एक साल से ज्यादा समय तक इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर रहने के बावजूद मोहम्मद शमी की गेंदबाजी की धार कम नहीं हुई है. चेन्नई की भीषण गर्मी और मुश्किल परिस्थितियों में 36 साल के इस अनुभवी तेज गेंदबाज ने दलीप ट्रॉफी फाइनल में दो अहम विकेट चटकाए और ईस्ट जोन को खिताब दिलाने में मदद की. खास बात यह रही कि मोहम्मद शमी ने यह उपलब्धि अपने 100वें फर्स्ट क्लास मैच में हासिल की. ऐसे में यह मुकाबला उनके लिए सिर्फ एक घरेलू मैच नहीं, बल्कि उनके लंबे क्रिकेट करियर का बेहद खास पल बन गया.
मोहम्मद शमी के लिए क्रिकेट में मोटिवेशन का लेवल मैच या टूर्नामेंट के अनुसार नहीं बदलता है. मोहम्मद शमी का मानना है कि खिलाड़ी को हमेशा अगली चुनौती और अगले लेवल पर नजर रखनी चाहिए. मोहम्मद शमी ने दलीप ट्रॉफी फाइनल के बाद कहा कि अगर खिलाड़ी खुद को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित नहीं कर सकता, तो उसकी सोच में ही कमी है. मोहम्मद शमी के मुताबिक चाहे आप क्रिकेट के किसी भी लेवल पर खेल रहे हों, आपकी नजर हमेशा अगली चुनौती पर होनी चाहिए.
मोहम्मद शमी ने मार्च 2025 के बाद भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेला है. टेस्ट क्रिकेट में वह आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2023 के फाइनल में ओवल के मैदान पर खेले थे. इसके बावजूद दलीप ट्रॉफी फाइनल 2026 का प्रदर्शन बताता है कि मोहम्मद शमी अब भी क्रिकेट को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं. दलीप ट्रॉफी फाइनल में मोहम्मद शमी ने साउथ जोन के खिलाड़ी स्मरण रविचंद्रन और शेख रशीद को आउट किया था. ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन बनाए थे. इसके बाद साउथ जोन की पहली पारी 336 रन पर सिमट गई. ईस्ट जोन ने पहली पारी के आधार पर 372 रन की विशाल बढ़त हासिल की और इसी बढ़त के आधार पर उसने दलीप ट्रॉफी अपने नाम कर ली.
दलीप ट्रॉफी फाइनल में मोहम्मद शमी का प्रदर्शन ऐसे समय आया है, जब भारतीय तेज गेंदबाजी को लेकर लगातार चर्चा हो रही है. लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर रहने के बावजूद मोहम्मद शमी की विकेट लेने की क्षमता और अनुभव अभी भी उनकी सबसे बड़ी ताकत है. हालांकि, टीम इंडिया में वापसी को लेकर मोहम्मद शमी ने कोई बड़ा दावा नहीं किया है. मोहम्मद शमी का फोकस साफ है कि उन्हें जो भी मौका मिले, उसमें वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहते हैं.
अपने भविष्य को लेकर मोहम्मद शमी ने फैसला सेलेक्टर्स और परिस्थितियों पर छोड़ दिया है. मोहम्मद शमी का कहना है कि उनका काम मेहनत करना है, जबकि बाकी चीजें ऊपर वाले के हाथ में हैं. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन अजीत अगरकर समेत अन्य नेशनल सेलेक्टर्स ने मोहम्मद शमी को स्टैंड्स से नई और पुरानी गेंद से कमाल करते हुए देखा. मुश्किल हालात में भी मोहम्मद शमी आसानी से कन्वेंशनल स्विंग से रिवर्स स्विंग में बदल रहे थे. भारतीय टीम में सेलेक्शन के सवाल पर मोहम्मद शमी ने कहा, 'मेरा काम बस कड़ी मेहनत करना है, बाकी सब अल्लाह के हाथ में है.'