आ रह है. WTC खेलने वाली सभी टीमों की तुलना में पाकिस्तान की जीत का आंकड़ा सबसे कम है. पाकिस्तान ने पिछले 3 सालों में SENA (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया) देशों में एक भी जीत नसीब नहीं हुई है.
अब बात करते हैं, पिछले 10 साल में पाकिस्तान क्रिकेट के साथ ऐसा क्या हुआ जो टेस्ट टीम की लुटिया पूरी तरह से डूब चुकी है. वजह हम आपको तीन प्वाइंटर्स में समझाते हैं. बैटिंग, बॉलिंग और टीम में गुच्छों में बदलाव इसके पीछे बड़ी वजह हैं.
बल्लेबाजी के आंकड़े देखें तो टीम टेस्ट में 300 रन बनाने को तरसती दिखी है. हाल ही में इंग्लैंड टूर पर शुरुआती पांच पारियों पर नजर डालें तो टीम ने 110, 194, 171, 135 और 133 रन ही बनाने में कामयाब हुई. 2025-27 WTC चक्र में टीम की बैटिंग का औसत पहली पारी में 25.60 जबकि दूसरी पारी में महज 18.65 का देखने को मिलता है. बाकी के आंकड़े नीचे दिए गए ग्राफिक्स में देखे जा सकते हैं.

पाकिस्तान क्रिकेट में 10 साल पीछे जाएं तो गेंदबाजी पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत थी. लेकिन आज के दौर में पाकिस्तान की बॉलिंग यूनिट फुस्स हो चुकी है, इसकी गवाही आंकड़े दे रहे हैं. पाकिस्तानी पेसर्स की बात करें तो पिछले 4 साल में 35.94 औसत, 3.64 की इकोनॉमी और स्ट्राइक रेट 59.2 का है. ये मुख्य टीमों की तुलना में सबसे खराब आंकड़े हैं. कोई भी गेंदबाज 4 साल से 10 विकेट हॉल एक मैच में नहीं ले पाया है. पाकिस्तानी पेसर्स ने 2024 से अभी तक महज 1 प्रतिशत गेंदे ही 140+ की रफ्तार से फेंकी हैं. ये आंकड़ा भी 9 टीमों में सबसे कम है. संयुक्त बॉलिंग के आंकड़े ग्राफिक्स से समझे जा सकते हैं.

टीम और मैनेजमेंट में जरूरत से ज्यादा बदलाव भी एक बर्बादी की मुख्य वजह है. 2022 के बाद से 33 टेस्ट मैच में 41 अलग-अलग प्लेयर्स को आजमाया गया. पिछले 4 साल में महज 2 मैच ऐसे हैं, जब प्लेइंग-XI में बदलाव नहीं हुआ. प्लेइंग-11 में 18 बार 3, जबकि 11 बार 4 या उससे ज्यादा बदलाव हुए. इतना ही नहीं, इन 4 सालों में 4 अलग-अलग चेयरमैन आए, 10 हेड कोच बदले गए. वहीं, कप्तानी में भी थोक के बाद बदलाव देखने को मिलते रहे हैं. थोड़ा और पीछे जाएं, 2011 से टीम में किस तरीके के बदलाव हुए, ग्राफिक्स से समझ सकते हैं.
