पाकिस्तान का हथियार ही बना सिरदर्द... 5 सालों में फुस्स हुई पेस बैटरी, आंकड़े दे रहे गवाही
एक दौर था, जब वर्ल्ड क्रिकेट में पाकिस्तान की गेंदबाजी की तूती बोलती थी. पाकिस्तान की बॉलिंग टीम का सबसे बड़ा हथियार थी, लेकिन आज वही हथियार सिरदर्द बन चुका है. पिछले लगभग 5 सालों में पाकिस्तान का ग्राफ कैसे गिरा हम आपको समझाते हैं.
पाकिस्तान क्रिकेट टीम को हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ 2 टेस्ट की सीरीज में एक भी जीत नसीब नहीं हुई. इसके बाद से ही पाकिस्तान की बैटिंग और बॉलिंग सवालों के घेरे में है. एक दौर था जब पाकिस्तान गेंदबाजी टीम का सबसे बड़ा हथियार थी, लेकिन आज वही हथियार सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है. पिछले साल सालों में पाकिस्तान की पेस बैटरी का ग्राफ कैसे गिरा, आंकड़ों से हम आपको समझाते हैं. 1980, 1990 और 2000 के दशक में इमरान खान, वसीम अकरम, वकार यूनिस और शोएब अख्तर जैसे दिग्गजों ने पाकिस्तान की बॉलिंग का जो खौफ दुनियाभर में भरा था, वो अब खत्म हो चुका है.
जनवरी 2022 के बाद के कम से कम 30 टेस्ट आंकड़ों पर नजर डालें तो दुनिया की शीर्ष टीमों में पाकिस्तान के तेज गेंदबाज सबसे निचले पायदान पर पहुंच चुके हैं. बात चाहे औसत की हो या फिर स्ट्राइक रेट की, पाकिस्तान की बॉलिंग हर तरह से फुस्स ही नजर आई है. औसत के मामले में पाकिस्तान की टीम सबसे नीचे हैं, वहीं विकेट लेने में भी पाकिस्तान के आज के दौर के गेंदबाज पापड़ बेलते नजर आते हैं.
पाकिस्तान की बॉलिंग का खराब औसत
अगर पाकिस्तान के तेज गेंदबाजी की बात करें तो जनवरी 2022 से अब तक औसत 35.53 रहा है, जो सभी प्रमुख टीमों में सबसे खराब है. तुलना के लिए देखें तो दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों का औसत 23.78 और ऑस्ट्रेलिया का 23.91 है। यहां तक कि भारत (27.83) और श्रीलंका (30.67) भी पाकिस्तान से काफी आगे हैं. वहीं, पाकिस्तान की बॉलिंग का खराब स्ट्राइक रेट विकेट लेने में सुस्ती का सबूत है.
1 विकेट लेने के लिए लगते हैं 10 ओवर
पाकिस्तानी तेज गेंदबाजों का स्ट्राइक रेट 59.3 का है, यानी उन्हें एक विकेट चटकाने के लिए लगभग 10 ओवर फेंकने पड़ रहे हैं. नीचे से दूसरे स्थान पर साउथ अफ्रीका है, जिनके पेसर हर 42.3 गेंदों और ऑस्ट्रेलिया के पेसर हर 43.4 गेंदों में विकेट झटक रहे हैं. 2022 के बाद 32 टेस्ट मैचों में पाकिस्तानी पेस अटैक सिर्फ 239 विकेट ही ले सका है, जबकि बांग्लादेश (224 विकेट) और श्रीलंका (225 विकेट) जैसी स्पिन-निर्भर टीमें भी लगभग इनके बराबर पहुंच चुकी हैं.
क्यों बर्बाद हो रहा पाकिस्तान का पेस अटैक?
अब सवाल होगा कि आखिर क्यों पाकिस्तान के पेस अटैक का ये हाल हो रहा है. फिटनेस इसके पीछे की वजह हो सकती है. शाहीन शाह अफरीदी, नसीम शाह और हारिस रऊफ जैसे गेंदबाजों के पास स्पीड तो है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में जरूरी अनुशासन, धार और फिटनेस गायब दिखती है. घरेलू मैदानों पर बेजान पिचें भी इसकी वजह हैं, जो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पर बड़ा सवाल है. वहीं, टी20 लीग्स के चक्कर में वर्कलोड न संभाल पाना और बार-बार चोटिल होना पाकिस्तानी पेसर्स के पतन की मुख्य वजह बना है.